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Indian Army: पूर्वी कमान प्रमुख ने 'रेड शील्ड डिवीजन' की तैयारियों की समीक्षा की, ड्रोन क्षमता में आई मजबूती

N Arjun एन अर्जुन
Updated Thu, 21 May 2026 01:30 PM IST
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सार

भारतीय सेना की पूर्वी कमान के कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन ने सेना की रेड शील्ड डिवीजन की तैयारियों का जायजा लिया। सेना अधिकारियों ने कमांडर को बताया कि रेड शील्ड डिवीजन ने स्थानीय स्तर पर ड्रोन असेंबली, सर्विसिंग और ओवरहॉलिंग का एक मजबूत तंत्र विकसित किया है।

indian army northern command chief inspect red shield division operational preparedness
भारतीय सेना के अधिकारी तैयारियों का जायजा लेते हुए - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी) लेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन ने बुधवार को सेना की स्पीयर कोर के अंतर्गत आने वाली ‘रेड शील्ड डिवीजन’ की ऑपरेशनल तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने मणिपुर के लीमाखोंग सैन्य स्टेशन स्थित 'रेड शील्ड ड्रोन लैब' का दौरा कर स्वदेशी मानव रहित हवाई प्रणाली (यूएएस) तकनीक, स्थानीय स्तर पर विकसित ड्रोन क्षमता और विशेष युद्धक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का जायजा लिया।


ड्रोन क्षमता को मजबूत किया गया
जानकारी के मुताबिक सेना अधिकारियों ने कमांडर को बताया कि रेड शील्ड डिवीजन ने स्थानीय स्तर पर ड्रोन असेंबली, सर्विसिंग और ओवरहॉलिंग का एक मजबूत तंत्र विकसित किया है। इसके जरिए न केवल बाहरी सप्लाई चेन पर
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निर्भरता कम हुई है, बल्कि ऑपरेशन की जरूरतों के अनुसार तेजी से तकनीकी बदलाव और उपकरणों का अनुकूलन भी संभव हो रहा है। अधिकारियों के अनुसार सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में यह क्षमता सैन्य अभियानों के लिए काफी
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महत्वपूर्ण साबित हो रही है। दौरे के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल कृष्णन ने कई मिशन-विशिष्ट ड्रोन प्लेटफॉर्म का लाइव प्रदर्शन देखा। इन प्लेटफॉर्म को पूर्वोत्तर क्षेत्र के घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों और जटिल सुरक्षा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। 

जवानों को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण
सेना के अनुसार ये ड्रोन निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने, लक्ष्य पहचान और कठिन इलाकों में त्वरित ऑपरेशन समर्थन जैसे कार्यों में उपयोगी हैं। सेना कमांडर को यह भी बताया गया कि ड्रोन तकनीक के साथ-साथ अग्रिम मोर्चे पर तैनात जवानों को आधुनिक युद्धक प्रणाली के संचालन का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए संरचित तकनीकी मॉड्यूल तैयार किए गए हैं, जिनके माध्यम से सैनिकों को ड्रोन संचालन, मरम्मत, रखरखाव और आपात परिस्थितियों में इनके इस्तेमाल की व्यावहारिक जानकारी दी जाती है। 

आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम पहल
सेना का मानना है कि तकनीकी रूप से दक्ष सैनिक भविष्य के युद्ध परिदृश्यों में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे। भारतीय सेना ने कहा कि यह पहल 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान की भावना के अनुरूप है और इसका उद्देश्य अग्रिम मोर्चे की सैन्य इकाइयों को आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार बनाना है। पूर्वी कमान के अधिकारियों के मुताबिक, आधुनिक युद्ध में ड्रोन और स्वदेशी तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है, ऐसे में इस तरह की पहलें सेना की परिचालन क्षमता को नई मजबूती दे रही हैं।
 
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