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Congress: 'क्या मनरेगा की हत्या के बाद RTI की बारी?', कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार से पूछा सवाल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 30 Jan 2026 05:44 PM IST
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सार

Congress: कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में आरटीआई कानून की दोबारा समीक्षा की सलाह पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार पर इस कानून को धीरे-धीरे कमजोर करने का आरोप लगाया। खरगे ने कहा कि 2014 से सौ से ज्यादा आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है। पढ़ें रिपोर्ट-

Is it RTI's turn to get murdered? Mallikarjun Kharge asks
मल्लिकार्जुन खरगे, अध्यक्ष, कांग्रेस - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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सरकार की ओर से जारी आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून की दोबारा समीक्षा करने का सुझाव दिया गया है। इसके बाद शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पूछा कि क्या मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) की हत्या के बाद अब आरटीआई की बारी है। 
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खरगे ने केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए?
  • मल्लिकार्जुन खरगे ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में केंद्र सरकार पर आरटीआई कानून को धीरे-धीरे कमजोर करने का आरोप लगाया।
  • उन्होंने ऐसा माहौल बनाने का भी आरोप लगाया, जो सच की तलाश करने वालों को सजा देता है।
  • कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि 2014 से अब तक सौ से अधिक आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है। 
  • उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने आरटीआई कानून को धीरे-धीरे कमजोर किया है। 2025 तक 26 हजार से ज्यादा मामले अभी तक लंबित हैं।
  • खरगे ने दावा किया 2019 में सरकार ने सूचना आयुक्तों के काम करने की अवधि और वेतन पर नियंत्रण कर दिया और स्वतंत्र निगरानी तंत्र को सरकार के आज्ञाकारी कर्मियों में बदल दिया।
  • उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यक्तिगत डाटा सुरक्षा अधिनियम, 2023 ने आरटीआई के सार्वजनिक हित वाले प्रावधान को कमजोर कर दिया और 'गोपनीयता को हथियार बनाकर भ्रष्टाचार को छिपाने और निगरानी को रोकने' का रास्ता खोल दिया।
  • उन्होंने दावा किया कि पिछले महीने (दिसंबर 2025) तक केंद्रीय सूचना आयोग, मुख्य सूचना आयुक्त के बिना काम कर रहा था। यह 11 साल में सातवीं बार था जब इस अहम पद को जानबूझकर खाली रखा गया।
  • कांग्रेस नेता ने कहा कि 2014 से अब तक 100 से अधिक आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है, जिससे सच्चाई की तलाश करने वालों के लिए डर और विरोध को खत्म करने वाला माहौल बना।
  • उन्होंने कहा कि कांग्रेस-यूपीए की ओर से पारित किए गए व्हिसलब्लोअर संरक्षण अधिनियम, 2014 को भाजपा ने अब तक लागू नहीं किया।
  • खरगे ने पूछा, मनरेगा की हत्या के बाद क्या अब आरटीआई की बारी है? 

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आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में आरटीआई कानून को लेकर क्या कहा गया?
उन्होंने कहा, आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में सूचना का अधिकार अधिनियम की 'पुन: समीक्षा' करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा, इसमें यह भी सुझाव दिया गया है कि मंत्रियों को जानकारी रोकने का अधिकार दिया जाए और अधिकारियों की सार्वजनिक सेवा रिपोर्ट, स्थानांतरण (ट्रांसफर) और कर्मचारियों की रिपोर्ट को जनता की निगरानी से सुरक्षित रखने का विकल्प तलाशा जाए।

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