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Dharmendra Pradhan: NCERT विवाद पर शिक्षा मंत्री की सफाई, बोले- न्यायपालिका का अपमान करने की कोई मंशा नहीं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Thu, 26 Feb 2026 03:21 PM IST
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सार

Dharmendra Pradhan On NCERT Row: एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका पर विवादित सामग्री को लेकर बढ़े विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का अपमान करने की कोई मंशा नहीं थी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी।

NCERT row Dharmendra Pradhan Education Minister clarification controversy says no intention insult judiciary
धर्मेंद्र प्रधान, शिक्षा मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका से जुड़े कथित विवादित अध्याय को लेकर देश में उठे राजनीतिक और न्यायिक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि जो कुछ हुआ उससे उन्हें गहरा दुख है और सरकार या शिक्षा मंत्रालय की ओर से न्यायपालिका का अपमान करने की कोई मंशा नहीं थी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा और जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी होगी।
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क्या बोले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान?
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार न्यायपालिका का सर्वोच्च सम्मान करती है और किसी भी शैक्षणिक सामग्री के जरिए संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ी सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अध्याय तैयार करने में शामिल लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य जागरूकता फैलाना है, संस्थाओं को बदनाम करना नहीं।
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पूरा विवाद आखिर है क्या?
यह मामला एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब से जुड़ा है, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित एक हिस्सा शामिल किया गया था। इस सामग्री को लेकर वरिष्ठ वकीलों और कई कानूनी विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि स्कूल के छात्रों को इस तरह की सामग्री पढ़ाना न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद इस पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस शुरू हो गई।

शिक्षा मंत्रालय सचिव और एनसीईआरटी निदेशक को नोटिस
मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती जारी है। अदालत ने शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव और एनसीईआरटी निदेशक डॉ. दिनेश प्रसाद सकलानी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ऑल इंडिया बार एसोसिएशन के चेयरमैन और अधिवक्ता आदिश सी अग्रवाल ने कहा कि न्यायपालिका ने सही कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में न्यायपालिका पर भ्रष्टाचार जैसी बातें शामिल करना वरिष्ठ अधिकारियों की बड़ी चूक है।
 

सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा था कि किसी भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने संकेत दिया था कि यह एक सुनियोजित प्रयास भी हो सकता है और जरूरत पड़ने पर कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि न्यायपालिका देश की महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है और उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री पर कानून अपना काम करेगा।

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अब आगे क्या कार्रवाई होगी?
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार पूरे मामले की समीक्षा कर रही है और अदालत के निर्देशों के अनुसार जरूरी बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए पाठ्य सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है और किसी भी तरह की लापरवाही को हल्के में नहीं लिया जाएगा।

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