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AMCA: 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने में रोड़ा, जीई ने बढ़ाई इंजन की कीमत; अन्य विकल्पों पर विचार शुरू

Thu, 25 Jun 2026 03:47 AM IST
Devesh Tripathi अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Devesh Tripathi Updated Thu, 25 Jun 2026 03:47 AM IST
सार

अमेरिकी कंपनी ने भारत में एक समर्पित एफ414 असेंबली और लोकल मैन्युफैक्चरिंग लाइन स्थापित करने के लिए लगभग 6,000 करोड़ की अतिरिक्त राशि की मांग भी रखी है। इस बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक एयरोस्पेस आपूर्ति शृंखला में आए संकट, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों व अमेरिकी फैक्टरियों में बढ़ी लागत का हवाला दिया गया है।

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Hurdle in AMCA Project GE hikes 5th gen fighter jet engine prices US exploiting alternative options begins
एमका परियोजना - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI

विस्तार

पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी स्टील्थ लड़ाकू विमान एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमका) की राह में मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) ने एमका के लिए प्रस्तावित एफ414 इंजन की कीमत पहले की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा बताई है, जिससे दोनों पक्षों के बीच व्यावसायिक बातचीत में गतिरोध आ गया है।
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इस अप्रत्याशित मूल्य वृद्धि ने रक्षा नीतिकारों को चिंता में डाल दिया है। कंपनी की इस मांग के बाद भारत ने अन्य विकल्पों पर विचार करना शुरू कर दिया है। भारतीय एयरोनॉटिकल विकास एजेंसी (एडीए) व रक्षा मंत्रालय को उम्मीद थी कि भारत में निर्मित होने वाले आगामी लड़ाकू विमानों के लिए जीई-एफ414 इंजन की प्रति इंजन लागत लगभग 70 से 80 करोड़ के आसपास होगी। हालांकि, जनरल इलेक्ट्रिक की ओर से पेश नई कीमत इस अनुमान से लगभग तीन गुना ज्यादा है।
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कीमत बढ़ाने की अमेरिकी कंपनी ने बताई क्या वजह?
अमेरिकी कंपनी ने भारत में एक समर्पित एफ414 असेंबली और लोकल मैन्युफैक्चरिंग लाइन स्थापित करने के लिए लगभग 6,000 करोड़ की अतिरिक्त राशि की मांग भी रखी है। इस बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक एयरोस्पेस आपूर्ति शृंखला में आए संकट, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों व अमेरिकी फैक्टरियों में बढ़ी लागत का हवाला दिया गया है। सूत्रों के अनुसार अमेरिकी कंपनी जीई एमका परियोजना के लिए भारत की उसके इंजन पर निर्भरता का फायदा उठा रही है। 
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कावेरी इंजन की नाकामी
भारत ने 1980 के दशक में तेजस विमानों के लिए स्वदेशी कावेरी इंजन बनाना शुरू किया था। लेकिन तकनीकी चुनौतियों और अपेक्षित प्रदर्शन स्तर हासिल न कर पाने से इस इंजन को तेजस लड़ाकू विमान के लिए स्वीकृति नहीं मिल सकी। स्वदेशी इंजन न होने से भारत को तेजस मार्क-1 के लिए अमेरिकी जीई-एफ404 इंजन का सहारा लेना पड़ा। इसके बाद ज्यादा शक्तिशाली तेजस मार्क-2 और एमका के शुरुआती वेरिएंट के लिए जीई-एफ414 इंजन को चुना गया।

जून 2023 में पीएम नरेंद्र मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान दोनों देशों में महत्वपूर्ण तकनीकी हस्तांतरण के साथ भारत में ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की ओर से इन इंजनों के सह-उत्पादन का समझौता हुआ था। अब व्यावसायिक शर्तों को लेकर बातचीत में गतिरोध पैदा हो गया है।

भारत के पास क्या हैं विकल्प?
सूत्रों का कहना है कि भारत ने इंजन के लिए प्लान-बी पर गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया है। भारत ने फ्रांस की कंपनी साफरान और ब्रिटेन की रोल्स रॉयस के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखे हैं। यह दोनों कंपनियां भारत को तकनीक हस्तांतरण के साथ नए हाई-थ्रस्ट इंजन के विकास का प्रस्ताव दे रही हैं।


ब्रिटिश एयरोस्पेस कंपनी रोल्स रॉयस ने अपने प्रस्ताव में 110-130 किलोन्यूटन श्रेणी के नए लड़ाकू इंजन के संयुक्त विकास की पेशकश की है। कंपनी के मुताबिक अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो इंजन 2030 तक तैयार किया जा सकता है, 2032 तक परीक्षण शुरू हो पाएंगे, 2034 में पहली परीक्षण उड़ान हो सकेगी और 2036 तक उत्पादन शुरू किया जा सकेगा। इधर, इस गतिरोध को सुलझाने के लिए अमेरिका से कूटनीतिक स्तर पर भी बातचीत जारी है।
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