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Ordnance Factory Board: आयुद्य कारखानों के 62000 कर्मियों की बड़ी जीत, रिटायरमेंट तक जारी रहेगी डीम्ड डेपुटेशन

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 16 Jun 2026 06:18 PM IST
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Major victory for 62,000 ordnance factory employees; 'deemed deputation' status to continue until retirement
ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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रक्षा क्षेत्र में पूर्व के 'ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड' (ओएफबी) के तहत आने वाले 'आयुद्य कारखानों' (अब सात कंपनियां) के 62 हजार सिविलियन कर्मचारियों को बड़ी जीत हासिल हुई है। भारत सरकार ने पूर्व के 'ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड' (ओएफबी) के उन कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट तक 'डीम्ड डेपुटेशन' जारी रखने को मंजूरी दे दी है, जो सात नई बनी डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स में शामिल होने का विकल्प नहीं चुनते हैं। इस फैसले को 'एम्पावर्ड ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स' ने गत सप्ताह मंजूरी दी है। 



अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार ने बताया, आयुध कारखानों के रक्षा असैन्य कर्मचारी, लंबे समय से यह मांग कर रहे थे। कर्मियों की मांग थी कि उन्हें नवगठित रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) में शामिल नहीं होना है। इसके बावजूद उन्हें डीपीएसयू में जबरन प्रतिनियुक्ति पर रखा जा रहा है। रक्षा असैन्य कर्मचारी संगठनों का कहना था कि इस बाबत सरकार एक अधिसूचना जारी करे, जिससे कर्मचारियों को नए निगमों में केंद्र सरकार के कर्मचारी के रूप में बने रहने की अनुमति मिल सके। रक्षा मंत्रालय के 'डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन' द्वारा 15 जून को जारी एक ऑफ़िस मेमोरेंडम के अब यह जानकारी दी गई है। इस कदम से पुरानी ओएफबी के लगभग 62,000 कर्मचारियों को लंबे समय से प्रतीक्षित स्पष्टता और राहत मिली है। ये कर्मचारी, एक अक्टूबर, 2021 से 41 ऑर्डनेंस फ़ैक्ट्रियों को सात डीपीएसयू में कॉर्पोरेटाइज़ किए जाने के बाद से 'डीम्ड डेपुटेशन' पर काम कर रहे हैं।
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कॉमन 'एब्ज़ॉर्प्शन पैकेज' दिया जाएगा 
मंत्रालय के आदेश के अनुसार, पुरानी ओएफबी के सभी योग्य कर्मचारियों को सात डीपीएसयू द्वारा तैयार किया गया एक कॉमन 'एब्ज़ॉर्प्शन पैकेज' (शामिल होने का पैकेज) ऑफ़र किया जाएगा। हालांकि, कर्मचारियों के पास यह तय करने का अधिकार होगा कि वे नई कॉर्पोरेशन्स में स्थायी रूप से शामिल होना चाहते हैं या नहीं। श्रीकुमार के मुताबिक, अब अहम बात यह है कि जो कर्मचारी शामिल होने (एब्ज़ॉर्प्शन) का विकल्प नहीं चुनते हैं, वे अपने रिटायरमेंट तक डीपीएसयू में 'डीम्ड डेपुटेशन' पर काम करते रहेंगे। इससे कॉर्पोरेशन्स में अनिवार्य रूप से शामिल किए जाने की किसी भी संभावना को पूरी तरह से ख़त्म कर दिया गया है। 
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केंद्र सरकार की सेवा शर्तें लागू रहेंगी 
रक्षा मंत्रालय के ऑफिस मेमोरेंडम में यह भी कहा गया है कि 'डीम्ड डेप्युटेशन' पर रहने वाले कर्मचारी, केंद्र सरकार के कर्मचारियों पर लागू होने वाले सभी मौजूदा नियमों, विनियमों और आदेशों के दायरे में बने रहेंगे। इनमें वेतनमान, भत्ते, छुट्टियां, चिकित्सा सुविधाएं, करियर में तरक्की और सेवा की अन्य सभी शर्तें शामिल हैं। इस फैसले को उन कर्मचारियों के लिए एक बड़ी सुरक्षा के तौर पर देखा जा रहा है, जिन्होंने कॉर्पोरेटाइजेशन के बाद अपनी सेवा की स्थिति और फायदों को बनाए रखने को लेकर चिंता जताई थी।

मौजूदा 'डीम्ड डेप्युटेशन' की अवधि बढ़ाना 
'एब्जॉर्प्शन' (विलय/समावेशन) के विकल्प की प्रक्रिया को पूरा करने में आसानी के लिए, सरकार ने मौजूदा 'डीम्ड डेप्युटेशन' व्यवस्था को 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया है। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों के कॉर्पोरेटाइजेशन को चुनौती देने वाली कानूनी कार्यवाही के दौरान सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों को पूरा करने वाला कदम बताया है। कर्मचारी संघों, खासकर 'ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन' ने लगातार यह मुद्दा उठाया था कि कर्मचारियों को केंद्र सरकार के कर्मचारी का दर्जा छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। सरकार के इस नए आदेश से डिफेंस सिविलियन कर्मचारियों के बीच वर्षों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म होने और कर्मचारियों को स्थिरता मिलने की उम्मीद है। साथ ही इससे नई बनी डीपीएसयू का कामकाज भी सुचारू रूप से चल सकेगा। 

कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक जीत 
सी. श्रीकुमार ने कहा, यह फैसला पहले की ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक जीत है। एआईडीईएफ ने शुरू से ही यह बात कही थी कि किसी भी कर्मचारी को केंद्र सरकार के कर्मचारी का दर्जा छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। सरकार ने उन लोगों के लिए रिटायरमेंट तक 'डीम्ड डेप्युटेशन' की इजाज़त दी है जो एब्जॉर्प्शन (विलय) का विकल्प नहीं चुनते हैं। इस फैसले ने हमारे रुख को सही साबित किया है। हज़ारों डिफेंस सिविलियन कर्मचारियों और उनके परिवारों को लंबे समय से प्रतीक्षित राहत दी है। इसके लिए एआईडीईएफ ने मद्रास हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। अदालत का फैसला कर्मियों के पक्ष में आया था। अब कर्मियों की मांग है कि सरकार मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का आदेश जारी करे। कॉर्पोरेटाइजेशन को वापस लेने की एआईडीईएफ की लड़ाई जारी रहेगी। 

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