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Padma Awards 2026: पुस्तकालय बनाने वाले बस कंडक्टर से जनजातीय कलाकार तक, गुमनाम नायकों को पद्मश्री
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 25 Jan 2026 04:33 PM IST
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सार
Padma Awards 2026: गणतंत्र दिवस पर देशभर से 45 लोगों को 'गुमनाम नायकों' की श्रेणी में पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा, जिनमें पूर्व बस कंडक्टर, डॉक्टर, कलाकार और समाजसेवी शामिल हैं। इन सभी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में असाधारण योगदान दिया। सरकार ने देश के कोने-कोने से ऐसे आम नागरिकों को इस पुरस्कार के लिए चुना है, जिन्होंने बिना सुर्खियों में आए निस्वार्थ सेवा की। पढ़ें रिपोर्ट-
गुमनाम नायकों को सम्मान
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभर से 45 लोगों को गुमनाम नायकों की श्रेणी में पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। इनमें दुनिया का सबसे बड़ा नि:शुल्क पुस्तकाल बनाने वाले एक पूर्व बस कंडक्टर से लेकर एशिया का पहला मानव दूध बैंक बैंक शुरू करने वाली एक बाल रोग विशेषज्ञ और 90 वर्षीय दुर्लभ वाद्य यंत्र कलाकार शामिल हैं।
पूर्व बस कंडक्टर ने बनाया दुनिया का सबसे बड़ा मुफ्त पुस्तकालय
पूर्व बस कंडक्टर अंके गौड़ा ने दुनिया का सबसे बड़ा नि:शुल्क पुस्तकालय 'पुस्तक माने' बनाया है। इस पुस्तकालय में 20 भाषाओं की 20 लाख से अधिक किताबें और दुर्लभ पांडुलिपियां शामिल हैं। अंके गौड़ा (75 वर्षीय) कर्नाटक के मैसूर के पास हरलहल्ली गांव में रहते हैं। पुस्तक प्रेमी गौड़ा को देशभर के विद्यार्थियों और पाठकों को सशक्त बनाने के उनके अनूठे प्रयास के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा।
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बाल रोग विशेषज्ञ ने एशिया का पहला मानव दूध बैंक बनाया
उनके साथ मुंबई की बाल रोग विशेषज्ञ अर्मिडा फर्नांडिस को भी पद्मश्री मिलेगा, जिन्होंने एशिया का पहला मानव दूध बैंक स्थापित किया और शिशुओं के जीवन को बचाने की दिशा में अहम योगदान दिया। इसके अलावा मध्य प्रदेश के बुंदेली युद्ध कला प्रशिक्षक भगवानदास रैकवार, महाराष्ट्र के जनजातीय तरपा वादक भिकलिया लाडकिया धिंडा (90 वर्षीय) और जम्मू-कश्मीर के समाजसेवी बृज लाल भट्ट को भी इस सूची में शामिल किया गया है।
असाधारण योगदान देने वाले गुमानाम लोगों को सम्मान
सूत्रों ने बताया कि आम लोगों के असाधारण योगदान को सम्मानित करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस साल के पद्म पुरस्कारों में देश के कोने-कोने से ऐसे गुमनाम नायकों को चुना गया है, जिन्होंने चुपचाप समाज और देश की सेवा की है। इन पुरस्कारों में सीमा क्षेत्रों में स्वदेशी विरासत के संरक्षण, राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने, जनजातीय भाषाओं और पारंपरिक युद्ध कलाओं के प्रचार, विलुप्त होती कलाओं और बुनाई को बचाने, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा देने जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को शामिल किया गया है।
ये भी पढ़ें: वरिष्ठ पत्रकार मार्क टली का निधन, 90 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस
शिक्षा, कला और विज्ञान में योगदान देने वाले भी सम्मानित
