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हेमा मालिनी बोलीं पति जब पत्नी को सम्मान देगा तभी बेटे समाज में बेटियों की इज्जत करेंगे
अमर उजाला टीम डिजिटल/नई दिल्ली
Updated Sat, 27 May 2017 09:56 AM IST
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Hema Malini, Sanjay Abhigyan
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मथुरा पहुंची हेमा मालिनी ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि बेटियां तभी सुरक्षित होंगी जब हर घर में लड़कियों की इज्जत की जाएगी। जब कोई पति अपनी मां और पत्नी की इज्जत करेगा तो बेटा खुद ही समाज में बेटियों के प्रति सम्मान का भाव रखेगा।
समाज में लड़कियों की हालत कैसे बेहतर हो इस बारे में क्या सोचती हैं?
समाज में स्त्रियों की दशा बेहतर हो यह सिर्फ बात करने से नहीं होगा। स्त्री सशक्कतीकरणा के लिए सेमिनार होते हैं, लंबे-लंबे भाषण दिए जाते हैं लेकिन ये सब करने से लड़कियों को दशा नहीं बदलेगी। यदि आप चाहते हैं कि समाज में लड़कियों को लेकर सोच बदले तो इसकी शुरुआत परिवार से करनी होगी।
एक परिवार में यदि एक पति अपनी मां और पत्नी का सम्मान नहीं करता है, बच्चे के सामने ही इनके साथ में बुरा व्यवहार करता है तो यकीन मानिए वह लड़का बड़ा होकर लड़की का सम्मान नहीं करेगा।
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बच्चा अपने परिवार में देखता है कि उसके घर में एक स्त्री के साथ कैसा व्यवहार होता है। वह बात उसके अवचेतन बन में बस जाती है। यदि घर में स्त्री के साथ बुरा बर्ताव होता है तो वही लड़का आगे चलकर लड़कियों के साथ खराब बर्ताव करने में हिचकेगा नहीं।
ऐसा ही लड़कियों की शिक्षा के साथ है। अब जब लड़कियां लगातार लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं तो उनकी शिक्षा में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए।
कई बार फिल्मी हस्तियां अपने इलाके में ज्यादा समय नहीं दे पाती हैं? आप कैसे संतुलन बैठाती हैं?
मैं अपनी निजी जिंदगी और राजनीति में संतुलन बैठाकर चलती हूं। लोगों ने मुझे प्यार दिया, मुझे सांसद बनाया सो इस लिहाज से मैं उनके हर सुख-दुख में उनके साथ हूं। मैं इस बात की पूरी कोशिश भी करती हूं कि लोगों को मैं पूरा समय दे सकूं। लेकिन इसी के साथ-साथ मैं यह भी ख्याल रखती हूं कि मेरा परिवार भी उपेक्षित न हो। मैं उनको भी पूरा समय देने की कोशिश करती हूं।
राजनेता होने के साथ-साथ मैं एक कलाकार भी हूं। तो यह कोशिश रहती है कि अपने कला के शौक को भी पूरा समय दे सकूं।
(फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी ने यह बात अमर उजाला डॉट काम के डिजिटल एंड कनवरजेंस एडिटर संजय अभिज्ञान ने की है।)
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समाज में लड़कियों की हालत कैसे बेहतर हो इस बारे में क्या सोचती हैं?
समाज में स्त्रियों की दशा बेहतर हो यह सिर्फ बात करने से नहीं होगा। स्त्री सशक्कतीकरणा के लिए सेमिनार होते हैं, लंबे-लंबे भाषण दिए जाते हैं लेकिन ये सब करने से लड़कियों को दशा नहीं बदलेगी। यदि आप चाहते हैं कि समाज में लड़कियों को लेकर सोच बदले तो इसकी शुरुआत परिवार से करनी होगी।
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एक परिवार में यदि एक पति अपनी मां और पत्नी का सम्मान नहीं करता है, बच्चे के सामने ही इनके साथ में बुरा व्यवहार करता है तो यकीन मानिए वह लड़का बड़ा होकर लड़की का सम्मान नहीं करेगा।
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बच्चा अपने परिवार में देखता है कि उसके घर में एक स्त्री के साथ कैसा व्यवहार होता है। वह बात उसके अवचेतन बन में बस जाती है। यदि घर में स्त्री के साथ बुरा बर्ताव होता है तो वही लड़का आगे चलकर लड़कियों के साथ खराब बर्ताव करने में हिचकेगा नहीं।
ऐसा ही लड़कियों की शिक्षा के साथ है। अब जब लड़कियां लगातार लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं तो उनकी शिक्षा में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए।
कई बार फिल्मी हस्तियां अपने इलाके में ज्यादा समय नहीं दे पाती हैं? आप कैसे संतुलन बैठाती हैं?
मैं अपनी निजी जिंदगी और राजनीति में संतुलन बैठाकर चलती हूं। लोगों ने मुझे प्यार दिया, मुझे सांसद बनाया सो इस लिहाज से मैं उनके हर सुख-दुख में उनके साथ हूं। मैं इस बात की पूरी कोशिश भी करती हूं कि लोगों को मैं पूरा समय दे सकूं। लेकिन इसी के साथ-साथ मैं यह भी ख्याल रखती हूं कि मेरा परिवार भी उपेक्षित न हो। मैं उनको भी पूरा समय देने की कोशिश करती हूं।
राजनेता होने के साथ-साथ मैं एक कलाकार भी हूं। तो यह कोशिश रहती है कि अपने कला के शौक को भी पूरा समय दे सकूं।
(फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी ने यह बात अमर उजाला डॉट काम के डिजिटल एंड कनवरजेंस एडिटर संजय अभिज्ञान ने की है।)