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'गश्त के तय तरीकों से हटती है चीनी सेना': सीमा मुद्दे पर भारत की दो टूक; आईटीबीपी डीजी के बयान पर क्या कहा?
Fri, 23 Oct 2026 06:39 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 23 Oct 2026 06:39 PM IST
सार
विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट कहा कि चीनी सेना के गश्त के तय तरीकों का पालन नहीं करने पर भारत-चीन सीमा पर स्थिति बिगड़ती है। आईटीबीपी प्रमुख के सीमा पर आमने-सामने की स्थिति वाले बयान, विदेश मंत्री एस जयशंकर के अजरबैजान दौरे और अन्य मुद्दों पर विदेश मंत्रालय ने क्या कुछ कहा? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शुक्रवार को चीन के साथ सीमा के मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट किया। यह बयान आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के उस कथित बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना (पीएलए) के साथ लगातार आमने-सामने की स्थिति का जिक्र किया था।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी प्रेस ब्रीफिंग में कहा, जहां तक इस मामले की खास जानकारी का सवाल है, मैं आपको रक्षा मंत्रालय से संपर्क करने के लिए कहूंगा। जैसा कि हम पहले भी बता चुके हैं, भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में स्थिति समय-समय पर तब बिगड़ती है, जब चीनी सेनाएं गश्त के तय तरीकों का पालन नहीं करती हैं।
उन्होंने आगे कहा, दोनों देश लंबित मुद्दों को सुलझाने और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गलतफहमी व गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य व्यवस्थाओं का इस्तेमाल जारी रखे हुए हैं। दोनों देश सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए उपयुक्त क्षेत्रों में एलएसी की समझ बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए भी सहमत हुए हैं। मैं इस बात पर भी जोर देना चाहूंगा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के आपसी संबंधों के समग्र विकास के लिए जरूरी है।
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कांग्रेस ने पीएम मोदी से की थी स्पष्टीकरण की मांग
आईटीबीपी के महानिदेशक के कथित बयान को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्टीकरण दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को इस मामले में खुलकर जवाब देना चाहिए।
खरगे ने कई सवाल उठाते हुए कहा, अरुणाचल प्रदेश में पीएलए के साथ लगातार आमने-सामने की स्थिति की आईटीबीपी महानिदेशक की पुष्टि बेहद चिंताजनक है। डोकलाम और गलवान के बाद क्या एक और गंभीर टकराव हो रहा है? अगस्त में ताकसिंग के पास चीनी घुसपैठ की खबरें सामने आई थीं। इसके बावजूद, वाचा-दामाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत के 47 दिन बाद भी टकराव जारी है। बताया जा रहा है कि यह जगह ताकसिंग से केवल 180 किलोमीटर दूर है। क्या भारत की गश्त करने की पहुंच प्रभावित हुई है? अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। देश को अंधेरे में क्यों रखा जा रहा है?
ये भी पढ़ें: राहुल गांधी के समर्थन में उतरे शशि थरूर: पीएम के 'फेल पोडक्ट' वाले बयान पर पलटवार; भाजपा को क्या नसीहत दी?
कांग्रेस अध्यक्ष ने कूटनीतिक मोर्चे पर भी जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मुद्दे पर संसद में बयान देने को कहा। खरगे ने कहा, मोदी और (चीन के राष्ट्रपति) शी जिनपिंग के बीच कम से कम 23 बैठकें और बातचीत होने की खबरें हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भागीदारी के साथ विशेष प्रतिनिधियों के स्तर पर 25 दौर की बातचीत हुई है। कार्यकारी तंत्र और समन्वय परामर्श (डब्ल्यूएमसीसी) की 36 बैठकें हुई हैं। इसके अलावा, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और ब्रिक्स के लगातार शिखर सम्मेलन भी हुए हैं। इन सभी बैठकों और बातचीत से ठोस नतीजे क्या निकले हैं?
