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Supreme Court: कर्नाटक की दरगाह ने कोर्ट में दायर की याचिका, विवादित स्थल में पूजा पर रोक लगाने की मांग की

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 11 Feb 2026 03:37 PM IST
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सार

Supreme Court: कर्नाटक की लाडले मशाइक दरगाह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर विवादित स्थल पर महा शिवरात्रि पूजा पर रोक लगाने और परिसर की धार्मिक पहचान बनाए रखने की मांग की है। दरगाह ने 15 फरवरी से पहले सुनवाई की अपील की, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले हाईकोर्ट जाने की सलाह दी। क्या है पूरा मामला, पढ़िए रिपोर्ट-

Karnataka dargah moves SC to restrain puja on premises, flags repeated attempts to alter its character
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

कर्नाटक की लाडले मशाइक दरगाह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। दरगाह ने मांग की है कि वहां महा शिवरात्रि पूजा पर रोक लगाई जाए। साथ ही कहा है कि परिसर में कोई निर्माण या बदलाव न किया जाए। जिससे उसकी धार्मिक पहचान न बदले।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?
यह मामला मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की बेंच के समक्ष रखा गया। दरगाह की ओर से वरिष्ठ वकील विभा दत्ता माखिजा पेश हुईं। उन्होंने कहा कि 15 फरवरी को महाशिवरात्रि है। इससे पहले इस मामले की सुनवाई की जाए। उन्होंने बताया कि यह दरगाह गुलबर्गा (कलबुर्गी) के आलंद में है। अब वहां शिवरात्रि मनाने की तैयारी की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह अनुरोध पर विचार करेगा। लेकिन कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामले पहले हाईकोर्ट में जाने चाहिए। सीधे सुप्रीम कोर्ट आने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
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विवादित स्थल का इतिहास क्या है?
  • विवादित स्थल 14वीं सदी के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी से जुड़ा है। उन्हें लाडले मशाइक भी कहा जाता है। यह जगह 15वीं सदी के हिंदू संत राघव चैतन्य से भी जुड़ी है।
  • परिसर में राघव चैतन्य शिवलिंग नाम की एक संरचना भी है। पहले यहां मुसलमान और हिंदू दोनों पूजा करते थे।
  • 2022 में पूजा अधिकार को लेकर तनाव बढ़ गया। कुछ लोगों ने कथित तौर पर शिवलिंग पर गंदगी फेंक दी थी।

पहले हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया था?
फरवरी 2025 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने 15 हिंदुओं को शिवरात्रि पूजा की अनुमति दी थी। भारी सुरक्षा के बीच पूजा हुई थी। एक साल पहले भी कोर्ट के आदेश से पूजा हुई थी। दरगाह की याचिका में कहा गया है कि यह जगह की पहचान बदलने की कोशिश है। कोर्ट से अंतरिम आदेश लेकर धीरे-धीरे स्थिति बदली जा रही है। याचिका में 1991 के पूजा स्थल कानून का भी जिक्र किया गया है।

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पुराने फैसलों और विवादों का याचिका में क्या जिक्र है?
याचिका के अनुसार ,1968 में नगर परिषद ने दरगाह परिसर में मंदिर बनाने की अनुमति ठुकरा दी थी। तब कहा गया था कि यह कब्रों से घिरा मजार है। इसके बावजूद बार-बार मुकदमे दायर किए गए। जब मुकदमे विफल रहे, तो आंदोलन की कोशिश की गई। 2022 में 'आलंद चलो' पदयात्रा की घोषणा भी हुई थी।

दरगाह ने नई याचिका में क्या आरोप लगाए?
याचिका में कहा गया है कि हर साल शिवरात्रि के समय नई याचिका दायर की जाती है। 2026 में भी हाईकोर्ट में पूजा की अनुमति के लिए याचिका दायर की गई है। दरगाह का कहना है कि यह धार्मिक प्रवेश को स्थायी बनाने की कोशिश है और बाद में स्थल की प्रकृति बदलने की योजना है।



 
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