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महाराष्ट्र: ड्राइवरों ने मराठी भाषा जरूरी को हाईकोर्ट में दी चुनौती, कहा- मौलिक अधिकारों का हो रहा उल्लंघन

Tue, 25 Aug 2026 06:18 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई। Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Tue, 25 Aug 2026 06:18 PM IST
सार

मुंबई में चार कैब ड्राइवरों ने ऑटो, टैक्सी और एप-बेस्ड कैब चालकों के लिए मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान अनिवार्य करने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में इसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए नियम पर रोक लगाने की मांग की गई है।

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Maharashtra Drivers challenge mandatory Marathi language  High Court citing violation fundamental rights.
बॉम्बे हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मुंबई में चार कैब ड्राइवरों ने मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार के एक फैसले के खिलाफ याचिका दायर की। इसमें ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और एप-बेस्ड कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान होना जरूरी कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

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याचिका में क्या मांग की गई? 
वकील विवेक शुक्ला के जरिए दायर जनहित याचिका में यह भी कहा गया कि 12 अगस्त का सरकारी नोटिफिकेशन लाखों गरीब और प्रवासी ड्राइवरों की आजीविका के लिए खतरा है। इसके लागू होने पर रोक लगाने की मांग की गई।
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याचिकाकर्ताओं - मोहम्मद कासिम अहमद, मोहम्मद तौसीफ शेख, सियाद अहमद और सादिक नासिर अली खान का दावा है कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 19 (व्यापार और पेशे की आजादी) और 21 (जीवन का अधिकार) के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। वहीं, मोटर वाहन अधिनियम के भी खिलाफ है, जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस के लिए किसी भाषा की शर्त नहीं रखी गई है।
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याचिका में क्या कहा? 
इस याचिका पर गुरुवार को तत्काल राहत के लिए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के सामने सुनवाई होने की संभावना है। याचिका में कहा गया, 'मोटर वाहन अधिनियम राज्य सरकार को ड्राइवर के लिए किसी भाषा का कामकाजी ज्ञान योग्यता के तौर पर बैज की शर्त के तौर पर या परमिट की शर्त के तौर पर तय करने की कोई शक्ति नहीं देता है। इसके साथ ही न ही ऐसी किसी वजह से बैज को सस्पेंड या रद्द करने की शक्ति देता है।'

इसमें यह भी कहा गया कि नियम लागू होने से लाखों गरीब और प्रवासी ड्राइवरों (जिनमें वे खुद भी शामिल हैं) के बैज सस्पेंड होने और परमिट रद्द होने का खतरा है, जिससे उनकी आजीविका पर असर पड़ेगा। याचिका में हाई कोर्ट से इस फैसले को लागू करने पर रोक लगाने की मांग की गई।

क्या है पूरा मामला? 
महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने 20 अगस्त से पूरे राज्य में एक अभियान शुरू किया है ताकि गैर-मराठी टैक्सी और ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों की मराठी भाषा की जानकारी की जांच की जा सके। कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ द्वारा चलाए गए 105 दिनों के 'हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा अभियान' में 1,65,601 गैर-मराठी भाषी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों ने कामकाजी मराठी सीखने के लिए हिस्सा लिया।

पिछले हफ्ते, राज्य के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर प्रताप सरनाइक ने कहा था कि महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चलाने के लिए मराठी भाषा की व्यावहारिक जानकारी की जरूरत 1989 से ही थी, लेकिन इसे सख्ती से लागू नहीं किया गया था।


लोगों में किस बात की डर? 
हालांकि, राज्य सरकार के मराठी भाषा की जानकारी से जुड़े अभियान के तहत भारी जुर्माने की अफवाहों के कारण ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों में काफी डर फैल गया। इसके चलते सोमवार को मुंबई के कुछ हिस्सों में सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन हुए, जिससे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को दखल देना पड़ा और लोगों की घबराहट को दूर करना पड़ा।

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