Black Sea Attack: जयशंकर की यूक्रेन को दो टूक, कहा- भारतीय नाविकों और जहाजों पर हमला बिल्कुल स्वीकार नहीं
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से बातचीत में साफ कहा कि काला सागर में व्यापारिक जहाजों और भारतीय नाविकों पर किसी भी पक्ष का हमला बिल्कुल स्वीकार नहीं है। भारत ने ऐसे हमलों की कड़ी निंदा भी की। भारत ने यूक्रेन से क्या कहा? यूक्रेन ने भारत से कैसी भूमिका निभाने की अपील की और बातचीत में किन मुद्दों पर चर्चा हुई? आइए, सबकुछ विस्तार से ाजानते हैं...
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विस्तार
भारत ने काला सागर में व्यापारिक जहाजों और भारतीय नाविकों पर हो रहे हमलों को लेकर यूक्रेन के सामने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से फोन पर बातचीत में कहा कि किसी भी पक्ष की ओर से व्यापारिक जहाजों और भारतीय नाविकों पर किए गए हमले बिल्कुल स्वीकार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत ऐसे सभी हमलों की बिना किसी शर्त कड़ी निंदा करता है। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब हाल ही में काला सागर में एक व्यापारी जहाज पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हुई थी।
जयशंकर और सिबिहा के बीच हुई बातचीत में काला सागर की मौजूदा स्थिति, यूक्रेन संघर्ष और शांति प्रयासों पर भी चर्चा हुई। हाल ही में भारत ने यूक्रेन के राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक को तलब कर एक भारतीय नाविक की मौत पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। एमवी ओमोरफी नामक व्यापारी जहाज पर यूक्रेनी ड्रोन हमले की खबर सामने आई थी। रूस और यूक्रेन के बीच हाल के हमलों में अब तक पांच भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है, जबकि दो अन्य अब भी लापता बताए गए हैं।
जयशंकर ने यूक्रेन से क्या कहा?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने काला सागर में व्यापारिक जहाजों और भारतीय नाविकों पर हुए हमलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी पक्ष की ओर से ऐसे हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और भारत उनकी स्पष्ट शब्दों में निंदा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यूक्रेन संघर्ष और शांति वार्ता से जुड़े ताजा घटनाक्रम की जानकारी दी गई। जयशंकर ने दोहराया कि भारत हमेशा संबंधित पक्षों के बीच बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थन करता रहा है।
वैश्विक हालात पर भारत ने क्या चिंता जताई?
जयशंकर ने बातचीत में कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे कई संघर्षों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इन संघर्षों का असर ईंधन, उर्वरक और खाद्य सुरक्षा पर पड़ रहा है। खासकर वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए यह स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। भारत का मानना है कि मौजूदा संकट का समाधान केवल संवाद और शांतिपूर्ण प्रयासों से ही निकल सकता है।
यूक्रेन ने भारत से क्या अपील की?
यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने कहा कि उन्होंने जयशंकर को राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की हालिया वॉशिंगटन यात्रा की जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस काला सागर में नागरिक जहाजों पर हमला कर नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है। उनका कहना था कि रूस का युद्ध वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी प्रभावित कर रहा है। सिबिहा ने भारत से शांति प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की और कहा कि यूक्रेन व्यापक और स्थायी शांति के लिए प्रतिबद्ध है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने भविष्य में भी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।