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पंडितों को धमकी महज बहाना: सीमा पार 1,000 आतंकी तैयार; आखिर कश्मीर में क्या करने की तैयारी में है आईएसआई?
Fri, 28 Aug 2026 06:34 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 28 Aug 2026 06:34 PM IST
सार
कश्मीरी पंडितों और प्रवासी मजदूरों को धमकियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बनकर सामने आई हैं। खुफिया अधिकारियों के मुताबिक, इसके पीछे सिर्फ दहशत फैलाने का मकसद नहीं हो सकता। पीओके में करीब 1,000 आतंकियों के इंतजार और नए नेटवर्क की जानकारी ने घुसपैठ की आशंका बढ़ा दी है। क्या है पूरा मामला? जानिए...
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भारतीय सेना
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई जम्मू-कश्मीर में आतंक का नेटवर्क फिर खड़ा करने की कोशिश में जुटी है। खुफिया अधिकारियों के मुताबिक, ऑनलाइन प्रोपेगेंडा और कश्मीरी पंडितों को धमकियां देकर सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है, जबकि दूसरी ओर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में करीब 1,000 आतंकी घुसपैठ के इंतजार में बताए जा रहे हैं।
अधिकारियों का मानना है कि धमकी और डर का यह अभियान सिर्फ दहशत फैलाने के लिए नहीं है। इसका मकसद सुरक्षा एजेंसियों को कई मोर्चों पर उलझाना और आतंकियों को नियंत्रण रेखा पार कर घाटी के घने जंगलों तक पहुंचने का मौका देना भी हो सकता है।
टीआरएफ और यूएलसी के नाम से धमकी भरे संदेश
द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) और यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (यूएलसी) जैसे प्रॉक्सी संगठनों के नाम से जारी धमकी भरे पत्रों में कश्मीरी पंडितों, प्रवासी मजदूरों और स्थानीय प्रशासन को निशाना बनाया गया है। इन संदेशों में कश्मीरी पंडितों और प्रवासी मजदूरों की हत्या की धमकी दी गई है। फसलों को नष्ट करने और घरों में आग लगाने जैसी बातें भी कही गई हैं।
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क्या यह सिर्फ प्रोपेगेंडा या किसी बड़ी योजना की तैयारी?
एक इंटेलिजेंस ब्यूरो अधिकारी के अनुसार, शुरुआत में ऐसा लगा कि यह प्रोपेगेंडा जमीनी स्तर पर बड़े हमले करने में नाकामी से पैदा हुई निराशा का नतीजा है। हालांकि, अधिकारी ने आशंका जताई कि यह एक स्मोकस्क्रीन और समय हासिल करने की कोशिश भी हो सकती है। इसके पीछे जम्मू-कश्मीर में पूरे आतंकी नेटवर्क को दोबारा खड़ा करने की योजना हो सकती है।
पीओके में करीब 1,000 आतंकी घुसपैठ के इंतजार में
अधिकारियों के मुताबिक, हाल के महीनों में आईएसआई ने अपना नेटवर्क काफी हद तक फिर तैयार कर लिया है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में करीब 1,000 आतंकी जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ के इंतजार में बताए जा रहे हैं। योजना यह है कि इन आतंकियों को नियंत्रण रेखा पार कराने के बाद घाटी के घने जंगलों में छिपाया जाए। इसके बाद उन्हें हमलों के लिए अलग-अलग ठिकाने और लक्ष्य दिए जा सकते हैं।
पुराने नेटवर्क की जगह नए ओवर ग्राउंड वर्कर
एक अधिकारी के मुताबिक, आईएसआई ने ओवर ग्राउंड वर्करों (OGWs) का भी नया नेटवर्क तैयार किया है। पुराने लोगों को इसलिए बदला गया क्योंकि वे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की नजर में आ चुके थे। अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन प्रोपेगेंडा का मकसद सिर्फ समय खरीदना नहीं, बल्कि घाटी में डर और घबराहट फैलाना भी है। यह ऐसे समय हो रहा है, जब हाल में एक पुलिसकर्मी और प्रवासी मजदूरों की टारगेट किलिंग की घटनाएं सामने आई हैं।
यह भी पढ़ें: नेपाल बाढ़ में 320 भारतीय अब भी लापता: चीन से 96 लोग पहुंचे काठमांडो, विदेश मंत्रालय ने और क्या-क्या बताया?
एक चूक का इंतजार?
