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MHA: वामपंथ उग्रवाद से प्रभावित रहे नौ राज्य के 38 जिलों में नहीं बदलेंगे नियम; गृह मंत्रालय की ताजा सूची जारी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sun, 09 Aug 2026 12:35 PM IST
सार

गृह मंत्रालय की ताजा समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि देश अब वामपंथ उग्रवाद की समस्या से मुक्त हो चुका है और कोई भी जिला उग्रवाद प्रभावित या चिंताजनक श्रेणी में नहीं है। गृह मंत्रालय की ताजा समीक्षा के अनुसार, नक्सलवाद को दोबारा पनपने से रोकने और विकास को रफ्तार देने के लिए नौ राज्यों के 38 जिलों को 'विरासत एवं प्रबल' श्रेणी में रखा गया है, जहां सुरक्षा और विकासात्मक उपाय जारी रहेंगे।

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Left Wing Extremism Naxalism LWE Affected Districts Ministry of Home Affairs report Naxal-Free India
केंद्रीय गृह मंत्रालय - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सुरक्षा-संबंधी व्यय (एसआरई) योजना के तहत देश में वामपंथ उग्रवाद की मौजूदा स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई है। अब नौ प्रदेशों के 38 जिलों को 'विरासत एवं प्रबल' ('लीगेसी एंड थ्रस्ट') श्रेणी में रखा गया है। मतलब, इन जिलों में सुरक्षा उपायों के साथ विकास पर भी खास ध्यान दिया जाएगा। वामपंथ उग्रवाद को दोबारा पनपने से रोकने के लिए और मौजूदा स्थिति को ज्यादा मजबूत बनाने के मकसद से 'विरासत एवं प्रबल' श्रेणी वाले जिलों में कुछ समय तक सुरक्षा संबंधी उपाय जारी रहेंगे। 
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देश वामपंथ उग्रवाद की समस्या से मुक्त
वामपंथी उग्रवाद की समस्या का पूर्ण समाधान, इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 'राष्ट्रीय नीति एवं कार्य योजना 2015' का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसमें सुरक्षा उपायों के साथ-साथ वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में विकास पर गौर करना था। स्थानीय लोगों के अधिकारों के संरक्षण पर जोर दिया गया। उन लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे पहुंचे, इस पर भी गृह मंत्रालय का खास फोकस रहा। गृह मंत्रालय की ताजा समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि इस नीति के परिणामस्वरूप, देश वामपंथ उग्रवाद की समस्या से मुक्त हो चुका है। 
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मार्च अप्रैल की समीक्षा रिपोर्ट का नतीजा
गृह मंत्रालय ने मार्च/अप्रैल में एलडब्लूई से प्रभावित रहे जिलों की व्यापक समीक्षा की थी। इसमें वामपंथी हिंसा की तीव्रता, सशस्त्र काडरों की उपस्थिति और उनकी हिंसात्मक क्षमता, नक्सलवाद से जुड़े संगठनों की वर्तमान स्थिति तथा 'मुक्त क्षेत्रों' की उपस्थिति जैसे प्रमुख मानकों का समग्र मूल्याकंन किया गया। समीक्षा के बाद सामने आया कि अब कोई भी जिला वामपंथ उग्रवाद से प्रभावित नहीं है। अपेक्षित विकास से वंचित कुछ जिलों में सुरक्षा एवं विकासात्मक उपायों को बनाए रखना आवश्यक है। एसआरई योजना के तहत 38 वामपंथ उग्रवाद से मुक्त जिलों को दो श्रेणियों में बांटा गया। 'विरासत एवं प्रबल' श्रेणी में 37 जिले और 'चिंताजनक जिला', इस श्रेणी में झारखंड के सिंहभूम जिले को शामिल किया गया। 


'विरासत एवं प्रबल' जिलों की सूची 
  • पश्चिम बंगाल: 1 - झारग्राम 
  • आंध्र प्रदेश: 1  - अल्लूरी सीतारामराजू 
  • मध्य प्रदेश: 2 - बालाघाट, मंडला 
  • महाराष्ट्र: 2 - गढ़चिरोली, गोंदिया 
  • तेलंगाना: 2 - भद्रादी-कोठागुडेम, मुलुगु 
  • बिहार: 4 - औरंगाबाद, गया, जमुई और लखीसराय 
  • झारखंड: 4 - पश्चिमी सिंहभूम, बोकारो, छतरा, लातेहार 
  • ओडिशा: 9  - बौध, सुन्दरगढ़ (राऊरकेला पुलिस जिला), कालाहांडी, कोरापुट, मलकानगिरी, नबरंगपुर, नुआपाड़ा, रायगड़ा, कंधमाल 
  • छत्तीसगढ़: 13 - बस्तर, बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर, धमतरी, कबीरधाम, कोंडागांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजानंदगांव, मौहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, गरियाबंद, सुकमा, दांतेवाड़ा
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अब 'विरासत एवं प्रबल' श्रेणी में शामिल 'सिंहभूम'   
इसी सप्ताह जारी समीक्षा रिपोर्ट में झारखंड के सिंहभूम जिले को  'चिंताजनक जिला', इस श्रेणी से बाहर निकाल दिया गया है। अब इस जिले को अपग्रेड कर 'विरासत एवं प्रबल' श्रेणी में शामिल कर दिया है। इसके बाद देश में एलडब्लूई प्रभावित जिलों की संख्या शून्य है। 'चिंताजनक जिला' इस श्रेणी में भी अब कोई क्षेत्र शामिल नहीं है। 'विरासत एवं प्रबल' जिलों की संख्या अब 38 हो गई है।
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