उन्होंने पूछा, क्या मई 2020 से पहले भारत को गश्त करने के जो अधिकार हासिल थे, वे पूरी तरह बहाल कर दिए गए हैं? हमें अपने सशस्त्र बलों पर पूरा भरोसा है। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में जवाबदेही जरूरी है, न कि कूटनीतिक तस्वीरें खिंचवाने और गले मिलने की कूटनीति! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विपक्ष पर हमला करने के बजाय संसद और देश को विश्वास में लेना चाहिए।
इस साल 25 अगस्त को भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की बातचीत का 25वां दौर बीजिंग में हुआ था। दोनों देशों ने इस बात को दोहराया कि वे अपने-अपने नेताओं से मिले दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे। उन्होंने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा आपसी संबंधों के स्वस्थ और लगातार विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाने की प्रतिबद्धता भी जताई।
जयशंकर की अजरबैजान यात्रा पर क्या कहा?
विदेश मंत्री एस जयशंकर की अजरबैजान यात्रा पर जायसवाल ने कहा, जैसा कि आप सभी जानते हैं, हमारे विदेश मंत्री बाकू दौरे पर हैं। वह इस समय वहीं हैं। हमारे प्रधानमंत्री ने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान अजरबैजान के राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। विदेश मंत्री की यह यात्रा उसी बैठक के बाद हो रही है।
उन्होंने कहा कि आज विदेश मंत्री ने बाकू में अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों के विभिन्न पहलुओं को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। जयशंकर ने राष्ट्रपति अलीयेव को भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की ओर से शुभकामनाएं भी दीं।
जायसवाल ने आगे कहा, विदेश मंत्री ने अजरबैजान के अपने समकक्ष और विदेश मंत्री के साथ विस्तार से बातचीत की। यह बातचीत उपयोगी रही। दोनों पक्षों ने आपसी संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। वे राजनीतिक विचार-विमर्श बढ़ाने और एक-दूसरे के यहां प्रतिनिधिमंडल भेजने पर सहमत हुए। इसमें व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने आर्थिक साझेदारी, आर्थिक सहयोग, व्यापार और निवेश, संपर्क व्यवस्था तथा ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की। जायसवाल ने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक समझ है। यह आपसी संबंधों को और मजबूत करने का अच्छा आधार प्रदान करती है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने अजरबैजान में भारतीय छात्रों की मेजबानी करने के लिए अपने समकक्ष को धन्यवाद दिया। उन्होंने कुछ महीने पहले ईरान से अजरबैजान के रास्ते भारतीय छात्रों को निकालने में सहयोग देने के लिए अजरबैजान सरकार का भी आभार जताया।
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विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी प्रेस ब्रीफिंग में कहा, जहां तक इस मामले की खास जानकारी का सवाल है, मैं आपको रक्षा मंत्रालय से संपर्क करने के लिए कहूंगा। जैसा कि हम पहले भी बता चुके हैं, भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में स्थिति समय-समय पर तब बिगड़ती है, जब चीनी सेनाएं गश्त के तय तरीकों का पालन नहीं करती हैं।
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उन्होंने आगे कहा, दोनों देश लंबित मुद्दों को सुलझाने और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गलतफहमी व गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य व्यवस्थाओं का इस्तेमाल जारी रखे हुए हैं। दोनों देश सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए उपयुक्त क्षेत्रों में एलएसी की समझ बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए भी सहमत हुए हैं। मैं इस बात पर भी जोर देना चाहूंगा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के आपसी संबंधों के समग्र विकास के लिए जरूरी है।
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कांग्रेस ने पीएम मोदी से की थी स्पष्टीकरण की मांग
आईटीबीपी के महानिदेशक के कथित बयान को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्टीकरण दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को इस मामले में खुलकर जवाब देना चाहिए।
खरगे ने कई सवाल उठाते हुए कहा, अरुणाचल प्रदेश में पीएलए के साथ लगातार आमने-सामने की स्थिति की आईटीबीपी महानिदेशक की पुष्टि बेहद चिंताजनक है। डोकलाम और गलवान के बाद क्या एक और गंभीर टकराव हो रहा है? अगस्त में ताकसिंग के पास चीनी घुसपैठ की खबरें सामने आई थीं। इसके बावजूद, वाचा-दामाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत के 47 दिन बाद भी टकराव जारी है। बताया जा रहा है कि यह जगह ताकसिंग से केवल 180 किलोमीटर दूर है। क्या भारत की गश्त करने की पहुंच प्रभावित हुई है? अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। देश को अंधेरे में क्यों रखा जा रहा है?
