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'लोन वुल्फ तुम पर झपटेंगे': महाराष्ट्र एटीएस की चार्जशीट में खुलासा, आरोपी जैब अंसारी के घर से मिला था पर्चा
सार
महाराष्ट्र एटीएस की करीब 2,500 पन्नों की चार्जशीट के मुताबिक, मीरा रोड में दो सुरक्षा गार्डों पर चाकू से हमला करने वाला जैब अंसारी इंटरनेट पर कट्टरपंथी धर्म प्रचारकों के वीडियो देखकर स्व-कट्टरपंथी हुआ। तलाक, आर्थिक परेशानी, मकान खाली करने का दबाव और फलस्तीन में बच्चों की मौत की खबरों से वह मानसिक रूप से परेशान था। जांच में किसी बाहरी हैंडलर या संगठन की भूमिका का सबूत नहीं मिला।
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जैब जुबैर अंसारी का घर
- फोटो : PTI
विस्तार
दो सुरक्षा गार्डों से उनका धर्म पूछकर कुछ महीने पहले मीरा रोड में उन पर चाकू से हमला करने का आरोपी जैब अंसारी इंटरनेट पर उग्रवादी धर्म प्रचारकों के वीडियो देखकर कट्टरपंथ की तरफ बढ़ा था। महाराष्ट्र एटीएस ने मुंबई की अदालत में करीब 2,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट के मुताबिक, हाल ही में हुआ तलाक, मकान मालिक की ओर से किराए का घर खाली करने का दबाव और खाने-पीने से जुड़ी उसकी कुछ अजीब आदतों ने अमेरिका से लौटे अंसारी को गहरी निराशा में धकेल दिया था। इसके बाद उसने मीरा रोड स्थित अपने घर के पास अकेले ही हमले की साजिश रची और उसे अंजाम दिया। 27 अप्रैल को उसने दो सुरक्षा गार्डों से पहले उनका धर्म पूछा और फिर उन पर चाकू से हमला कर दिया। हमले में दोनों गार्ड घायल हुए थे और इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।
एटीएस ने 31 साल के जैब अंसारी के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून ( यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें 6 महीने में चार्जशीट दायर करने का प्रावधान है। वह इन दिनों जेल में बंद है। एटीएस की चार्जशीट में दावा किया गया है कि जब अंसारी के घर की सघन तलाशी ली गई, तो वहां से एक संदिग्ध पर्चा बरामद हुआ। इस पर लिखा था, 'लोन वुल्फ तुम पर झपटेंगे।'... पर्चा मिलने के बाद जांच टीम ने शुरुआत में इस बात की पड़ताल की कि कहीं कोई बाहरी व्यक्ति या हैंडलर अंसारी को दिशा-निर्देश तो नहीं दे रहा था या उसे उकसा तो नहीं रहा था। हालांकि, एटीएस के मुताबिक लंबी जांच के दौरान ऐसा कोई सबूत नहीं मिला। एटीएस के मुताबिक, आरोपी से पूछताछ और जुटाए गए टेक्निकल तथा फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर किसी बाहरी व्यक्ति, मददगार या संगठन के शामिल होने की बात सामने नहीं आई।
एटीएस के मुताबिक, जैब अंसारी मानसिक रूप से काफी परेशान चल रहा था। सोशल मीडिया पर अनवर अल-अवलाकी जैसे कट्टरपंथी धर्म प्रचारकों के वीडियो लगातार देखने की वजह से वह खुद ही कट्टरपंथ की ओर बढ़ गया। अल-अवलाकी यमन मूल का अमेरिकी मुस्लिम उपदेशक था और उसका नाम कई बड़े आतंकी मामलों से जोड़ा गया था। एटीएस की चार्जशीट में यह भी बताया है कि फलस्तीन में बच्चों की मौत की खबरों से अंसारी काफी आहत और गुस्से में था।
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जांच के मुताबिक, जैब अंसारी साल 2019 में अमेरिका से भारत लौटा था। अमेरिका में रहते हुए वह छात्रों को टेनिस की कोचिंग देकर कमाई करता था। भारत लौटने के बाद उसके पास कमाई का कोई पक्का जरिया नहीं था। पत्नी से तलाक के बाद वह मानसिक रूप से परेशान हो गया और अकेले रहने लगा। जिस किराए के मकान में वह रह रहा था, उसकी मकान मालिक ने भी उससे घर खाली करने को कहा था। बताया जाता है कि वह कुंवारों को अपना मकान किराए पर नहीं देना चाहती थी। एटीएस के मुताबिक, इन निजी और पारिवारिक परेशानियों के साथ फलस्तीन के हालात ने उसे इंटरनेट पर मौजूद चरमपंथी सामग्री की तरफ धकेला। जांच एजेंसी का दावा है कि छह से आठ महीने के भीतर वह स्व-कट्टरपंथी हो गया।
