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Explainer: जवानों-नर्स की हत्या से लेकर गृह मंत्री की बेटी के अपहरण की साजिश तक, जानें यासीन की हर आतंकी करतूत

Mon, 29 Jun 2026 06:18 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 29 Jun 2026 06:18 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) कश्मीर ने वर्ष 1990 में एसकेआईएमएस की स्टाफ नर्स सरला भट के अपहरण, यातना और हत्या के मामले में 737 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट श्रीनगर की विशेष अदालत में दाखिल की है। इसमें पांच लोगों के नाम शामिल किए गए हैं और तत्कालीन अलगाववादी नेता और आतंकी यासीन मलिक को हत्याकांड का मास्टरमाइंड करार दिया है। 

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Jammu And Kashmir Sarla Bhat Case Yasin Malik Chargesheet know history of JKLF Armed Terror Cases Photo Story
यासीन मलिक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में वर्षों तक अलगाववाद का चेहरा रहे यासीन मलिक की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। पहले ही शासन के खिलाफ विद्रोह और आतंकी साजिश रचने से जुड़े मामलों में सजा काट रहे यासीन मलिक को अब 1990 के नर्स सरला भट हत्याकांड का मास्टरमाइंड करार दिया गया है। श्रीनगर की विशेष अदालत में दायर चार्जशीट में यासीन मलिक के अलावा चार और लोगों पर आरोप तय किए गए हैं। 
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गौरतलब है कि 18 अप्रैल 1990 को सरला भट का श्रीनगर स्थित एसकेआईएमएस अस्पताल के पास से अपहरण किया गया था। जम्मू कश्मीर राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने अपनी जांच में पाया कि सरला को यातनाएं देने के बाद श्रीनगर के ओमर कॉलोनी, मालबाग इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। एसआईए ने अपनी जांच में आरोप लगाया है कि यह घटना जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। यासीन मलिक ही इस आतंकी संगठन का सरगना था।
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ये भी पढ़ें: अपहरण, फिर गोली मारकर हत्या: 35 साल बाद सरला भट हत्याकांड में नया मोड़, SIA ने 737 पन्नों की दाखिल की चार्जशीट 
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माना जा रहा है कि इस मामले में आरोप तय होने के बाद यासीन मलिक की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। हालांकि, कश्मीर के भारत से अलगाव की पैरवी करने वाले इस आतंकी का किसी अपहरण-हत्या के केस में नाम आने की यह पहली या दूसरी घटना नहीं है। इससे पहले भी यासीन का कई आपराधिक और आतंकी गतिविधियों में नाम सामने आ चुका है। आइये जानते हैं कि यासीन मलिक कौन है और इससे पहले कब-किस मामले में उसका नाम जुड़ चुका है...


1. पिता बस ड्राइवर, बेटे ने घाटी में फैलाई दहशत

यासीन मलिक का जन्म 3 अप्रैल 1966 को श्रीनगर के मैसुमा में हुआ था। यासीन के पिता गुलाम कादिर मलिक सरकारी बस ड्राइवर थे। यासीन की पूरी पढ़ाई-लिखाई श्रीनगर में ही हुई। उसने श्री प्रताप कॉलेज से स्नातक किया यासीन मलिक ने एक इंटरव्यू में आम छात्र से प्रतिबंधित संगठन जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का मुखिया बनने तक की कहानी सुनाई थी। उसने दावा था कि कश्मीर में सेना का जुल्म देखकर उसने हथियार उठाए। इसके बाद यासीन ने 80 के दशक में 'ताला पार्टी ' का गठन किया। साथ ही, उसने घाटी में कई बार आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया। 

2. क्रिकेट मैच के दौरान पिच खराब करने गया

यह बात 13 अक्तूबर 1983 की है। कश्मीर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में भारत और वेस्ट इंडीज के बीच क्रिकेट मैच चल रहा था। लंच ब्रेक के दौरान 10-12 लड़के अचानक मैदान में पहुंच गए और पिच खराब करने लगे। इस वारदात को ताला पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ही अंजाम दिया था। 


3. सैकड़ों लोगों की रैली में फोड़े पटाखे

13 जुलाई 1985 को कश्मीर के ख्वाजा बाजार में नेशनल कॉन्फ्रेंस की रैली हो रही थी। उस दौरान सैकड़ों लोग मौजूद थे। 60 से 70 लड़के रैली में पहुंचे और बीच में ही पटाखे फोड़ दिए। उस वक्त हर किसी को लगा कि बमबारी शुरू हो गई है। हर तरफ अफरातफरी का माहौल बन गया। तब पहली बार यासीन मलिक पकड़ा गया। 

4. 'ताला पार्टी' का नाम बदलकर 'आईएसएल' किया

साल 1986 में मलिक ने 'ताला पार्टी' का नाम बदलकर 'इस्लामिक स्टूडेंट्स लीग यानी आईएसएल' कर दिया। इसमें वह केवल कश्मीर के युवाओं को शामिल करता था। इसका मकसद कश्मीर को भारत से अलग करना था। आईएसएल में अशफाक मजीद वानी, जावेद मीर और अब्दुल हमीद शेख जैसे आतंकी शामिल थे, जिन्होंने कश्मीर में कई आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया।


