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झारखंड में छात्रों को हटाने की तैयारी में सरकार?: आधी रात धरनास्थल पर पहुंचे भाजपा नेता, पुलिस पर लगाए ये आरोप

Wed, 12 Aug 2026 06:50 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 12 Aug 2026 06:50 AM IST
सार

झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों का आंदोलन नौवें दिन भी जारी है। आधी रात जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरना स्थल पर कई भाजपा नेता पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन अंधेरे में छात्रों को जबरन हटाने की तैयारी कर रहा है और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं। छात्रों ने भी पुलिस पर आंदोलन को कमजोर करने का आरोप लगाया। आइए, विस्तार से जानते हैं कि रांची सिटी एसपी ने मामले पर क्या कहा? भाजपा नेताओं ने क्या-क्या दावे किए? 

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Jharkhand Government Planning to Remove Students? BJP Leaders Reach Protest Site at Midnight, Allege Police Ac
झारखंड में क्यों भड़के भाजपा नेता? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी  अभ्यर्थियों के प्रदर्शन को लेकर देर रात तनाव की स्थिति बन गई। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरने पर बैठे छात्रों के बीच आधी रात कई भाजपा नेता पहुंच गए। भाजपा नेताओं ने दावा किया कि उन्हें सूचना मिली थी कि प्रशासन रात के अंधेरे में प्रदर्शन कर रहे छात्रों को हटाने की तैयारी कर रहा है। नेताओं ने कहा कि वे आंदोलन में शामिल होने नहीं, बल्कि छात्रों को नैतिक समर्थन देने पहुंचे हैं। वहीं पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसका उद्देश्य किसी प्रदर्शनकारी को हिरासत में लेना नहीं था।
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भाजपा नेताओं ने पुलिस और प्रशासन पर क्या आरोप लगाए?

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने कहा कि छात्रों के समर्थन में सूचना मिलते ही वे धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने कहा कि JPSC-JSSC का यह आंदोलन अब केवल झारखंड का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश से जुड़ा विषय बन गया है। उनके मुताबिक बड़ी संख्या में युवाओं की उम्मीदें और भावनाएं इस प्रदर्शन से जुड़ी हैं। उन्होंने प्रशासन से तय सीमाओं में रहकर कार्रवाई करने की अपील की और आरोप लगाया कि अंधेरे में छात्रों को डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा छात्रों के साथ खड़े हैं।
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क्या भाजपा विधायक ने अंधेरे में कार्रवाई का लगाया आरोप?

भाजपा विधायक राज सिन्हा ने कहा कि उन्हें सूचना मिली थी कि प्रशासन के कुछ बड़े अधिकारी रात में छात्रों को डराने के लिए धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन के पास पुलिस बल, लाठी, हथियार और आंसू गैस जैसे साधन हैं, तो कार्रवाई करनी है तो खुले तौर पर की जानी चाहिए। राज सिन्हा ने पिछली घटना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि छात्रों को विधान परिषद परिसर में ले जाया गया था और बाद में इलाके की स्ट्रीट लाइट बंद कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि छात्रों और पत्रकारों के साथ कथित मारपीट भी हुई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि रात में ही कार्रवाई क्यों की जा रही है।
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क्या धरनास्थल के आसपास 500 से 600 पुलिसकर्मी तैनात थे?

  • भाजपा नेता प्रतुल सहदेव ने दावा किया कि छात्रों को रात में हटाने के लिए पुलिस की कार्रवाई की खबर मिलने के बाद वे धरना स्थल पहुंचे।
  • उन्होंने कहा कि आधी रात करीब 12:30 बजे उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का मौके पर पहुंचना सामान्य बात नहीं है।
  • उन्होंने दावा किया कि धरना स्थल के आधे किलोमीटर के दायरे में करीब 500 से 600 पुलिसकर्मी तैनात थे और छात्रों पर लगातार नजर रखी जा रही थी।
  • उन्होंने कहा कि छात्र अपने अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे हैं और भाजपा नेता केवल उन्हें नैतिक समर्थन देने पहुंचे हैं।

छात्रों ने पुलिस पर आंदोलन कमजोर करने का क्या आरोप लगाया?

धरने पर बैठे छात्र प्रेम नायक ने कहा कि भूख हड़ताल का नौवां दिन है। उनके मुताबिक देर रात पुलिस धरना स्थल पर पहुंची और छात्रों के बीच बंटवारा पैदा करने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने आधार कार्ड मांगे और छात्रों से पूछा कि वे वहां क्यों बैठे हैं। प्रेम नायक ने कहा कि अलग-अलग तरीकों से आंदोलन को कमजोर करने और लोगों को धरना स्थल से हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन संवैधानिक तरीके से चल रहा है और अगर उन्हें जेल भी भेजा गया तो वे वहां भी भूख हड़ताल जारी रखेंगे।

पुलिस ने छात्रों को हिरासत में लेने के आरोप पर क्या कहा?

रांची सिटी एसपी पारस राणा ने छात्रों और भाजपा नेताओं के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि पुलिस किसी को हिरासत में लेने के लिए धरना स्थल पर नहीं पहुंची थी। एसपी के मुताबिक प्रशासन के मौके पर पहुंचने के बाद कुछ इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर वीडियो बनाने और उसे वायरल करने लगे, जिसके बाद यह अफवाह फैल गई कि पुलिस प्रदर्शनकारियों को पकड़ने आई है। उन्होंने कहा कि पुलिस टीम कुछ लोगों की पहचान की पुष्टि करने और छात्रों से बातचीत करने के लिए वहां पहुंची थी।

पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था की क्या वजह बताई?

रांची सिटी एसपी ने कहा कि पहले हुई पथराव की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस सतर्क है। उनके मुताबिक प्रदर्शन की कोर कमेटी के सदस्यों ने भी पुलिस को बताया था कि कुछ असामाजिक तत्व आंदोलन में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं। इसी वजह से पुलिस टीम कुछ लोगों की पहचान की जानकारी जुटाने पहुंची थी। एसपी ने कहा कि पुलिस छात्रों से बातचीत करना चाहती थी और यह सुनिश्चित करना चाहती थी कि धरना स्थल पर कोई अपराधी मौजूद न हो। उन्होंने साफ किया कि किसी को जबरन हटाने या हिरासत में लेने की कार्रवाई नहीं की जा रही थी।

क्या छात्रों के आंदोलन से झारखंड में बढ़ेगा राजनीतिक टकराव?

जेपीएससी-जेएसएससी  अभ्यर्थियों का आंदोलन नौवें दिन भी जारी रहने और आधी रात भाजपा नेताओं के धरना स्थल पर पहुंचने से मामला राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है। एक तरफ भाजपा नेताओं और प्रदर्शनकारी छात्रों ने पुलिस पर रात के अंधेरे में कार्रवाई की तैयारी का आरोप लगाया है। दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि ऐसी कोई योजना नहीं थी और टीम केवल सुरक्षा व्यवस्था तथा कुछ लोगों की पहचान की पुष्टि के लिए पहुंची थी। ऐसे में अब सवाल यह है कि छात्रों का आंदोलन आगे किस दिशा में जाएगा और क्या सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर गतिरोध खत्म करने की कोशिश करेगी।
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