महाराष्ट्र में फिर दल-बदल: आदित्य ठाकरे के करीबी ने थामा शिंदे का दामन, क्या उद्धव खेमे को और झटके लगेंगे?
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा झटका देते हुए आदित्य ठाकरे के करीबी सचिन अहीर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं। अहीर ने विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए महायुति उम्मीदवार के रूप में नामांकन भी दाखिल किया। शिंदे गुट में कोई 'ऑपरेशन टाइगर-3' की शुरुआत बता रहा तो कोई 'ऑपरेशन इमरजेंसी' बता रहा है। शिंदे कैंप के कई नेताओं ने ये भी दावा किया कि उद्धव खेमे के कई और नेता भी जल्द पार्टी छोड़ सकते हैं।
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महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे को एक और बड़ा झटका लगा है। आदित्य ठाकरे के करीबी और मुंबई की राजनीति में प्रभावशाली नेता माने जाने वाले सचिन अहीर ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है। अहीर ने शिंदे गुट में शामिल होने के तुरंत बाद महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए महायुति उम्मीदवार के तौर पर नामांकन भी दाखिल कर दिया। इस घटनाक्रम को महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर-3' के तौर पर देखा जा रहा है।
सचिन अहीर का शिंदे गुट में जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उन्हें आदित्य ठाकरे का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता रहा है। हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के नौ में से छह सांसद शिंदे गुट में शामिल हुए थे। अब अहीर के पाला बदलने से उद्धव ठाकरे की संगठनात्मक ताकत और रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। शिंदे गुट का दावा है कि आने वाले दिनों में उद्धव खेमे के कई और विधायक भी पार्टी छोड़ सकते हैं।
आदित्य ठाकरे के 'दांया हाथ' क्यों माने जाते थे सचिन अहीर?
सचिन अहीर सिर्फ शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता ही नहीं थे, बल्कि मुंबई, खासकर वर्ली क्षेत्र में आदित्य ठाकरे की राजनीति के प्रमुख रणनीतिकार माने जाते थे। वर्ष 2019 में जब आदित्य ठाकरे ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था, तब अहीर को वर्ली की पूरी चुनावी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उस समय अहीर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी छोड़कर शिवसेना में शामिल हुए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अहीर के जाने से वर्ली में आदित्य ठाकरे की राजनीतिक पकड़ पर असर पड़ सकता है।
क्या है 'ऑपरेशन टाइगर-3' और क्यों बढ़ी उद्धव की चिंता?
शिंदे गुट के नेताओं ने सचिन अहीर के शामिल होने को 'ऑपरेशन टाइगर-3' की शुरुआत बताया है। शिंदे गुट के विधायक महेंद्र दालवी ने दावा किया कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में उद्धव खेमे के कई विधायक भी शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। इससे पहले उद्धव ठाकरे लगातार दावा कर रहे थे कि उनका संगठन मजबूत हो रहा है, लेकिन हालिया घटनाक्रमों ने उनकी रणनीति को झटका दिया है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने इसे ऑपरेशन इमरजेंसी करार देते हुए कहा कि सचिन अहिर जैसे मेहनती नेता का शिंदे गुट में आना पार्टी को और मजबूत करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर विपक्षी दलों के नेता खुद आना चाहते हैं, तो उन्हें रोका नहीं जा सकता।
#WATCH | Mumbai | On Shiv Sena UBT MLC Sachin Ahir joining the Shinde Shiv Sena faction, State Minister Sanjay Shirsat says, "...Today, Sachin Ahir’s name was put forward for the post of Deputy Speaker in the Legislative Council...He has joined the Shinde Shiv Sena faction..." pic.twitter.com/SO21uHjTKm
— ANI (@ANI) June 30, 2026
शिंदे ने अपने नेताओं को छोड़ अहीर को ही क्यों चुना?
- महायुति के भीतर विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए नीलम गोरहे और कृपाल तुमाने जैसे नेताओं के नाम चर्चा में थे। इसके बावजूद एकनाथ शिंदे ने अपनी पार्टी के नेताओं को पीछे रखते हुए सचिन अहीर को उम्मीदवार बनाया। इसे शिंदे का बड़ा राजनीतिक दांव माना जा रहा है।
- माना जा रहा है कि अहीर को अहम पद देकर शिंदे ने एक तरफ उद्धव ठाकरे को बड़ा संदेश दिया है, वहीं दूसरी ओर मुंबई में अपनी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश की है। अहीर का राजनीतिक सफर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, शिवसेना (यूबीटी) और अब शिंदे की शिवसेना तक पहुंच चुका है।
क्या महाराष्ट्र में बदल रहे हैं नए राजनीतिक समीकरण?
सचिन अहीर के पाला बदलने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बनने की अटकलें तेज हो गई हैं। शिवसेना (यूबीटी) के सहयोगी दलों ने भी इस घटनाक्रम पर हैरानी जताई है। पार्टी नेता अमीन पटेल ने कहा कि कुछ दिन पहले ही वह महाविकास आघाड़ी की बैठक में सचिन अहीर के साथ बैठे थे और उन्हें इस फैसले की कोई भनक नहीं थी।