{"_id":"6a89bd18dfcdef38f606696f","slug":"india-china-relations-jaishankar-border-peace-tranquillity-prerequisite-good-ties-china-2026-08-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"'सीमा की स्थिति तय करेगी रिश्ते': विदेश मंत्री जयशंकर ने चीन को दिया संदेश, बोले-अपने हितों पर अडिग रहेगा भारत","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
'सीमा की स्थिति तय करेगी रिश्ते': विदेश मंत्री जयशंकर ने चीन को दिया संदेश, बोले-अपने हितों पर अडिग रहेगा भारत
Sat, 22 Aug 2026 08:45 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 22 Aug 2026 08:45 PM IST
सार
भारत और चीन के रिश्तों में सुधार की कोशिशें जारी हैं, लेकिन विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ कर दिया है कि सीमा पर शांति के बिना सामान्य संबंध संभव नहीं हैं। भारत चीन के साथ कारोबार करेगा, मगर अपनी ताकत बढ़ाते हुए राष्ट्रीय हितों पर मजबूती से कायम रहेगा। उन्होंने और क्या-क्या कहा? जानिए...
विज्ञापन
एस जयशंकर, विदेश मंत्री
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत और चीन के संबंधों पर एक बार फिर रुख साफ किया है। उन्होंने कहा कि भारत और चीन दोनों के हित में द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर बनाए रखना है। हालांकि, उन्होंने साफ-साफ कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता अच्छे संबंधों के लिए जरूरी शर्त है। सीमा की स्थिति काफी हद तक दोनों देशों के रिश्तों की स्थिति तय करेगी। एक समाचार चैनल के कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दोनों देश बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। दोनों कई मायनों में एक-दूसरे के बाजार हैं और आपूर्ति शृंखला का भी हिस्सा हैं।
2020 से 2024 तक रहा बेहद खराब दौर: जयशंकर
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि 2020 की गर्मियों से 2024 की शरद ऋतु तक भारत-चीन संबंध बेहद खराब दौर से गुजरे। इसके पीछे मुख्य वजह सीमा क्षेत्रों की स्थिति थी। उन्होंने कहा कि सीमा पर शांति और स्थिरता अच्छे संबंधों के लिए जरूरी है। सीमा की स्थिति बड़े स्तर पर दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करती है।
चीन से कारोबार, लेकिन आत्मविश्वास के साथ
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया प्रतिस्पर्धी है और भारत को अपनी ताकत बढ़ानी होगी। भारत को पूरी दुनिया के साथ कारोबार करना है और इसमें चीन भी शामिल है। लेकिन चीन के साथ आत्मविश्वास से व्यवहार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत को अपने रुख पर मजबूती से कायम रहना होगा, जैसा उसने सीमा पर किया है। जयशंकर के मुताबिक, चीन ने भारत की तुलना में बहुत तेजी से बड़े पैमाने पर और पहले औद्योगीकरण किया।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: 'दुनिया ने माना कि हमने अमेरिका को हराया': जंग के बीच ईरान का दावा; पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर एक रिपोर्ट
भारत को कमियों को दूर करना होगा: विदेश मंत्री
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत आधी सदी पहले विनिर्माण और औद्योगीकरण को गहरा करने के अवसर का बेहतर उपयोग कर सकता था। अब देश को अपनी कमियों को दूर करना होगा। उन्होंने कहा कि एक मजबूत, अधिक आत्मनिर्भर, ज्यादा औद्योगिक और विनिर्माण क्षमता वाला भारत चीन के साथ ही दुनिया के अन्य बड़े देशों से भी प्रतिस्पर्धा कर सकेगा। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत ने चीन के समक्ष वीजा संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे भारतीय कारोबारियों के मुद्दे उठाए हैं।
गलवान के बाद तनाव, फिर रिश्ते सुधारने की कोशिश
जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में भारी तनाव आया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध चार साल से ज्यादा समय तक चला। अक्टूबर 2024 में दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख के देपसांग और डेमचोक, दो आखिरी टकराव वाले क्षेत्रों से जुड़े डिसएंगेजमेंट समझौते को अंतिम रूप दिया। इसके कुछ दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कजान में बातचीत की और संबंध सुधारने के लिए कई फैसले किए।
पिछले साल अगस्त में प्रधानमंत्री मोदी एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीन के तियानजिन गए थे। वहां उनकी शी जिनपिंग के साथ विस्तार से बातचीत हुई थी।
अमेरिका-चीन संबंधों को लेकर भी जताई सावधानी
अमेरिका-चीन संबंधों को जी2 बताए जाने के सवाल पर जयशंकर ने इसे सावधानी से देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मूल रूप से प्रतिस्पर्धा का रिश्ता है, लेकिन कुछ मामलों में सहयोग भी हो सकता है और कुछ क्षेत्रों में दोनों अलग-अलग रह सकते हैं।
विज्ञापन
2020 से 2024 तक रहा बेहद खराब दौर: जयशंकर
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि 2020 की गर्मियों से 2024 की शरद ऋतु तक भारत-चीन संबंध बेहद खराब दौर से गुजरे। इसके पीछे मुख्य वजह सीमा क्षेत्रों की स्थिति थी। उन्होंने कहा कि सीमा पर शांति और स्थिरता अच्छे संबंधों के लिए जरूरी है। सीमा की स्थिति बड़े स्तर पर दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करती है।
विज्ञापन
चीन से कारोबार, लेकिन आत्मविश्वास के साथ
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया प्रतिस्पर्धी है और भारत को अपनी ताकत बढ़ानी होगी। भारत को पूरी दुनिया के साथ कारोबार करना है और इसमें चीन भी शामिल है। लेकिन चीन के साथ आत्मविश्वास से व्यवहार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत को अपने रुख पर मजबूती से कायम रहना होगा, जैसा उसने सीमा पर किया है। जयशंकर के मुताबिक, चीन ने भारत की तुलना में बहुत तेजी से बड़े पैमाने पर और पहले औद्योगीकरण किया।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: 'दुनिया ने माना कि हमने अमेरिका को हराया': जंग के बीच ईरान का दावा; पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर एक रिपोर्ट
भारत को कमियों को दूर करना होगा: विदेश मंत्री
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत आधी सदी पहले विनिर्माण और औद्योगीकरण को गहरा करने के अवसर का बेहतर उपयोग कर सकता था। अब देश को अपनी कमियों को दूर करना होगा। उन्होंने कहा कि एक मजबूत, अधिक आत्मनिर्भर, ज्यादा औद्योगिक और विनिर्माण क्षमता वाला भारत चीन के साथ ही दुनिया के अन्य बड़े देशों से भी प्रतिस्पर्धा कर सकेगा। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत ने चीन के समक्ष वीजा संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे भारतीय कारोबारियों के मुद्दे उठाए हैं।
गलवान के बाद तनाव, फिर रिश्ते सुधारने की कोशिश
जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में भारी तनाव आया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध चार साल से ज्यादा समय तक चला। अक्टूबर 2024 में दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख के देपसांग और डेमचोक, दो आखिरी टकराव वाले क्षेत्रों से जुड़े डिसएंगेजमेंट समझौते को अंतिम रूप दिया। इसके कुछ दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कजान में बातचीत की और संबंध सुधारने के लिए कई फैसले किए।
पिछले साल अगस्त में प्रधानमंत्री मोदी एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीन के तियानजिन गए थे। वहां उनकी शी जिनपिंग के साथ विस्तार से बातचीत हुई थी।
अमेरिका-चीन संबंधों को लेकर भी जताई सावधानी
अमेरिका-चीन संबंधों को जी2 बताए जाने के सवाल पर जयशंकर ने इसे सावधानी से देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मूल रूप से प्रतिस्पर्धा का रिश्ता है, लेकिन कुछ मामलों में सहयोग भी हो सकता है और कुछ क्षेत्रों में दोनों अलग-अलग रह सकते हैं।