अंसारी के परिवार के ज्यादातर सदस्य अमेरिका में रहते हैं। एटीएस ने उसकी मां का बयान दर्ज किया है, जो उससे मिलने भारत आई थीं। इसके अलावा कुर्ला में रहने वाले उसके चाचा का बयान भी दर्ज किया गया है। भारत आने के शुरुआती दिनों में अंसारी उनके साथ ही रहा था। दूसरी तरफ, अदालत में सुनवाई के दौरान अंसारी के वकील ने दावा किया था कि उनका मुवक्किल स्किजोफ्रेनिया नाम की गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित है और पहले उसकी नियमित दवाइयां भी चल रही थीं। वकील ने अदालत को यह भी बताया था कि अंसारी सिर्फ वही शाकाहारी खाना खाता है, जिसे वह खुद बनाता है। वह किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ का बना खाना नहीं खाता था। यहां तक कि रिश्तेदारों के घर या पारिवारिक कार्यक्रम में भी वह बाहर का खाना नहीं खाता था। पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद शुरुआती दिनों में जांच टीम को भी उसकी इस आदत के कारण खाने की व्यवस्था करने में परेशानी हुई थी।
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एटीएस ने 31 साल के जैब अंसारी के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून ( यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें 6 महीने में चार्जशीट दायर करने का प्रावधान है। वह इन दिनों जेल में बंद है। एटीएस की चार्जशीट में दावा किया गया है कि जब अंसारी के घर की सघन तलाशी ली गई, तो वहां से एक संदिग्ध पर्चा बरामद हुआ। इस पर लिखा था, 'लोन वुल्फ तुम पर झपटेंगे।'... पर्चा मिलने के बाद जांच टीम ने शुरुआत में इस बात की पड़ताल की कि कहीं कोई बाहरी व्यक्ति या हैंडलर अंसारी को दिशा-निर्देश तो नहीं दे रहा था या उसे उकसा तो नहीं रहा था। हालांकि, एटीएस के मुताबिक लंबी जांच के दौरान ऐसा कोई सबूत नहीं मिला। एटीएस के मुताबिक, आरोपी से पूछताछ और जुटाए गए टेक्निकल तथा फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर किसी बाहरी व्यक्ति, मददगार या संगठन के शामिल होने की बात सामने नहीं आई।
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एटीएस के मुताबिक, जैब अंसारी मानसिक रूप से काफी परेशान चल रहा था। सोशल मीडिया पर अनवर अल-अवलाकी जैसे कट्टरपंथी धर्म प्रचारकों के वीडियो लगातार देखने की वजह से वह खुद ही कट्टरपंथ की ओर बढ़ गया। अल-अवलाकी यमन मूल का अमेरिकी मुस्लिम उपदेशक था और उसका नाम कई बड़े आतंकी मामलों से जोड़ा गया था। एटीएस की चार्जशीट में यह भी बताया है कि फलस्तीन में बच्चों की मौत की खबरों से अंसारी काफी आहत और गुस्से में था।
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जांच के मुताबिक, जैब अंसारी साल 2019 में अमेरिका से भारत लौटा था। अमेरिका में रहते हुए वह छात्रों को टेनिस की कोचिंग देकर कमाई करता था। भारत लौटने के बाद उसके पास कमाई का कोई पक्का जरिया नहीं था। पत्नी से तलाक के बाद वह मानसिक रूप से परेशान हो गया और अकेले रहने लगा। जिस किराए के मकान में वह रह रहा था, उसकी मकान मालिक ने भी उससे घर खाली करने को कहा था। बताया जाता है कि वह कुंवारों को अपना मकान किराए पर नहीं देना चाहती थी। एटीएस के मुताबिक, इन निजी और पारिवारिक परेशानियों के साथ फलस्तीन के हालात ने उसे इंटरनेट पर मौजूद चरमपंथी सामग्री की तरफ धकेला। जांच एजेंसी का दावा है कि छह से आठ महीने के भीतर वह स्व-कट्टरपंथी हो गया।
अंसारी के परिवार के ज्यादातर सदस्य अमेरिका में रहते हैं। एटीएस ने उसकी मां का बयान दर्ज किया है, जो उससे मिलने भारत आई थीं। इसके अलावा कुर्ला में रहने वाले उसके चाचा का बयान भी दर्ज किया गया है। भारत आने के शुरुआती दिनों में अंसारी उनके साथ ही रहा था। दूसरी तरफ, अदालत में सुनवाई के दौरान अंसारी के वकील ने दावा किया था कि उनका मुवक्किल स्किजोफ्रेनिया नाम की गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित है और पहले उसकी नियमित दवाइयां भी चल रही थीं। वकील ने अदालत को यह भी बताया था कि अंसारी सिर्फ वही शाकाहारी खाना खाता है, जिसे वह खुद बनाता है। वह किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ का बना खाना नहीं खाता था। यहां तक कि रिश्तेदारों के घर या पारिवारिक कार्यक्रम में भी वह बाहर का खाना नहीं खाता था। पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद शुरुआती दिनों में जांच टीम को भी उसकी इस आदत के कारण खाने की व्यवस्था करने में परेशानी हुई थी।