सूत्रों के मुताबिक, इन सभी ने निजी जीवन कठिनाइयों और जीवन की त्रासदियों को पार करते हुए न केवल अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल की, बल्कि समाज की सेवा को भी अपना लक्ष्य बनाया। इनमें हाशिए पर रहने वाले समुदायों, दलितों, जनजातियों और दूरदराज व दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले लोग भी शामिल हैं। ये ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन दिव्यांगों, महिलाओं, बच्चों, दलितों और आदिवासियों की सेवा में समर्पित किया है और स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, स्वच्छता और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में काम किया है।
प्राचीन तमिल हथियार आधारित युद्ध कला को दिया बढ़ावा
पुडुचेरी केके पाजनिवेल को प्राचीन तमिल हथियार आधारित युद्ध कला 'सिलंबम' को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए पद्मश्री के लिए चुना गया है। वहीं, पिछले 60 वर्षों से देशभर में हिंदी के प्रचार-प्रसार में जुटे वरिष्ठ पत्रकार कैलाश चंद्र पंत को साहित्य और शिक्षा श्रेणी में पद्मश्री दिया जाएगा। हरियाणा के खेमराज सुंदरीयाल को टेपेस्ट्री और जामदानी (प्राचीन और कलात्मक वस्त्र बुनाई तकनीक) को संरक्षित करने और हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के हजारों कारीगरों को इसका प्रशिक्षण देने के लिए पद्मश्री के लिए चुना गया है।
इन गुमनाम नायकों को चुना गया पद्मश्री के लिए चुना गया-
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पूर्व बस कंडक्टर ने बनाया दुनिया का सबसे बड़ा मुफ्त पुस्तकालय
पूर्व बस कंडक्टर अंके गौड़ा ने दुनिया का सबसे बड़ा नि:शुल्क पुस्तकालय 'पुस्तक माने' बनाया है। इस पुस्तकालय में 20 भाषाओं की 20 लाख से अधिक किताबें और दुर्लभ पांडुलिपियां शामिल हैं। अंके गौड़ा (75 वर्षीय) कर्नाटक के मैसूर के पास हरलहल्ली गांव में रहते हैं। पुस्तक प्रेमी गौड़ा को देशभर के विद्यार्थियों और पाठकों को सशक्त बनाने के उनके अनूठे प्रयास के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा।
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बाल रोग विशेषज्ञ ने एशिया का पहला मानव दूध बैंक बनाया
उनके साथ मुंबई की बाल रोग विशेषज्ञ अर्मिडा फर्नांडिस को भी पद्मश्री मिलेगा, जिन्होंने एशिया का पहला मानव दूध बैंक स्थापित किया और शिशुओं के जीवन को बचाने की दिशा में अहम योगदान दिया। इसके अलावा मध्य प्रदेश के बुंदेली युद्ध कला प्रशिक्षक भगवानदास रैकवार, महाराष्ट्र के जनजातीय तरपा वादक भिकलिया लाडकिया धिंडा (90 वर्षीय) और जम्मू-कश्मीर के समाजसेवी बृज लाल भट्ट को भी इस सूची में शामिल किया गया है।
असाधारण योगदान देने वाले गुमानाम लोगों को सम्मान
सूत्रों ने बताया कि आम लोगों के असाधारण योगदान को सम्मानित करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस साल के पद्म पुरस्कारों में देश के कोने-कोने से ऐसे गुमनाम नायकों को चुना गया है, जिन्होंने चुपचाप समाज और देश की सेवा की है। इन पुरस्कारों में सीमा क्षेत्रों में स्वदेशी विरासत के संरक्षण, राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने, जनजातीय भाषाओं और पारंपरिक युद्ध कलाओं के प्रचार, विलुप्त होती कलाओं और बुनाई को बचाने, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा देने जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को शामिल किया गया है।
ये भी पढ़ें: वरिष्ठ पत्रकार मार्क टली का निधन, 90 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस
शिक्षा, कला और विज्ञान में योगदान देने वाले भी सम्मानित
- छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में स्कूल बनाने वाली बुड़री थाती
