Chakka Jam: महाराष्ट्र में परिवहन क्षेत्र में अनिश्चितकालीन हड़ताल का एलान, जानें ट्रांसपोर्टरों की क्या मांग
महाराष्ट्र में ट्रांसपोर्टरों ने ई-चालान प्रणाली और बढ़ते कर-टोल के विरोध में गुरुवार से अनिश्चितकालीन राज्यव्यापी चक्का जाम का एलान किया है। महाराष्ट्र ट्रांसपोर्ट एक्शन कमेटी के अनुसार सरकार से बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला।
विस्तार
महाराष्ट्र में परिवहन क्षेत्र से जुड़े हजारों ट्रांसपोर्टरों ने राज्यव्यापी चक्का जाम का एलान किया है। यह विरोध प्रदर्शन गुरुवार से शुरू होकर अनिश्चितकालीन तक चलेगा। ट्रांसपोर्टरों का विरोध ई-चालान प्रणाली और क्षेत्र द्वारा सामना किए जा रहे अन्य मुद्दों के खिलाफ है।
क्यों हो रहा विरोध?
महाराष्ट्र ट्रांसपोर्ट एक्शन कमेटी (एम-टीएसी) के प्रतिनिधियों के अनुसार, बुधवार शाम को महाराष्ट्र परिवहन आयुक्त कार्यालय में हुई बातचीत के अंतिम दौर के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल पाया। इसके बाद हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया गया। एम-टीएसी का कहना है कि यह आंदोलन मनमाने और अत्यधिक इलेक्ट्रॉनिक यातायात प्रवर्तन और परिवहन क्षेत्र पर बढ़ते वित्तीय बोझ के खिलाफ है।
ट्रांसपोर्टरों की क्या मांगें?
ट्रांसपोर्टरों की मांगों में ई-चालान प्रणाली में प्रमुख सुधार, लंबित जुर्माना माफ करना और वाणिज्यिक वाहनों पर लगाए गए करों और टोल शुल्कों में कमी शामिल है। एम-टीएसी नेताओं का दावा है कि ई-चालान प्रणाली ने न केवल परिवहन संचालकों बल्कि आम वाहन मालिकों को भी कठिनाई में डाला है।
कैसे होगा हड़ताल?
एम-टीएसी के प्रतिनिधियों के अनुसार, ट्रांसपोर्टर मुंबई के आजाद मैदान और राज्य के अन्य हिस्सों में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे, जिसके बाद आधी रात से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो जाएगी। इस हड़ताल के कारण स्कूल बसें, अनुबंध वाहक बसें, निजी बसें और ट्रक, टेम्पो, टैक्सी और टैंकर जैसे वाणिज्यिक वाहन सड़कों से नदारद रहेंगे। ट्रांसपोर्टरों ने अपने वाहनों को विरोध स्थलों पर लाने की भी धमकी दी है।
स्कूल बस मालिकों के संघ के एक लीडर अनिल गर्ग बताया कि अगर अनिश्चितकालीन हड़ताल होती है, तो शुक्रवार से राज्य भर की स्कूल बसें संचालित नहीं होंगी, हालांकि गुरुवार को उनकी सेवाएं सामान्य रहेंगी।
सरकार और ट्रांसपोर्टरों के बीच हुई थी बैठक
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस सप्ताह की शुरुआत में ट्रांसपोर्टरों के साथ एक बैठक की थी, लेकिन एम-टीएसी ने सरकार से खोखले आश्वासनों के कारण बातचीत को निष्फल बताया। सरनाइक ने ट्रांसपोर्टरों से आंदोलन वापस लेने की अपील करते हुए कहा था कि सरकार अनुचित ई-चालान रद्द करने पर सकारात्मक है और इस मामले में अनुकूल निर्णय लेगी।
एम-टीएमसी की प्रमुख मांग क्या है?
- एम-टीएसी ने सरकार से नियमों में प्रस्तावित संशोधन को वापस लेने या उसमें ढील देने की मांग की है।
- इसके तहत ट्रांसपोर्टरों को 45 दिनों के भीतर ई-चालान का जुर्माना चुकाना होगा।
- ऐसा न करने पर उन्हें परमिट नवीनीकरण, फिटनेस प्रमाणन और अन्य नियामक मंजूरियों से संबंधित विभिन्न प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।
मांगों के अनुसार, आपराधिक प्रक्रिया संहिता के नियम 468 और संशोधित नियम 514 के तहत, अगर अदालत में मामले दायर नहीं किए जाते हैं, तो सभी समय-सीमा पार कर चुके ई-चालान रद्द कर दिए जाने चाहिए।
चेक पोस्ट बंद करने और ड्राइवरों के लिए विश्राम गृह स्थापित करने की मांग
इसके अलावा, एम-टीएसी ने राजमार्ग चेक पोस्ट बंद करने और ड्राइवरों के लिए विश्राम गृह या केंद्र स्थापित करने की मांग की है। उन्होंने राजमार्गों पर फायर टेंडर और आपातकालीन सेवा सुविधाओं, पार्किंग स्थलों, बस स्टॉप और माल लोड-अनलोडिंग सुविधाओं की भी मांग की है।
सुरक्षा उपकरणों को लेकर ट्रांसपोर्टरों की क्या मांग?
ट्रांसपोर्टरों ने सुरक्षा के बहाने अनिवार्य किए गए उपकरणों जैसे पैनिक बटन, वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट, फायर डिटेक्शन और सप्रेशन सिस्टम और सीसीटीवी कैमरों की बार-बार रेट्रोफिटिंग की समीक्षा की भी मांग की है। उन्होंने परिचालन में कठिनाई पैदा करने वाले अव्यवहारिक और अचानक नो एंट्री प्रतिबंधों को निलंबित करने की मांग की है और सरकार से अधिक परामर्शपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया है।
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