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कर्नाटक में ईरान मुद्दे पर सियासत: नेता प्रतिपक्ष अशोका ने सीएम सिद्धरमैया को घेरा, कहा- परिपक्व नेतृत्व चाहिए
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Tue, 03 Mar 2026 04:52 PM IST
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सार
कर्नाटक में ईरान मुद्दे पर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की टिप्पणी को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष आर अशोका ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों पर बयान देते समय परिपक्वता जरूरी है और विदेश नीति नई दिल्ली तय करती है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया और संयम बरतने की सलाह दी।
सिद्धारमैया, सीएम, कर्नाटक
- फोटो : ANI
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विस्तार
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कर्नाटक की राजनीति भी गरमा गई है। ईरान को लेकर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की टिप्पणी पर राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोका ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक को परिपक्व नेतृत्व चाहिए, न कि संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर जल्दबाजी में दिए गए बयान। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
अशोका ने मुख्यमंत्री की उस सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा था कि शांति की बात करने वाला देश युद्ध का रास्ता अपना रहा है। साथ ही उन्होंने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर शोक भी जताया था। अशोका ने कहा कि भारत की विदेश नीति नई दिल्ली तय करती है और यह राष्ट्रीय हितों के आधार पर चलती है, न कि राज्य स्तर की राजनीति या वोट बैंक के हिसाब से।
विदेश नीति दिल्ली से तय होती है
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विदेश नीति कोई राजनीतिक मंच नहीं है, जहां विचारधारा के प्रदर्शन किए जाएं। यह देश की संप्रभुता, रणनीतिक संतुलन और वैश्विक प्रतिष्ठा से जुड़ा विषय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ रहा हो, तब जिम्मेदार नेताओं को संयम बरतना चाहिए।
ये भी पढ़ें- भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने सीएम ममता के क्षेत्र में निकाली रैली, हिंदुओं से एकता की अपील
ऑपरेशन सिंदूर का भी किया जिक्र
अशोका ने पुराने घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के समय भी मुख्यमंत्री की टिप्पणी से राज्य को अनावश्यक विवाद और शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान विदेशी मीडिया में भी उछाले गए थे, जिससे राज्य की छवि प्रभावित हुई।
तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप
भाजपा नेता ने कहा कि एक बार फिर राज्य में राजनयिक मुद्दों पर तुष्टिकरण की राजनीति दिख रही है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में जल्दबाजी में की गई टिप्पणी से देश की स्थिति कमजोर पड़ सकती है। कर्नाटक को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो भारत की आवाज को मजबूत करे, न कि विवाद पैदा करे।
ये भी पढ़ें- बंगलूरू में तीन मंजिला घर में लगी आग, महिला की मौत; परिवार के तीन अन्य सदस्य सुरक्षित बाहर निकले
मुख्यमंत्री से संयम बरतने की अपील
अशोका ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि उनके शब्दों का महत्व होता है और उन्हें अपने पद की गरिमा के अनुरूप व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन वैश्विक संकट के समय राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होना चाहिए। राज्य की राजनीति में इस मुद्दे ने नई बहस छेड़ दी है। एक ओर मुख्यमंत्री का बयान है, तो दूसरी ओर भाजपा का तीखा विरोध। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है।
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अशोका ने मुख्यमंत्री की उस सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा था कि शांति की बात करने वाला देश युद्ध का रास्ता अपना रहा है। साथ ही उन्होंने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर शोक भी जताया था। अशोका ने कहा कि भारत की विदेश नीति नई दिल्ली तय करती है और यह राष्ट्रीय हितों के आधार पर चलती है, न कि राज्य स्तर की राजनीति या वोट बैंक के हिसाब से।
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विदेश नीति दिल्ली से तय होती है
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विदेश नीति कोई राजनीतिक मंच नहीं है, जहां विचारधारा के प्रदर्शन किए जाएं। यह देश की संप्रभुता, रणनीतिक संतुलन और वैश्विक प्रतिष्ठा से जुड़ा विषय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ रहा हो, तब जिम्मेदार नेताओं को संयम बरतना चाहिए।
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ऑपरेशन सिंदूर का भी किया जिक्र
अशोका ने पुराने घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के समय भी मुख्यमंत्री की टिप्पणी से राज्य को अनावश्यक विवाद और शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान विदेशी मीडिया में भी उछाले गए थे, जिससे राज्य की छवि प्रभावित हुई।
तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप
भाजपा नेता ने कहा कि एक बार फिर राज्य में राजनयिक मुद्दों पर तुष्टिकरण की राजनीति दिख रही है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में जल्दबाजी में की गई टिप्पणी से देश की स्थिति कमजोर पड़ सकती है। कर्नाटक को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो भारत की आवाज को मजबूत करे, न कि विवाद पैदा करे।
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मुख्यमंत्री से संयम बरतने की अपील
अशोका ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि उनके शब्दों का महत्व होता है और उन्हें अपने पद की गरिमा के अनुरूप व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन वैश्विक संकट के समय राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होना चाहिए। राज्य की राजनीति में इस मुद्दे ने नई बहस छेड़ दी है। एक ओर मुख्यमंत्री का बयान है, तो दूसरी ओर भाजपा का तीखा विरोध। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है।
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