- ओडिशा के संथाली लेखक और संगीतकार चरण हेम्ब्रम
- मुरादाबाद के बारीक पीतल नक्काशी विशेषज्ञ चिरंजी लाल यादव
- गुजरात की पारंपरिक लोक कला 'मानभट्ट' के कलाकार धार्मिकलाल चुनिलाल पांड्या
- हैदराबाद के आनुवंशिकी वैज्ञानिक कुमारस्वामी थंगराज, जिन्होंने अफ्रीका से भारत तक मानव प्रवास का पता लगाया
सूत्रों के मुताबिक, इन सभी ने निजी जीवन कठिनाइयों और जीवन की त्रासदियों को पार करते हुए न केवल अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल की, बल्कि समाज की सेवा को भी अपना लक्ष्य बनाया। इनमें हाशिए पर रहने वाले समुदायों, दलितों, जनजातियों और दूरदराज व दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले लोग भी शामिल हैं। ये ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन दिव्यांगों, महिलाओं, बच्चों, दलितों और आदिवासियों की सेवा में समर्पित किया है और स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, स्वच्छता और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में काम किया है।
प्राचीन तमिल हथियार आधारित युद्ध कला को दिया बढ़ावा
पुडुचेरी केके पाजनिवेल को प्राचीन तमिल हथियार आधारित युद्ध कला 'सिलंबम' को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए पद्मश्री के लिए चुना गया है। वहीं, पिछले 60 वर्षों से देशभर में हिंदी के प्रचार-प्रसार में जुटे वरिष्ठ पत्रकार कैलाश चंद्र पंत को साहित्य और शिक्षा श्रेणी में पद्मश्री दिया जाएगा। हरियाणा के खेमराज सुंदरीयाल को टेपेस्ट्री और जामदानी (प्राचीन और कलात्मक वस्त्र बुनाई तकनीक) को संरक्षित करने और हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के हजारों कारीगरों को इसका प्रशिक्षण देने के लिए पद्मश्री के लिए चुना गया है।
इन गुमनाम नायकों को चुना गया पद्मश्री के लिए चुना गया-
- अंके गौड़ा (कर्नाटक)
- आर्मिडा फर्नांडिस (महाराष्ट्र)
- भगवान दास रैकवार (मध्य प्रदेश)
- भिकल्या लाडक्या धिंडा (महाराष्ट्र )
- बृजलाल भट्ट (जम्मू-कश्मीर)
- बुधरी ताती (छत्तीसगढ़ )
- चरण हेम्ब्रम (ओडिशा)
- चिरंजी लाल यादव (उत्तर प्रदेश)
- धार्मिक लाल चुन्नी लाल पांड्या (गुजरात)
- कुमारस्वामी थंगराज (तेलंगाना)
- पद्मा गुरमेट (जम्मू कश्मीर)
- पुन्नियामूर्ति नटेसन (तमिलनाडु)
- श्याम सुंदर (उत्तर प्रदेश)
- गफरुद्दीन मेवाती जोगी (राजस्थान)
- हैली वार (मेघालय)
- इंदरजीत सिंह सिद्धू (चंडीगढ़)
- के. पाजनिवेल (पुडुचेरी)
- कैलाश चंद्र पंत (मध्य प्रदेश)
- खेम राज सुंदरीयाल (हरियाणा)
- कोल्लक्कायिल देवकी अम्मा जी (केरल)
- महेंद्र कुमार मिश्रा (ओडिशा)
- मीर हाजीभाई कासमभाई (गुजरात)
- मोहन नागर (मध्य प्रदेश)
- नरेश चंद्र देव वर्मा (त्रिपुरा)
- निलेश विनोदचंद्र मंडलेवाला (गुजरात)
- नूरुद्दीन अहमद (असम)
- ओथुवार तिरुथानी स्वामिनाथन (तमिलनाडु)
- पोखिला लेकथेपी (असम)
- आर. कृष्णन (तमिलनाडु)
- रामचंद्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले (छत्तीसगढ़)
- रघुपत सिंह (उत्तर प्रदेश)
- रघुवीर तुकाराम खेड़कर (महाराष्ट्र)
- राजस्थापति कालीअप्पा गौंडर (तमिलनाडु)
- रामा रेड्डी मामिडी (तेलंगाना)
- एस. जी. सुशीला अम्मा (कर्नाटक)
- सांग्युसांग एस. पोंगेनर (नागालैंड)
- शफी शौक (जम्मू कश्मीर)
- श्रीरंग देवबा लाड (महाराष्ट्र)
- सिमांचल पात्रो (ओडिशा)
- सुरेश हनगावड़ी (कर्नाटक)
- तगा राम भील (राजस्थान)
- तेची गुबिन (आंध्र प्रदेश )
- तिरुवारूर भक्तवत्सलम (तमिलनाडु)
- विश्व बंधु (बिहार)
- युमनाम जात्रा सिंह (मणिपुर)
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