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जी7 शिखर सम्मेलन: जापान ने उठाया हिंद-प्रशांत क्षेत्र और चीन की चुनौतियों का मुद्दा, होर्मुज पर कही ये बात

एजेंसी, एवियन। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 17 Jun 2026 03:42 AM IST
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g7 summit japan raised indo pacific china challenges issue
सनाए ताकाइची - फोटो : एक्स/साने ताकाइची
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फ्रांस में चल रहे जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने चीन से जुड़ी क्षेत्रीय चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया। जापानी प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति और विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों पर जी-7 देशों के बीच समन्वय आवश्यक है।


ताकाइची ने मंगलवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, जी-7 नेताओं के रात्रिभोज में पश्चिम एशिया की स्थिति, रूस-यूक्रेन संघर्ष, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। जापान ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति और चीन से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों पर अपना दृष्टिकोण साझेदार देशों के सामने रखा।
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ताकाइची के अनुसार, जी-7 देशों ने इन मुद्दों पर मिलकर और करीबी समन्वय के साथ काम करने की आवश्यकता पर सहमति जताई। जापानी प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता जताते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री व्यापार निर्बाध रूप से जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ सहयोग की वकालत की। 
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भारत की कोशिशें अफ्रीका को मजबूत कर रहीं
जी-7 सम्मेलन में पीएम मोदी ने कहा, भारत का मानना है कि साझेदारी की असली कसौटी यह नहीं है कि हम दूसरों के लिए क्या बनाते हैं, बल्कि यह है कि हम उन्हें खुद के लिए कुछ बनाने में कैसे सक्षम बनाते हैं। हमारी विकास साझेदारियां इसी भावना को दर्शाती हैं। हमारी कोशिशें सहयोगी देशों में क्षमता निर्माण और कौशल विकास पर केंद्रित रही हैं। प्रधानमंत्री ने इसके लिए अफ्रीका का उदाहरण दिया और कहा, अफ्रीका में भारत की साझेदारी में ट्रेनिंग, क्षमता निर्माण, जल संसाधन, कृषि और ऊर्जा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।


चीन के बढ़ते निर्यात से यूरोप चिंतित  
अमेरिका की ओर से पिछले आठ वर्षों से चीनी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाने के बावजूद चीन की औद्योगिक ताकत कमजोर नहीं हुई है। इसके उलट चीन का निर्यात लगातार बढ़ रहा है और वह अपने उत्पादों को अमेरिका के बजाय यूरोप व एशिया के अन्य खुले बाजारों की ओर मोड़ रहा है।
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