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Karnataka: पूर्व मंत्री बी. श्रीरामुलु ने अमित शाह को लिखा पत्र, बागलकोट हिंसा पर की NIA जांच की मांग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 26 Feb 2026 01:21 PM IST
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सार
कर्नाटक के पूर्व मंत्री बी. श्रीरामुलु ने बागलकोट में हुई हालिया हिंसा के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर एनआईए जांच की मांग की है। उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि हिंदू संगठनों से जुड़े युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है।
बी. श्रीरामुलु (कर्नाटक के पूर्व मंत्री)
- फोटो : ANI
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विस्तार
कर्नाटक के पूर्व मंत्री बी. श्रीरामुलु ने बागलकोट में हुई हालिया हिंसा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखकर इस मामले की एनआईए जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने कर्नाटक की बिगड़ती कानून-व्यवस्था की समीक्षा करने का भी अनुरोध किया है।
हिंदू युवाओं को निशाना बनाने का आरोप
श्रीरामुलु ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि राज्य में सार्वजनिक जुलूसों और संवेदनशील इलाकों के पास बार-बार हिंसा की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि हिंदू संगठनों से जुड़े युवाओं पर हमले बढ़ रहे हैं। उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है और कई मामलों में पीड़ितों को ही काउंटर-केस (क्रॉस केस) में फंसाकर गिरफ्तार किया जा रहा है। श्रीरामुलु ने उदाहरण के तौर पर सितंबर 2024 में मांड्या में हुई हिंसा, मंगलुरु में सुहास शेट्टी की हत्या और कोप्पल में एक हिंदू युवक पर हमले की घटनाओं का जिक्र किया।
ये भी पढ़ें: Karnataka: नाबालिग से छेड़छाड़ के आरोप में कथित बाबा पर केस दर्ज, वीडियो वायरल होने के बाद आरोपी फरार
बागलकोट की घटना पर क्या बोले मंत्री?
बागलकोट की घटना का जिक्र करते हुए पूर्व मंत्री ने बताया कि 20 फरवरी को पुराने शहर में छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती की शोभायात्रा पर पथराव हुआ था। इसके बाद पुलिस ने गिरफ्तारियां कीं और 28 फरवरी तक निषेधाज्ञा (धारा 144) लागू कर दी। श्रीरामुलु के अनुसार, यह घटना दर्शाती है कि रूट मैनेजमेंट और इंटेलिजेंस के स्तर पर भारी चूक हुई है, जिसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।
संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग
श्रीरामुलु ने केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत अपने कर्तव्यों का पालन करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी जांच को प्रभावित करना नहीं, बल्कि निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। उन्होंने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्रालय कर्नाटक के गृह विभाग और डीजीपी के साथ एक समीक्षा बैठक बुलाए। इस बैठक में खुफिया तंत्र की विफलताओं और दंगों के मामलों में हो रही कानूनी कार्रवाई का मूल्यांकन किया जा सके।
नए सुरक्षा नियमों का दिया सुझाव
पूर्व मंत्री ने जुलूसों और शोभायात्राओं के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करने का अनुरोध किया। इसमें जुलूस की अनुमति, मार्ग, समय-सीमा और संवेदनशील स्थानों के पास 'नो-गो' बफर जोन बनाने जैसे बिंदु शामिल हों। उन्होंने रीयल-टाइम तनाव नियंत्रण प्रोटोकॉल और शांति समितियों की नियमित बैठकों पर भी जोर दिया है ताकि भविष्य में ऐसी हिंसा को रोका जा सके।
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हिंदू युवाओं को निशाना बनाने का आरोप
श्रीरामुलु ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि राज्य में सार्वजनिक जुलूसों और संवेदनशील इलाकों के पास बार-बार हिंसा की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि हिंदू संगठनों से जुड़े युवाओं पर हमले बढ़ रहे हैं। उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है और कई मामलों में पीड़ितों को ही काउंटर-केस (क्रॉस केस) में फंसाकर गिरफ्तार किया जा रहा है। श्रीरामुलु ने उदाहरण के तौर पर सितंबर 2024 में मांड्या में हुई हिंसा, मंगलुरु में सुहास शेट्टी की हत्या और कोप्पल में एक हिंदू युवक पर हमले की घटनाओं का जिक्र किया।
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बागलकोट की घटना पर क्या बोले मंत्री?
बागलकोट की घटना का जिक्र करते हुए पूर्व मंत्री ने बताया कि 20 फरवरी को पुराने शहर में छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती की शोभायात्रा पर पथराव हुआ था। इसके बाद पुलिस ने गिरफ्तारियां कीं और 28 फरवरी तक निषेधाज्ञा (धारा 144) लागू कर दी। श्रीरामुलु के अनुसार, यह घटना दर्शाती है कि रूट मैनेजमेंट और इंटेलिजेंस के स्तर पर भारी चूक हुई है, जिसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।
संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग
श्रीरामुलु ने केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत अपने कर्तव्यों का पालन करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी जांच को प्रभावित करना नहीं, बल्कि निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। उन्होंने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्रालय कर्नाटक के गृह विभाग और डीजीपी के साथ एक समीक्षा बैठक बुलाए। इस बैठक में खुफिया तंत्र की विफलताओं और दंगों के मामलों में हो रही कानूनी कार्रवाई का मूल्यांकन किया जा सके।
नए सुरक्षा नियमों का दिया सुझाव
पूर्व मंत्री ने जुलूसों और शोभायात्राओं के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करने का अनुरोध किया। इसमें जुलूस की अनुमति, मार्ग, समय-सीमा और संवेदनशील स्थानों के पास 'नो-गो' बफर जोन बनाने जैसे बिंदु शामिल हों। उन्होंने रीयल-टाइम तनाव नियंत्रण प्रोटोकॉल और शांति समितियों की नियमित बैठकों पर भी जोर दिया है ताकि भविष्य में ऐसी हिंसा को रोका जा सके।
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