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Supreme Court: 'भगवान को भी नहीं छोड़ा', सबरीमाला सोना चोरी मामले में कोर्ट की सख्त टिप्पणी; ये याचिका खारिज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Mon, 05 Jan 2026 07:46 PM IST
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सार
सबरीमाला सोना चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने के.पी. शंकर दास की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि देवस्वोम बोर्ड सदस्य होने के नाते वह जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। अब तक 10 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की खारिज।
- फोटो : ANI
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विस्तार
केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से जुड़े सोना चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व सदस्य के.पी. शंकर दास की याचिका खारिज करते हुए तीखी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि आपने भगवान को भी नहीं छोड़ा।
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यह मामला सबरीमाला मंदिर में द्वारपालक देवताओं की मूर्तियों और श्रीकोविल के दरवाजों से सोना चोरी होने से जुड़ा है। के.पी. शंकर दास ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर केरल हाईकोर्ट की उन टिप्पणियों को हटाने की मांग की थी, जिनमें कहा गया था कि वह और के. विजयकुमार आपराधिक साजिश के आरोपों से नहीं बच सकते। सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को मानने से इनकार कर दिया।
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जवाबदेही से नहीं बच सकते
जस्टिस दिपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि देवस्वोम बोर्ड के सदस्य होने के नाते शंकर दास की भी जवाबदेही बनती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मंदिर जैसी पवित्र जगह पर हुई चोरी के मामले में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकते।
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अब तक 10 लोग गिरफ्तार
इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी बनाई गई थी। अब तक इस केस में दो पूर्व देवस्वोम बोर्ड अध्यक्षों समेत कम से कम 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हाईकोर्ट के निर्देश पर एसआईटी को हाल ही में जांच पूरी करने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय भी दिया गया है।
जांच में दखल का आरोप
मामले को लेकर केरल की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने मुख्यमंत्री कार्यालय पर आरोप लगाया है कि एसआईटी पर जांच धीमी करने का दबाव डाला जा रहा है। विपक्ष का दावा है कि स्थानीय निकाय चुनाव से पहले सरकार राजनीतिक नुकसान से बचने की कोशिश कर रही है।
वरिष्ठ नेताओं से सवाल-जवाब
एसआईटी ने हाल ही में पूर्व देवस्वोम मंत्री और वरिष्ठ सीपीआई(एम) विधायक कड़कमपल्ली सुरेंद्रन से भी पूछताछ की है। इसके अलावा पूर्व देवस्वोम बोर्ड अध्यक्ष पी.एस. प्रसांत से भी सवाल किए गए। विपक्ष का आरोप है कि सुरेंद्रन से हुई पूछताछ को सरकार के कहने पर गोपनीय रखा गया।
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