अधिकारियों के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के बाद सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। इससे घुसपैठ करना काफी मुश्किल हुआ है। घाटी में आतंकियों की संख्या भी फिलहाल कम बताई गई है। लेकिन अगर आतंकी घने जंगलों तक पहुंचने में सफल हो जाते हैं तो उन्हें तलाशना मुश्किल हो सकता है। जंगलों में तलाशी अभियान चुनौतीपूर्ण होता है और आतंकियों के संचार के लिए इस्तेमाल होने वाली तकनीक को ट्रैक करना भी आसान नहीं है। एक अधिकारी के मुताबिक, आईएसआई को सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था में एक चूक या कमजोरी का इंतजार है। उसका फायदा उठाकर कुछ आतंकियों को घाटी में पहुंचाया जा सकता है।
सुरक्षा एजेंसियों को कई मोर्चों पर उलझाने की कोशिश
अधिकारियों का कहना है कि धमकी, प्रोपेगेंडा और लोगों को भड़काने की कोशिश का उद्देश्य सुरक्षा एजेंसियों को कई मोर्चों पर व्यस्त रखना है। इससे भ्रम की स्थिति भी पैदा हो सकती है। एक अधिकारी ने कहा कि आईएसआई की योजना कई स्तरों पर काम करने की है। इसमें ऐसे तत्व शामिल हैं, जो आगे चलकर पहलगाम या पुलवामा जैसे बड़े हमले की दिशा में ले जा सकते हैं।
अधिकारी ने चेतावनी दी कि जैसे-जैसे प्रोपेगेंडा अभियान तेज होगा, सुरक्षा एजेंसियों को और सतर्क रहने की जरूरत होगी। आशंका है कि यह ध्यान भटकाने की रणनीति हो सकती है, जबकि आईएसआई जम्मू-कश्मीर में अपने बड़े प्लान पर काम कर रही हो।
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अधिकारियों का मानना है कि धमकी और डर का यह अभियान सिर्फ दहशत फैलाने के लिए नहीं है। इसका मकसद सुरक्षा एजेंसियों को कई मोर्चों पर उलझाना और आतंकियों को नियंत्रण रेखा पार कर घाटी के घने जंगलों तक पहुंचने का मौका देना भी हो सकता है।
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टीआरएफ और यूएलसी के नाम से धमकी भरे संदेश
द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) और यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (यूएलसी) जैसे प्रॉक्सी संगठनों के नाम से जारी धमकी भरे पत्रों में कश्मीरी पंडितों, प्रवासी मजदूरों और स्थानीय प्रशासन को निशाना बनाया गया है। इन संदेशों में कश्मीरी पंडितों और प्रवासी मजदूरों की हत्या की धमकी दी गई है। फसलों को नष्ट करने और घरों में आग लगाने जैसी बातें भी कही गई हैं।
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क्या यह सिर्फ प्रोपेगेंडा या किसी बड़ी योजना की तैयारी?
एक इंटेलिजेंस ब्यूरो अधिकारी के अनुसार, शुरुआत में ऐसा लगा कि यह प्रोपेगेंडा जमीनी स्तर पर बड़े हमले करने में नाकामी से पैदा हुई निराशा का नतीजा है। हालांकि, अधिकारी ने आशंका जताई कि यह एक स्मोकस्क्रीन और समय हासिल करने की कोशिश भी हो सकती है। इसके पीछे जम्मू-कश्मीर में पूरे आतंकी नेटवर्क को दोबारा खड़ा करने की योजना हो सकती है।
पीओके में करीब 1,000 आतंकी घुसपैठ के इंतजार में
अधिकारियों के मुताबिक, हाल के महीनों में आईएसआई ने अपना नेटवर्क काफी हद तक फिर तैयार कर लिया है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में करीब 1,000 आतंकी जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ के इंतजार में बताए जा रहे हैं। योजना यह है कि इन आतंकियों को नियंत्रण रेखा पार कराने के बाद घाटी के घने जंगलों में छिपाया जाए। इसके बाद उन्हें हमलों के लिए अलग-अलग ठिकाने और लक्ष्य दिए जा सकते हैं।
पुराने नेटवर्क की जगह नए ओवर ग्राउंड वर्कर
एक अधिकारी के मुताबिक, आईएसआई ने ओवर ग्राउंड वर्करों (OGWs) का भी नया नेटवर्क तैयार किया है। पुराने लोगों को इसलिए बदला गया क्योंकि वे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की नजर में आ चुके थे। अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन प्रोपेगेंडा का मकसद सिर्फ समय खरीदना नहीं, बल्कि घाटी में डर और घबराहट फैलाना भी है। यह ऐसे समय हो रहा है, जब हाल में एक पुलिसकर्मी और प्रवासी मजदूरों की टारगेट किलिंग की घटनाएं सामने आई हैं।
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एक चूक का इंतजार?
अधिकारियों के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के बाद सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। इससे घुसपैठ करना काफी मुश्किल हुआ है। घाटी में आतंकियों की संख्या भी फिलहाल कम बताई गई है। लेकिन अगर आतंकी घने जंगलों तक पहुंचने में सफल हो जाते हैं तो उन्हें तलाशना मुश्किल हो सकता है। जंगलों में तलाशी अभियान चुनौतीपूर्ण होता है और आतंकियों के संचार के लिए इस्तेमाल होने वाली तकनीक को ट्रैक करना भी आसान नहीं है। एक अधिकारी के मुताबिक, आईएसआई को सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था में एक चूक या कमजोरी का इंतजार है। उसका फायदा उठाकर कुछ आतंकियों को घाटी में पहुंचाया जा सकता है।
सुरक्षा एजेंसियों को कई मोर्चों पर उलझाने की कोशिश
अधिकारियों का कहना है कि धमकी, प्रोपेगेंडा और लोगों को भड़काने की कोशिश का उद्देश्य सुरक्षा एजेंसियों को कई मोर्चों पर व्यस्त रखना है। इससे भ्रम की स्थिति भी पैदा हो सकती है। एक अधिकारी ने कहा कि आईएसआई की योजना कई स्तरों पर काम करने की है। इसमें ऐसे तत्व शामिल हैं, जो आगे चलकर पहलगाम या पुलवामा जैसे बड़े हमले की दिशा में ले जा सकते हैं।
अधिकारी ने चेतावनी दी कि जैसे-जैसे प्रोपेगेंडा अभियान तेज होगा, सुरक्षा एजेंसियों को और सतर्क रहने की जरूरत होगी। आशंका है कि यह ध्यान भटकाने की रणनीति हो सकती है, जबकि आईएसआई जम्मू-कश्मीर में अपने बड़े प्लान पर काम कर रही हो।