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दिल्ली ब्लास्ट: फरार आरोपी मुजफ्फर राथर के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू, इंटरपोल से मांगी गई मदद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: लव गौर Updated Sun, 25 Jan 2026 05:26 PM IST
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सार

Delhi Blast News: दिल्ली ब्लास्ट के फरार आरोपी मुजफ्फर राथर के खिलाफ अब शिकंजा और तेजी से कसना शुरू हो गया है। राथर के खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

Delhi Red Fort blast Interpol Red Corner notice may soon be issued against accused Dr Muzaffar Rather
दिल्ली में हुए धमाके में जले वाहन (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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दिल्ली के एतिहासिक लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए विनाशकारी विस्फोट में 35 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। इस पूरे धमाके में 'सफेदपोश' आतंकी मॉड्यूल सामने आया था। धमाके को कार के अंदर विस्फोटक रखकर अंजाम दिया गया था। ऐसे में कार ब्लास्ट मामले में फरार आरोपी मुजफ्फर अहमद राथर के खिलाफ अब कड़ा कदम उठाने की तैयारी की जा रही है।
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अफगानिस्तान की धरती से अहम रसद सहायता और धन मुहैया कराने वाले सह-साजिशकर्ता के रूप में नाम सामने आने के बाद व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल के आरोपी डॉ. मुजफ्फर राथर के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जल्द ही जारी किया जा सकता है।
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दरअसल, पेशे से बाल रोग विशेषज्ञ और दक्षिण कश्मीर का रहने वाले राथर को एनआईए की एक विशेष अदालत पहले ही भगोड़ा अपराधी घोषित कर चुकी है। ऐसे में अब राथर के खिलाफ इंटरपोल का नोटिस जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। आरोपी मुजफ्फर अहमद राथर ने डॉ. उमर उन नबी को रसद, वित्तपोषण, संचार और योजना बनाने में मदद की थी।


अधिकारियों ने आरोप लगाया कि राथर एक प्रमुख सह-साजिशकर्ता के रूप में सामने आया है, जिसने कथित तौर पर भारत से भागने के बाद विदेश से हमले की योजना बनाई थी। उन्होंने बताया कि जांचकर्ताओं ने रसद, एन्क्रिप्टेड संचार और कट्टरपंथी नेटवर्क की ऐसी चीजों का पता लगाया है, जो सीधे अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकानों तक ले जाते हैं, जहां राथर के वर्तमान में छिपे होने का संदेह है।

अधिकारियों ने बताया कि उमर ने राथर और अफगानिस्तान स्थित सहयोगियों के समर्थन से आत्मघाती हमला किया, जिन्होंने रसद, संचार, धन और योजना उपलब्ध कराई। अधिकारियों ने आरोप लगाया कि राथर ने विशेष रूप से संपर्क और वित्तपोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि राथर आतंकवादियों के साथ लगातार संपर्क में रहे और बम बनाने और परिचालन रणनीति से संबंधित जानकारी के लिए अफगानिस्तान स्थित संचालकों के साथ उनके संचार को सुविधाजनक बनाया।

राथर पिछले साल अगस्त के मध्य में दिल्ली विस्फोट से कुछ ही समय पहले भारत से चला गया था, और पहले दुबई की यात्रा की और बाद में अफगानिस्तान में प्रवेश किया, जहां वह वर्तमान में छिपा है। अधिकारियों ने बताया कि व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल में गिरफ्तार अन्य आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि राथर ने कथित तौर पर आतंकी मॉड्यूल के लिए धन जुटाने में सहायता की और आतंकी साजिश के वित्तीय कोष में लगभग 6 लाख रुपये का योगदान दिया।

2021 में राथर ने डॉ. मुजम्मिल अहमद गनाई और उमर के साथ तुर्किए की यात्रा की थी और इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य बाहरी संचालकों के साथ संपर्क स्थापित करना या अफगानिस्तान की ओर निकलने का प्रयास करना था। हालांकि उस समय वे अफगानिस्तान में दाखिल नहीं हुए थे, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि इस यात्रा को उनके कट्टरपंथीकरण और तैयारी नेटवर्क गतिविधियों का हिस्सा माना जाता है।

यात्रा के बाद राथर, उमर और गनाई, जो फरीदाबाद के अल फलाह विश्वविद्यालय में पढ़ाते थे, ने खुले बाजार से भारी मात्रा में रसायन जमा करना शुरू कर दिया, जिसमें 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर शामिल थे, जिनमें से अधिकांश को विश्वविद्यालय परिसर के पास इकट्ठा किया गया था।

मालूम हो कि आतंकी साजिश तब नाकाम हो गई जब श्रीनगर पुलिस की गहन जांच के परिणामस्वरूप गनाई को गिरफ्तार किया गया और विस्फोटकों को जब्त किया गया, जिससे संभवतः उमर घबरा गया और लाल किले के बाहर 'समय से पहले' विस्फोट हो गया। गौरतलब है कि 
पिछले साल 19 अक्टूबर को श्रीनगर के बाहरी इलाके नौगाम के बूनपोरा में दीवारों पर जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर दिखाई देने की एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण घटना के बाद जटिल अंतरराज्यीय आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।

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