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गुजरात: 277 किलो गोमांस बरामदगी केस में तीन को उम्रकैद, हिंदू धर्मग्रंथों का हवाला देकर कोर्ट ने सुनाया फैसला
Thu, 29 Oct 2026 02:26 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, गांधीनगर
पीटीआई, गांधीनगर
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Thu, 29 Oct 2026 02:26 PM IST
सार
गुजरात के गांधीनगर की अदालत ने 277 किलोग्राम गोमांस बरामदगी मामले में तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने फैसले में हिंदू धर्मग्रंथों का हवाला दिया।
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गुजरात में गोहत्या मामले में तीन दोषियों को उम्रकैद
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
गुजरात के गांधीनगर जिले की एक अदालत ने गोवध के एक मामले में तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इन लोगों के पास से 277 किलोग्राम गोमांस बरामद हुआ था। अदालत ने गाय के धार्मिक महत्व को रेखांकित करने के लिए हिंदू धर्मग्रंथों का हवाला दिया।
कोर्ट ने कितना जुर्माना लगाया?
गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने इस फैसले का स्वागत किया। इसके साथ ही कहा कि यह एक स्पष्ट संदेश है कि राज्य में गोहत्या करने वालों को कानून कभी नहीं बख्शेगा। सोमवार को अपने फैसले में, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बी.आर. राजपूत ने दोषियों - वसीम कुरैशी, मोहम्मद रफीक कुरैशी और अशफाक बहेलिम - पर 3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। प्राचीन संस्कृत ग्रंथ 'मनुस्मृति' का हवाला देते हुए, अदालत ने कहा कि गाय केवल एक जानवर नहीं है, बल्कि इसे भौतिक समृद्धि और 'धर्म' (न्यायपूर्ण आचरण) का आधार माना जाता है।
न्यायाधीश ने क्या कहा?
न्यायाधीश ने कहा, 'ऋषि मनु ने पशुओं की सुरक्षा और देखभाल की मुख्य जिम्मेदारी 'वैश्य' वर्ग को सौंपी थी। इसके अलावा, 'आर्ष विवाह' (वैदिक विवाह का एक पारंपरिक रूप) के संदर्भ में, एक गाय और एक बैल की जोड़ी का विशेष महत्व है।' वेदों और अन्य हिंदू धर्मग्रंथों का हवाला देते हुए, अदालत ने कहा कि जब तपस्या के प्रभाव से 'अमृत' की बूंदें धरती पर गिरीं, तो दिव्य गाय कामधेनु प्रकट हुईं। उन्हें पृथ्वी पर सभी गो-वंश (गाय-बैल प्रजाति) की जननी माना जाता है। अदालत ने कहा, 'गाय को 'जगत की माता' माना जाता है, जो 33 करोड़ देवी-देवताओं का निवास स्थान है। उनके चार पैर चार वेदों के प्रतीक हैं।'
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क्या है पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 22 अगस्त 2024 को गांधीनगर जिले के जामला गांव में एक घर पर छापेमारी के दौरान छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से 277 किलोग्राम गोमांस, गायों को काटने में इस्तेमाल होने वाले हथियार और मांस ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाला एक वाहन बरामद किया गया।
अभियोजन पक्ष ने बताया कि एक पिता-पुत्र की जोड़ी कमजोर या दूध न देने वाली भैंसें खरीदती थी। इसके बाद वे अहमदाबाद से चार लोगों को अपने घर बुलाते थे और आर्थिक लाभ कमाने के लिए जानवरों को बहुत क्रूर तरीके से कटवाते थे।
गोमांस को किसे बेचता था?
जांच का हवाला देते हुए, अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी इस गोमांस को गुलाम मोइन नाम के व्यक्ति को बेचने की योजना बना रहे थे। मुकदमे के बाद, अदालत ने छह में से तीन आरोपियों को दोषी पाया। अभियोजन पक्ष ने आरोप साबित करने के लिए 54 गवाहों और 18 दस्तावेजी सबूतों को अदालत के सामने पेश किया। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने गांधीनगर पुलिस और अभियोजन पक्ष को 'सटीक जांच और मजबूत सबूत पेश करने' के लिए बधाई दी, जिसके परिणामस्वरूप दोषियों को सजा सुनाई गई।
उपमुख्यमंत्री ने क्या कहा?
उन्होंने कहा, 'गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम के तहत आया यह फैसला एक स्पष्ट संदेश है कि गुजरात में गोहत्या करने वालों को कानून कभी नहीं बख्शेगा। गौमाता की रक्षा करना गुजरात का दृढ़ संकल्प है। सटीक जांच और मजबूत सबूत पेश करने के लिए गांधीनगर पुलिस और सरकारी पक्ष को बधाई।ट
क्या है गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम?
