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Indian Army: तीनों सेनाओं में क्वांटम तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर, CDS चौहान ने जारी किया नीतिगत दस्तावेज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Thu, 22 Jan 2026 11:30 PM IST
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सार

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने तीनों सेनाओं में क्वांटम तकनीक के इस्तेमाल के लिए मिलिट्री क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क जारी किया। यह योजना क्वांटम कम्युनिकेशन, कंप्यूटिंग, सेंसिंग और डिवाइस के जरिए सेना को भविष्य की लड़ाइयों में तकनीकी श्रेष्ठता दिलाने पर केंद्रित है। आइए जानते है क्यों खास है यह तैयारी?

Indian Army Emphasis on increasing the use of quantum technology in all three services News In Hindi
सीडीएस अनिल चौहान - फोटो : पीटीआई
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भारत के तीनों सेनाओं में क्वांटम तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने गुरुवार नीति दस्तावेज जारी किया। इसमें भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में क्वांटम तकनीकों को जोड़ने की योजना और रोडमैप तय किया गया है। इस दस्तावेज का नाम है 'मिलिट्री क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क'। इसमें न केवल नीति बनाई गई है, बल्कि यह भी बताया गया है कि कैसे तीनों सेवाओं में क्वांटम तकनीक को लागू किया जाएगा। इसका मकसद है भविष्य की लड़ाई में तकनीकी बढ़त और श्रेष्ठता हासिल करना।

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बता दें कि सीडीएस जब ये नीति दस्तावेज जारी कर रहे थे तब भारत के शीर्ष सैन्य अधिकारी चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ, एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ, जनरल उपेंद्र द्विवेदी, चीफ ऑफ द एयर स्टाफ, एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह और चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित मौजूद थे। 
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दस्तावेज में चार मुख्य क्वांटम तकनीकों पर ध्यान
बात अब अगर दस्तावेज की करें तो यह योजना चार मुख्य क्वांटम तकनीकों को सेना में लागू करने पर ध्यान देती है। पहला क्वांटम कम्युनिकेशन, जो कि सुरक्षित और तेज संचार के लिए होगी। दूसरा क्वांटम कंप्यूटिंग, जो कि जटिल गणनाओं और रणनीतियों के लिए होगी। तीसरा क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी, जो कि सटीक माप और निगरानी के लिए होगी। वहीं चौथा क्वांटम मटीरियल और डिवाइस, जो कि उन्नत उपकरण बनाने के लिए होगी। 

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दस्तावेज में इन बातों पर दिया गया है जोर

सीडीएस चौहान द्वारा जारी दस्तावेज में तीनों सेनाओं का समन्वय और सिविल-मिलिट्री सहयोग पर जोर दिया गया है। इसमें बताया गया है कि माइलेज और लक्ष्यों को कैसे हासिल किया जाएगा और कौन-कौन से कदम उठाए जाएंगे।

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अब समझिए क्यों जरूरी है यह कदम?
इस बात के जवाह में डिफेंस मंत्रालय ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में, भविष्य के युद्धक्षेत्र में बढ़त पाने के लिए यह कदम जरूरी है। इसके जरिए सेना, नौसेना और वायुसेना क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी बन सकेंगी।

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