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West Bengal SIR: कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने अधिकारियों संग की बैठक, सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कलकत्ता
Published by: नवीन पारमुवाल
Updated Thu, 26 Feb 2026 05:03 PM IST
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सार
पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट में सुधार को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने एक अहम बैठक की। इसमें मुख्य सचिव और डीजीपी समेत कई बड़े अधिकारी शामिल हुए। यह बैठक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बुलाई गई थी।
कलकत्ता हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने गुरुवार को अहम बैठक की। इस बैठक में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य में चल रहे मतदाता सूची के सुधार कार्य की समीक्षा करना था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तेज हुई प्रक्रिया
20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल को निर्देश दिया था कि वे कुछ न्यायिक अधिकारियों को SIR कार्य के लिए उपलब्ध कराएं और पूर्व न्यायाधीशों की भी मदद लें। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई थी कि उसने संशोधन कार्य के लिए पर्याप्त संख्या में ग्रेड ‘A’ अधिकारियों को उपलब्ध नहीं कराया। इसके बाद कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से इस काम में मदद के लिए कुछ न्यायिक अधिकारियों और पूर्व जजों को नियुक्त करने को कहा था।
इस अहम बैठक में चीफ जस्टिस के साथ पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) भी मौजूद थे। एक हफ्ते के अंदर इस मामले पर यह तीसरी बैठक थी। बैठक का मुख्य उद्देश्य उस प्रक्रिया का जायजा लेना था, जिसमें अब न्यायिक अधिकारियों को भी लगाया गया है।
क्यों हटाए जा रहे हैं नाम
सूत्रों के अनुसार, न्यायिक अधिकारी उन दावों और आपत्तियों पर फैसला कर रहे हैं, जिनके नाम 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' यानी तार्किक गड़बड़ी वाली लिस्ट में हैं। इन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने का खतरा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार यह पूरी कार्रवाई की जा रही है।
'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' का मतलब 2002 की वोटर लिस्ट से मिलान में मिली खामियां हैं। जैसे, किसी वोटर के माता-पिता के नाम में अंतर होना। इसके अलावा, वोटर और उनके माता-पिता की उम्र में 15 साल से कम या 50 साल से ज्यादा का अंतर होना भी इसमें शामिल है।
यह भी पढ़ें: West Bengal SIR: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से कहा- ओडिशा और झारखंड के अफसर भी कर सकते हैं तैनात; EC देगा खर्च
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तेज हुई प्रक्रिया
20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल को निर्देश दिया था कि वे कुछ न्यायिक अधिकारियों को SIR कार्य के लिए उपलब्ध कराएं और पूर्व न्यायाधीशों की भी मदद लें। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई थी कि उसने संशोधन कार्य के लिए पर्याप्त संख्या में ग्रेड ‘A’ अधिकारियों को उपलब्ध नहीं कराया। इसके बाद कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से इस काम में मदद के लिए कुछ न्यायिक अधिकारियों और पूर्व जजों को नियुक्त करने को कहा था।
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इस अहम बैठक में चीफ जस्टिस के साथ पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) भी मौजूद थे। एक हफ्ते के अंदर इस मामले पर यह तीसरी बैठक थी। बैठक का मुख्य उद्देश्य उस प्रक्रिया का जायजा लेना था, जिसमें अब न्यायिक अधिकारियों को भी लगाया गया है।
क्यों हटाए जा रहे हैं नाम
सूत्रों के अनुसार, न्यायिक अधिकारी उन दावों और आपत्तियों पर फैसला कर रहे हैं, जिनके नाम 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' यानी तार्किक गड़बड़ी वाली लिस्ट में हैं। इन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने का खतरा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार यह पूरी कार्रवाई की जा रही है।
'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' का मतलब 2002 की वोटर लिस्ट से मिलान में मिली खामियां हैं। जैसे, किसी वोटर के माता-पिता के नाम में अंतर होना। इसके अलावा, वोटर और उनके माता-पिता की उम्र में 15 साल से कम या 50 साल से ज्यादा का अंतर होना भी इसमें शामिल है।
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