गुजरात सरकार ने 1954 के 'गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम' में 2017 में संशोधन करके गोहत्या के दोषियों के लिए सजा को बढ़ाकर आजीवन कारावास कर दिया था। ऐसा करने वाला गुजरात देश का पहला राज्य बन गया, जहां गोहत्या के लिए इतनी कड़ी सजा का प्रावधान है। विधानसभा द्वारा पारित 'गुजरात पशु संरक्षण (संशोधन) विधेयक' में गोमांस के परिवहन, भंडारण या बिक्री करने पर दस साल की कैद का प्रावधान है। साल 2011 में, जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब राज्य सरकार ने इसी अधिनियम में संशोधन करके गायों को काटने, और गोमांस के परिवहन तथा बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था।
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कोर्ट ने कितना जुर्माना लगाया?
गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने इस फैसले का स्वागत किया। इसके साथ ही कहा कि यह एक स्पष्ट संदेश है कि राज्य में गोहत्या करने वालों को कानून कभी नहीं बख्शेगा। सोमवार को अपने फैसले में, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बी.आर. राजपूत ने दोषियों - वसीम कुरैशी, मोहम्मद रफीक कुरैशी और अशफाक बहेलिम - पर 3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। प्राचीन संस्कृत ग्रंथ 'मनुस्मृति' का हवाला देते हुए, अदालत ने कहा कि गाय केवल एक जानवर नहीं है, बल्कि इसे भौतिक समृद्धि और 'धर्म' (न्यायपूर्ण आचरण) का आधार माना जाता है।
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न्यायाधीश ने क्या कहा?
न्यायाधीश ने कहा, 'ऋषि मनु ने पशुओं की सुरक्षा और देखभाल की मुख्य जिम्मेदारी 'वैश्य' वर्ग को सौंपी थी। इसके अलावा, 'आर्ष विवाह' (वैदिक विवाह का एक पारंपरिक रूप) के संदर्भ में, एक गाय और एक बैल की जोड़ी का विशेष महत्व है।' वेदों और अन्य हिंदू धर्मग्रंथों का हवाला देते हुए, अदालत ने कहा कि जब तपस्या के प्रभाव से 'अमृत' की बूंदें धरती पर गिरीं, तो दिव्य गाय कामधेनु प्रकट हुईं। उन्हें पृथ्वी पर सभी गो-वंश (गाय-बैल प्रजाति) की जननी माना जाता है। अदालत ने कहा, 'गाय को 'जगत की माता' माना जाता है, जो 33 करोड़ देवी-देवताओं का निवास स्थान है। उनके चार पैर चार वेदों के प्रतीक हैं।'
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क्या है पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 22 अगस्त 2024 को गांधीनगर जिले के जामला गांव में एक घर पर छापेमारी के दौरान छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से 277 किलोग्राम गोमांस, गायों को काटने में इस्तेमाल होने वाले हथियार और मांस ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाला एक वाहन बरामद किया गया।
अभियोजन पक्ष ने बताया कि एक पिता-पुत्र की जोड़ी कमजोर या दूध न देने वाली भैंसें खरीदती थी। इसके बाद वे अहमदाबाद से चार लोगों को अपने घर बुलाते थे और आर्थिक लाभ कमाने के लिए जानवरों को बहुत क्रूर तरीके से कटवाते थे।
गोमांस को किसे बेचता था?
जांच का हवाला देते हुए, अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी इस गोमांस को गुलाम मोइन नाम के व्यक्ति को बेचने की योजना बना रहे थे। मुकदमे के बाद, अदालत ने छह में से तीन आरोपियों को दोषी पाया। अभियोजन पक्ष ने आरोप साबित करने के लिए 54 गवाहों और 18 दस्तावेजी सबूतों को अदालत के सामने पेश किया। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने गांधीनगर पुलिस और अभियोजन पक्ष को 'सटीक जांच और मजबूत सबूत पेश करने' के लिए बधाई दी, जिसके परिणामस्वरूप दोषियों को सजा सुनाई गई।
उपमुख्यमंत्री ने क्या कहा?
उन्होंने कहा, 'गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम के तहत आया यह फैसला एक स्पष्ट संदेश है कि गुजरात में गोहत्या करने वालों को कानून कभी नहीं बख्शेगा। गौमाता की रक्षा करना गुजरात का दृढ़ संकल्प है। सटीक जांच और मजबूत सबूत पेश करने के लिए गांधीनगर पुलिस और सरकारी पक्ष को बधाई।ट
क्या है गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम?
गुजरात सरकार ने 1954 के 'गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम' में 2017 में संशोधन करके गोहत्या के दोषियों के लिए सजा को बढ़ाकर आजीवन कारावास कर दिया था। ऐसा करने वाला गुजरात देश का पहला राज्य बन गया, जहां गोहत्या के लिए इतनी कड़ी सजा का प्रावधान है। विधानसभा द्वारा पारित 'गुजरात पशु संरक्षण (संशोधन) विधेयक' में गोमांस के परिवहन, भंडारण या बिक्री करने पर दस साल की कैद का प्रावधान है। साल 2011 में, जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब राज्य सरकार ने इसी अधिनियम में संशोधन करके गायों को काटने, और गोमांस के परिवहन तथा बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था।