महाराष्ट्र में होम्योपैथी डॉक्टरों को झटका: CCMP पंजीकरण पर रोक, बॉम्बे हाईकोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार
महाराष्ट्र सरकार ने होम्योपैथी डॉक्टरों के सीसीएमपी पंजीकरण की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है। बॉम्बे हाईकोर्ट के अंतिम फैसले और आगे के सरकारी निर्देशों का इंतजार है।
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महाराष्ट्र सरकार ने होम्योपैथी डॉक्टरों के लिए सीसीएमपी यानी सर्टिफिकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी के पंजीकरण की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी है। यह फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई और अंतिम निर्णय आने तक लागू रहेगा। सरकार ने कहा है कि अदालत के अंतिम आदेश और आगे के निर्देश मिलने के बाद ही इस प्रक्रिया पर अगला कदम उठाया जाएगा।
CCMP पंजीकरण पर महाराष्ट्र सरकार ने रोक क्यों लगाई?
चिकित्सा शिक्षा एवं औषधि विभाग ने मंगलवार को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) को इस संबंध में जानकारी दी। विभाग ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के सामान्य होने और बॉम्बे हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आने के बाद ही सीसीएमपी से जुड़े प्रमाणपत्र जारी करना उचित होगा। इस फैसले के बाद होम्योपैथी डॉक्टरों के सीसीएमपी पंजीकरण की प्रक्रिया फिलहाल आगे नहीं बढ़ेगी।
होम्योपैथी डॉक्टरों को CCMP के जरिए क्या मिलना था?
मामला उन होम्योपैथी चिकित्सकों के एमएमसी पंजीकरण से जुड़ा है, जिन्होंने एक वर्षीय सीसीएमपी पूरा किया है। इस प्रक्रिया के तहत उन्हें सीमित रूप से आधुनिक चिकित्सा यानी एलोपैथी का अभ्यास करने की अनुमति देने का प्रस्ताव था। इसी प्रस्ताव को लेकर डॉक्टर संगठनों के बीच लंबे समय से विरोध चल रहा था।
आईएमए और सेंट्रल एमएआरडी ने क्यों किया विरोध?
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और सेंट्रल एमएआरडी ने होम्योपैथी चिकित्सकों को एमएमसी पंजीकरण देने के प्रस्ताव का विरोध किया था। दोनों संगठनों ने मरीजों की सुरक्षा, पेशेवर मानकों और आधुनिक चिकित्सा पद्धति की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। इस मुद्दे को लेकर संगठनों की ओर से आंदोलन, हड़ताल और सरकार के सामने लगातार प्रतिनिधित्व किया गया।
मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में क्यों पहुंचा?
सीसीएमपी के तहत होम्योपैथी चिकित्सकों को सीमित आधुनिक चिकित्सा अभ्यास की अनुमति और एमएमसी पंजीकरण से जुड़ा मामला फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित है। महाराष्ट्र सरकार ने अब अदालत के अंतिम निर्णय तक प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया रोक दी है।
सेंट्रल एमएआरडी ने फैसले पर क्या कहा?
सेंट्रल एमएआरडी ने महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। संगठन ने कहा कि वह मामले पर नजर बनाए रखेगा और अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक स्थिति की निगरानी करता रहेगा। संगठन ने यह भी कहा कि वह ऐसी स्पष्ट और कानूनी रूप से टिकाऊ नीति लागू होने तक मामले को देखता रहेगा, जिससे इस विषय पर आगे की दिशा तय हो सके।