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'लोकतंत्र में संस्थाएं अहम': पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ का बयान, सार्वजनिक अस्पतालों की स्थिति बेहतर बनाने पर जोर
Sun, 25 Oct 2026 01:50 PM IST
देवेश त्रिपाठी
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sun, 25 Oct 2026 01:50 PM IST
सार
पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने लोकतंत्र में सरकारी और निजी संस्थानों की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए संस्थानों को बनाए रखना और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाना जरूरी है। स्वास्थ्य क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने सरकारी अस्पतालों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
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पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि किसी भी समाज में, खासकर लोकतंत्र में संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने और विकास के लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकारी और निजी, दोनों तरह के संस्थानों को बनाए रखना और उन्हें मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी मौजूदा संस्थाओं को मजबूत करना होगा, साथ ही उन्हें और अधिक सशक्त बनाना होगा।
पूर्व सीजेआई का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब देशभर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर और चुनाव आयोग में अनियमितताओं पर सियासी बवाल छिड़ा हुआ है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन सीईसी के खिलाफ सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में प्रदर्शन कर चुके हैं।
सार्वजनिक अस्पतालों की मजबूती पर दिया जोर
स्वास्थ्य सेवाओं का जिक्र करते हुए पूर्व सीजेआई ने कहा, ''मरीजों की देखभाल और उनके कल्याण के मामले में सरकारी अस्पतालों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इन अस्पतालों में ऐसे लोग इलाज कराने आते हैं, जिन्हें वास्तव में चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे मरीज भी शामिल हैं, जो दूर-दराज के इलाकों से इलाज के लिए पहुंचते हैं।''
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चंद्रचूड़ ने कहा कि इस स्थिति को देखते हुए सरकारी अस्पतालों और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को अधिक मजबूत और सक्षम बनाने की तत्काल जरूरत है। उन्होंने जोर दिया कि देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण संस्थानों को न केवल बनाए रखना चाहिए, बल्कि उनकी कार्यक्षमता और मजबूती बढ़ाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जाने चाहिए।
पूर्व सीजेआई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस ने किए चौंकाने वाले दावे
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस संजय किशन कौल ने अपनी आत्मकथा 'विदाउट फियर ऑर फेवर' में पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के कार्यकाल से जुड़ी कुछ घटनाओं का जिक्र किया है। कौल ने दावा किया कि डीवाई चंद्रचूड़ न्यायिक नियुक्तियों के लिए प्रस्तावित नामों पर कॉलेजियम की औपचारिक बैठक से पहले ही सरकार से चर्चा करते थे। इस तरीके को लेकर दोनों के बीच मतभेद थे।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2023 में सेवानिवृत्त हुए जस्टिस कौल का मानना था कि कॉलेजियम की चर्चा से पहले सरकार की सहमति लेने से गलत संदेश जाता है और नियुक्तियों में सरकार के प्रभाव की आशंका बढ़ती है।
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पूर्व सीजेआई का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब देशभर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर और चुनाव आयोग में अनियमितताओं पर सियासी बवाल छिड़ा हुआ है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन सीईसी के खिलाफ सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में प्रदर्शन कर चुके हैं।
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सार्वजनिक अस्पतालों की मजबूती पर दिया जोर
स्वास्थ्य सेवाओं का जिक्र करते हुए पूर्व सीजेआई ने कहा, ''मरीजों की देखभाल और उनके कल्याण के मामले में सरकारी अस्पतालों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इन अस्पतालों में ऐसे लोग इलाज कराने आते हैं, जिन्हें वास्तव में चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे मरीज भी शामिल हैं, जो दूर-दराज के इलाकों से इलाज के लिए पहुंचते हैं।''
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#WATCH | Delhi: Former CJI DY Chandrachud says, "In any society—especially in a democracy—institutions are essential. Whether they are public or private, institutions are necessary for us to progress and for the nation to move forward. We must strengthen our existing institutions and make them more robust. In the healthcare sector, in particular, there is a critical need to focus on patient care and welfare. Public hospitals, for instance, serve the poor and the needy—many of whom travel from great distances to seek care. Therefore, it is imperative that we further strengthen and fortify our public hospitals and public health infrastructure..."
— ANI (@ANI) October 25, 2026
चंद्रचूड़ ने कहा कि इस स्थिति को देखते हुए सरकारी अस्पतालों और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को अधिक मजबूत और सक्षम बनाने की तत्काल जरूरत है। उन्होंने जोर दिया कि देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण संस्थानों को न केवल बनाए रखना चाहिए, बल्कि उनकी कार्यक्षमता और मजबूती बढ़ाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जाने चाहिए।
पूर्व सीजेआई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस ने किए चौंकाने वाले दावे
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस संजय किशन कौल ने अपनी आत्मकथा 'विदाउट फियर ऑर फेवर' में पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के कार्यकाल से जुड़ी कुछ घटनाओं का जिक्र किया है। कौल ने दावा किया कि डीवाई चंद्रचूड़ न्यायिक नियुक्तियों के लिए प्रस्तावित नामों पर कॉलेजियम की औपचारिक बैठक से पहले ही सरकार से चर्चा करते थे। इस तरीके को लेकर दोनों के बीच मतभेद थे।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2023 में सेवानिवृत्त हुए जस्टिस कौल का मानना था कि कॉलेजियम की चर्चा से पहले सरकार की सहमति लेने से गलत संदेश जाता है और नियुक्तियों में सरकार के प्रभाव की आशंका बढ़ती है।