5. मकबूल भट्ट की फांसी का किया विरोध

देश विरोधी गतिविधियों और आतंकी घटनाओं में शामिल होने के चलते 11 फरवरी 1984 को आतंकवादी मकबूल भट्ट को फांसी दी गई थी। उस वक्त यासीन मलिक और उसकी ताला पार्टी ने इसका जमकर विरोध किया। जगह-जगह मकबूल भट्ट के समर्थन में पोस्टर लगाए। इस मामले में यासीन को पुलिस ने गिरफ्तार किया और वह चार महीने तक जेल में रहा। 
 

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यासीन मलिक (फाइल फोटो) - फोटो : X @ANI

6. फिर राजनीति में भी रखा कदम

1980 दशक से ही कश्मीर में हिंदुओं पर हमले होने लगे थे। इसमें यासीन मलिक और उसके साथियों का नाम आता था। हिंसा की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सात मार्च 1986 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने जम्मू कश्मीर की गुलाम मोहम्मद शेख सरकार को बर्खास्त कर दिया। राज्य में राज्यपाल शासन लागू कर दिया गया। इसके बाद कांग्रेस ने फारूक अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ हाथ मिला लिया। 

1987 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में अलगाववादी नेताओं ने मिलकर नया गठबंधन किया। इसमें जमात-ए-इस्लामी और इत्तेहादुल-उल-मुसलमीन जैसी पार्टियां साथ आईं और मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट (एमयूएफ) बनाया। यासीन मलिक ने इस गठबंधन के प्रत्याशी मोहम्मद युसुफ शाह के लिए प्रचार किया। बाद में इसी यूसुफ शाह ने आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन का गठन किया। आज यूसुफ शाह को सैयद सलाहुद्दीन के नाम से जाना जाता है। 

7. चुनाव हारा तो बढ़ गईं हिंसा की घटनाएं

1987 में कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस से मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट (एमयूएफ) चुनाव हार गई। इसके बाद पूरे कश्मीर में हिंसा की घटनाएं बढ़ गईं। कहा जाता है कि यासीन मलिक ने पूरे कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा दिया। 1988 में यासीन मलिक जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट यानी जेकेएलएफ से जुड़ गया। वह एरिया कमांडर था। इसके जरिए यासीन मलिक ने कश्मीरी युवाओं को देश के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया। 


8. गृहमंत्री की बेटी का अपहण किया

1988 में जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट यानी जेकेएलएफ से जुड़ने के कुछ दिनों बाद ही वह पाकिस्तान चला गया। यहां ट्रेनिंग लेने के बाद 1989 में वह वापस भारत आया। इसके बाद वह गैर मुस्लिमों की हत्या करने लगा। आठ दिसंबर 1989 को देश के तत्कालीन गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद का अपहरण हो गया।

उस वक्त मुफ्ती मोहम्मद सईद दिल्ली में अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। इस अपहरण कांड का मास्टरमाइंड अशफाक वानी था। कहा जाता था कि यह कांड यासीन मलिक के इशारे पर ही हुआ था। इसमें शामिल सारे आतंकवादी जेकेएलएफ से ही जुड़े थे। टाडा कोर्ट ने इस मामले में यासीन मलिक, अशफाक वानी, जावेद मीर, मोहम्मद सलीम, याकूब पंडित और अमानतुल्लाह खान को आरोपी बनाया। 1990 में सुरक्षाबल के जवानों ने अशफाक वानी को मार गिराया था।

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यासीन मलिक - फोटो : एएनआई (फाइल)

9. जब पूरा देश हिल गया

गृहमंत्री की बेटी के अपहरण के कुछ समय बाद 1990 में कश्मीर में वायुसेना के चार जवानों की सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में भी यासीन मलिक ही आरोपी बनाया गया। 

इसी दौरान 18 अप्रैल 1990 को सरला भट का श्रीनगर स्थित एसकेआईएमएस अस्पताल के पास से अपहरण किया गया था। उन्हें टॉर्चर करने के बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। अब इसी मामले में नाम आने के बाद यासीन मलिक की मुश्किलें फिर बढ़ी हैं।


10. कब-कब गिरफ्तार हुआ यासीन

  • अगस्त 1990 में यासीन मलिक दूसरी बार गिरफ्तार हुआ था। तब वह घायल था। उसकी गिरफ्तारी के बाद सुरक्षाबल के जवानों ने जेकेएलएफ के कई आतंकियों को मार गिराया। मई 1994 में उसे रिहा कर दिया गया। 
  • 1999 में यासीन मलिक को पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया। इसके बाद वह जेल से अंदर-बाहर होता रहा। उस दौरान उसने देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से भी मुलाकात की। 2005 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी वह मिला था।
  • 2017 में यासीन मलिक के खिलाफ टेरर फंडिंग मामले में एनआईए ने केस दर्ज किया। 2019 में यासीन मलिक को गिरफ्तार कर लिया गया। 19 मई 2022 को कोर्ट ने यासीन मलिक को टेरर फंडिंग के मामले में दोषी ठहराया।
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