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जी7 में दिखी भारत की कूटनीतिक ताकत: पीएम मोदी ने कई वैश्विक नेताओं से की अहम मुलाकातें, जानें क्या हुई बातचीत

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, एवियन-लेस-बैंस Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 17 Jun 2026 02:13 AM IST
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G7 highlights India’s diplomatic strength: PM Modi holds key meetings with global leaders,
जी7 शिखर सम्मेलन - फोटो : एक्स/नरेंद्र मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान 'नई साझेदारियां बनाने और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर मजबूत करने' विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र में अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, आज की दुनिया पहले से कहीं अधिक आपस में जुड़ी और एक-दूसरे पर निर्भर हो गई है। ऐसे में यह विषय और भी अहम हो जाता है। लेकिन कोई भी साझेदारी तभी सफल हो सकती है, जब उसकी नींव भरोसे पर टिकी हो।


उन्होंने कहा, आपसी भरोसा आज सबसे अहम रणनीतिक संपत्ति है। लेकिन दुख की बात है कि आज दुनिया में संसाधनों की कमी नहीं है, बल्कि भरोसे की कमी है और हमारे साझेदारियों का भविष्य इसी भरोसे को फिर से बनाने पर निर्भर करता है।
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प्रधानमंत्री ने कहा, भारत में हम दुनिया को एक परिवार के रूप में देखते हैं। हमारा अनुभव बताता है कि विकास तभी सबसे प्रभावी होता है, जब वह लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा होता है। इसी सिद्धांत पर हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां आधारित हैं, जैसे अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा सहनशील अवसंरचना गठबंधन, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, मिशन लाइफ और 'एक पेड़ मां के नाम'।

भारत-कनाडा में साल के अंत तक होगा आर्थिक भागीदारी समझौता
प्रधानमंत्री ने अपने कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी से भी मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद उन्होंने एक्स पर लिखा, एवियन जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी से मुलाकात कर खुशी हुई। एक वर्ष से भी कम समय में यह हमारी चौथी मुलाकात है, जो भारत-कनाडा संबंधों को मजबूत करने के हमारे संकल्प को दर्शाता है। हमने दोनों देशों के बीच संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा की, विशेष रूप से पिछली मुलाकात के बाद हुई प्रगति पर चर्चा की।

स्टार्मर ने मोदी से मुलाकात में व्यापार और निवेश बढ़ाने पर जताई सहमति
उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ भी मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने इसे एक शानदार मुलाकात बताया। उन्होंने कहा, भारत-ब्रिटेन संबंधों के लिहाज से पिछला साल बेहद उत्कृष्ट रहा है। व्यापार समझौते ने आर्थिक सहयोग के कई नए अवसर खोले हैं। आज की बातचीत का फोकस दोनों देशों के रिश्तों को और अधिक गति देने पर रहा। हमने नवाचार, एआई, कौशल विकास, खेल और अन्य क्षेत्रों में मिलकर काम करने के तरीकों पर चर्चा की। साथ ही दोनों देशों के लोगों के लाभ के लिए निवेश संबंधों को और मजबूत करने पर भी बात हुई।

प्रधानमंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी मुलाकात की। इस मुलाकात को लेकर एक्स पर प्रधानमंत्री ने कहा, अपने भाई, महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ एक बहुत अच्छी मुलाकात हुई। हमने भारत-यूएई संबंधों के विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा की और अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाने के तरीकों पर विचार किया। मैंने एक बार फिर यूएई में रह रहे भारतीय समुदाय के प्रति उनके और यूएई सरकार के स्नेह, देखभाल और चिंता के लिए आभार व्यक्त किया।

उन्होंने जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची से भी मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने इसे एक बहुत अच्छी मुलाकात करार दिया। उन्होंने कहा, भारत और जापान के बीच संबंधों को सभी क्षेत्रों में और मजबूत करने पर सहमति बनी, जिसमें खास तौर पर व्यापार और निवेश को प्राथमिकता दी जाएगी। 
पीएम मोदी की मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी से भी मुलाकात हुई। भारत और मिस्र के बीच लंबे समय से चली आ रही मित्रता को दोनों देश बहुत महत्व देते हैं।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो से भी मुलाकात की। प्रधानमंत्री नेकहा,  भारत और केन्या वैश्विक दक्षिण की आकांक्षाओं पर आधारित लंबे समय से साझेदारी साझा करते हैं और दोनों देश अपने लोगों के कल्याण के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के साथ मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि दो महीने पहले ही उनका भारत में स्वागत किया गया था। दोनों देश व्यापार, वाणिज्य और कई भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।

जी7 नेताओं ने कैंसर के खिलाफ एकजुट लड़ाई का किया आह्वान
वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए, जी7 नेताओं और भारत सहित भागीदार देशों ने कैंसर से एकजुट लड़ाई के लिए एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किया। इसमें अनुसंधान में तेजी लाने, वैज्ञानिक सहयोग को गहरा करने और यह सुनिश्चित करने की सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई गई कि कैंसर विज्ञान के क्षेत्र में होने वाली प्रगति हर मरीज तक पहुंचे।


इस बीमारी के खतरनाक वैश्विक बोझ को रेखांकित करते हुए घोषणापत्र में कहा गया है, दुनिया भर में हर साल लगभग एक करोड़ लोग कैंसर से जान गंवाते हैं। आबादी के बूढ़े होने और पर्यावरणीय व व्यावहारिक जोखिम कारकों के कारण, 2050 तक वैश्विक स्तर पर कैंसर के नए मामलों में 80 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है। यह समाज, स्वास्थ्य प्रणालियों और अर्थव्यवस्थाओं पर और भी बड़ा बोझ डालेगा।
 
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