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Khabaron Ke Khiladi: मिशन असम पर प्रियंका, विश्लेषकों ने बताया विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इससे कितना फायदा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Sat, 21 Feb 2026 05:10 PM IST
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सार

असम समेत पांच राज्यों के चुनाव से पहले प्रियंका गांधी के दौरे से सियासत तेज है। कांग्रेस वापसी की कोशिश में है, लेकिन आंतरिक चुनौतियां, गठबंधन समीकरण और हिमंता सरकार की रणनीति उसके सामने बड़ी परीक्षा हैं।

Khabaron Ke Khiladi Priyanka on Mission Assam how much Congress will benefit from this in elections
खबरों के खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

इस साल पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इन राज्यों में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और असम शामिल हैं। असम में बीते हफ्ते प्रियंका गांधी का दौरा चर्चा में रहा। गृह मंत्री अमित शाह भी यहां पहुंचे और सत्तापक्ष की रणनीति को बेहतर करने की कोशिश की। प्रियंका के जरिए कांग्रेस क्या हासिल करना चाह रही है? प्रियंका का असम में कितना असर होगा? इसी तरह के सवालों पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई।  चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार पीयूष पंत, राकेश शुक्ल, पूर्णिमा त्रिपाठी, अवधेश कुमार और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।  
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पीयूष पंत: पूर्वोत्तर में स्थानीय पार्टियां ज्यादा मजबूत हैं। क्योंकि वो स्थानीय मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित करती है। इसीलिए भले वहां भाजपा ने अपनी सरकार बनाई है, लेकिन उसे स्थानीय पार्टियों के सहयोग की जरूरत पड़ती है। असम की जहां तक बात है तो कांग्रेस यहां मजबूत स्थिति में रही है, लेकिन वो वहां धीरे-धीरे कमजोर हुई है। कांग्रेस फिर से अपनी वापसी की कोशिश में लगी है। इसीलिए प्रियंका गांधी वहां भेजी गई हैं। कांग्रेस को सत्ता विरोधी लहर से उम्मीद है। हालांकि, कांग्रेस के लिए वहां कई मुश्किलें भी हैं। परिसीमन से लेकर पार्टी के आंतरिक स्थिति तक कांग्रेस की कई चुनौतियां हैं। इन सभी चीजों से पार पाने के लिए प्रियंका गांधी को वहां भेजा गया है। 

राकेश शुक्ल: हिमंता ने वहां एक बड़ी लकीर खिंच दी है। दूसरी तरफ कांग्रेस में भगदड़ है। भूपेन बोरा अगर नाराज थे, राहुल गांधी से बातचीत के बाद उनका भाजपा में जाने की बात कहना बड़ा संदेश देता है। कांग्रेस इस बार बदरुद्दीन अजमल के साथ गठबंधन नहीं कर रही है। ओवैसी भी वहां नजर गढ़ाए हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए चुनौतियां बहुत हैं। प्रियंका कांग्रेस में एक अच्छी नेता हैं, उस नेता के तौर पर वो कितने वोट जोड़ पाएंगी ये देखने वाली बात होगी। 

अवधेश कुमार: प्रियंका कहीं भी जाएंगी, कांग्रेस में नीति, रणनीति राहुल के हिसाब से चलेगी। प्रियंका के बारे में कहा जाता है कि वो राहुल गांधी से ज्यादा मिलनसार हैं, लेकिन वो परिणाम में कितना बदलता है, पहले भी देखा जा चुका है। हिमंता बिस्वा सरमा ने पूर्वोत्तर के लगभग सभी राज्यों में कांग्रेस के नेताओं को भाजपा में लाए हैं। दोनों को देखेंगे तो दोनों गठबंधनों में पिछली बार महज 2 फीसदी के आसपास का अंतर था, लेकिन सीटों का अंतर काफी ज्यादा हो गया था। इस बार कांग्रेस और आईयूएमएल अलग-अलग लड़ेंगी तो वोटों का बिखराव का फायदा सत्ता पक्ष को हो सकता है। 

पूर्णिमा त्रिपाठी: कांग्रेस असम में वापसी की संभावना तलाश रही है। प्रियंका वह हिमंता के कम्युनल एजेंडा को काउंटर करने की कोशिश कर रही हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि प्रियंका उस डिवाइड को कुछ कम करेंगी, ऐसा होता है तो कांग्रेस को इससे फायदा होने की उम्मीद है। प्रियंका को स्क्रीनिंग कमेटी का सदस्य बनाया गया है। सही कैंडिडेट चुने जाएं इसलिए प्रियंका को वहां भेजा गया है। प्रियंका के साथ इमरान मसूद को भेजा गया है। इससे यह कोशिश है कि जो मुस्लिम अजमल या ओवैसी की पार्टी के साथ जाने की सोच रहा है उसे रोका जा सके। 

अनुराग वर्मा: वापसी की गुंजाइश तलाशना हर राजनीतिक दल का अधिकार है। राजनीतिक दृष्टिकोण से जो राज्य भारत में ज्यादा अहम है उन सभी राज्यों से कांग्रेस साफ हो चुकी है। असम में कांग्रेस को लग रहा है कि वो कुछ कर सकते हैं। नार्थ ईस्ट में डेमोग्राफी काफी बदल चुकी है। कांग्रेस को इस वक्त वहां एक स्कोप दिख रहा है।
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