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AI Impact Summit: रोबो डॉग विवाद पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी की सफाई, कहा- हमारी प्रतिनिधि को जानकारी नहीं थी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: राहुल कुमार Updated Wed, 18 Feb 2026 06:40 PM IST
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सार

राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में चल रही एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा ले रही गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवादों में आ गई। विवाद यूनिवर्सिटी की एक प्रतिनिधि की तरफ से एक रोबोट को लेकर दी गई जानकारी से शुरू हुआ। अब इस बारे में यूनिवर्सिटी ने बयान जारी कर रूख स्पष्ट करने की कोशिश की है।

Galgotias University issues statement following row over display of a Chinese robodog at AI Impact Summit
गलगोटिया यूनिवर्सिटी - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में प्रदर्शित एक रोबोट को लेकर उठे विवाद पर सफाई देते हुए माफी मांगी है। इस विवाद को लेकर यूनिवर्सिटी की ओर से कहा गया है कि पवेलियन पर मौजूद हमारी एक प्रतिनिधि को उत्पाद की तकनीकी उत्पत्ति के बारे में जानकारी नहीं थी।

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यूनिवर्सिटी ने क्या कहा?
गलगोटिया यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हम एआई समिट में पैदा हुई भ्रम की स्थिति के लिए हृदय से क्षमा चाहते हैं। हमारे पवेलियन पर मौजूद हमारी एक प्रतिनिधि को उत्पाद की तकनीकी उत्पत्ति की जानकारी नहीं थी। कैमरे पर आने के उत्साह में उन्होंने तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी दे दी, जबकि उन्हें प्रेस से बात करने की अनुमति भी नहीं थी। आयोजकों की भावना को समझते हुए हमने परिसर छोड़ दिया है।
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कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह विवाद तब शुरू हुआ, जब यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर नेहा सिंह ने मंगलवार को मीडिया को 'ओरियन' नाम का एक रोबोटिक डॉग दिखाते हुए कहा था कि इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा विकसित किया गया है। वीडियो के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद लोगों ने इस रोबोट के वास्तव में एक 'यूनिट्री गो2' होने की बात कही, जिसे चीन की यूनिट्री रोबोटिक्स द्वारा निर्मित किया गया है। बताया जाता है कि इस विवाद के बाद सरकार ने यूनिवर्सिटी से एआई समिट में अपनी जगह खाली करने को भी कह दिया। 

कांग्रेस ने साधा निशाना
इस मामले पर कांग्रेस ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि एआई को लेकर देश की किरकरी हुई है। एआई समिट में चीन के रोबोट को अपना बताया गया है। वहीं, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लिखा कि देश की प्रतिभा और डेटा को बढ़ावा देने के बजाय यह एक अव्यवस्थित पीआर कवायद रह गई है।

सूचना प्रौद्योगिकी सचिव का वक्तव्य भी सामने आया
वहीं, सूचना प्रौद्योगिकी सचिव कृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार यह बर्दाश्त नहीं करेगी कि कोई प्रदर्शक किसी दूसरे के बनाए उत्पाद को अपना मौलिक उत्पाद बताकर प्रदर्शित करे। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि उद्देश्य नवाचार को दबाना नहीं है, लेकिन यह भ्रामक भी नहीं होना चाहिए। 

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केंद्रीय मंत्री ने कहा- गलत करने पर कार्रवाई की गई
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि एआई समिट में बहुत अच्छे-अच्छे सॉल्यूशन्स आए हैं। अगर यहां पर किसी ने गलत किया है, तो तुरंत उस पर कार्रवाई भी की गई है। जो दूसरे अच्छे सॉल्यूशन्स हैं, उन्हें भी देखना चाहिए।

दूसरे दिन भी यूनिवर्सिटी पर उठे सवाल
यूनिवर्सिटी पर लगातार दूसरे दिन भी सवाल उठे। एक और वायरल वीडियो में यूनिवर्सिटी की प्रतिनिधि ने एक सॉकर ड्रोन के बारे में बताया कि इसकी 'एंड टू एंड इंजीनियरिंग और एप्लीकेशन' यूनिवर्सिटी में तैयार की गई है। इस सॉकर ड्रोन को भी सोशल मीडिया यूजर्स ने दक्षिण कोरिया का बताया। 

विवादों में आईं प्रोफेसर ने क्या कहा?
यूनिवर्सिटी की नेहा सिंह ने कहा कि आपका छह, मुझे नौ भी लग सकता है। मैं अपनी जवाबदेही मानती हूं। उत्साह में शायद चीजों को शायद मैं साफ तौर पर सामने नहीं रख पाई। रोबोट डॉग पर ब्रांडिंग ऊपर ही लिखी गई है, लिहाजा हम यह दावा नहीं कर सकते कि हमने उसे बनाया है। हम जिम्मेदार संस्थान हैं। किसी चीज के डेवलपमेंट का मतलब यह नहीं है कि हमने उसका निर्माण भी किया है।

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