ये भी पढ़ें: राहुल गांधी के समर्थन में उतरे शशि थरूर: पीएम के 'फेल पोडक्ट' वाले बयान पर पलटवार; भाजपा को क्या नसीहत दी?
कांग्रेस अध्यक्ष ने कूटनीतिक मोर्चे पर भी जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मुद्दे पर संसद में बयान देने को कहा। खरगे ने कहा, मोदी और (चीन के राष्ट्रपति) शी जिनपिंग के बीच कम से कम 23 बैठकें और बातचीत होने की खबरें हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भागीदारी के साथ विशेष प्रतिनिधियों के स्तर पर 25 दौर की बातचीत हुई है। कार्यकारी तंत्र और समन्वय परामर्श (डब्ल्यूएमसीसी) की 36 बैठकें हुई हैं। इसके अलावा, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और ब्रिक्स के लगातार शिखर सम्मेलन भी हुए हैं। इन सभी बैठकों और बातचीत से ठोस नतीजे क्या निकले हैं?
उन्होंने पूछा, क्या मई 2020 से पहले भारत को गश्त करने के जो अधिकार हासिल थे, वे पूरी तरह बहाल कर दिए गए हैं? हमें अपने सशस्त्र बलों पर पूरा भरोसा है। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में जवाबदेही जरूरी है, न कि कूटनीतिक तस्वीरें खिंचवाने और गले मिलने की कूटनीति! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विपक्ष पर हमला करने के बजाय संसद और देश को विश्वास में लेना चाहिए।
इस साल 25 अगस्त को भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की बातचीत का 25वां दौर बीजिंग में हुआ था। दोनों देशों ने इस बात को दोहराया कि वे अपने-अपने नेताओं से मिले दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे। उन्होंने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा आपसी संबंधों के स्वस्थ और लगातार विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाने की प्रतिबद्धता भी जताई।
जयशंकर की अजरबैजान यात्रा पर क्या कहा?
विदेश मंत्री एस जयशंकर की अजरबैजान यात्रा पर जायसवाल ने कहा, जैसा कि आप सभी जानते हैं, हमारे विदेश मंत्री बाकू दौरे पर हैं। वह इस समय वहीं हैं। हमारे प्रधानमंत्री ने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान अजरबैजान के राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। विदेश मंत्री की यह यात्रा उसी बैठक के बाद हो रही है।
उन्होंने कहा कि आज विदेश मंत्री ने बाकू में अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों के विभिन्न पहलुओं को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। जयशंकर ने राष्ट्रपति अलीयेव को भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की ओर से शुभकामनाएं भी दीं।
जायसवाल ने आगे कहा, विदेश मंत्री ने अजरबैजान के अपने समकक्ष और विदेश मंत्री के साथ विस्तार से बातचीत की। यह बातचीत उपयोगी रही। दोनों पक्षों ने आपसी संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। वे राजनीतिक विचार-विमर्श बढ़ाने और एक-दूसरे के यहां प्रतिनिधिमंडल भेजने पर सहमत हुए। इसमें व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने आर्थिक साझेदारी, आर्थिक सहयोग, व्यापार और निवेश, संपर्क व्यवस्था तथा ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की। जायसवाल ने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक समझ है। यह आपसी संबंधों को और मजबूत करने का अच्छा आधार प्रदान करती है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने अजरबैजान में भारतीय छात्रों की मेजबानी करने के लिए अपने समकक्ष को धन्यवाद दिया। उन्होंने कुछ महीने पहले ईरान से अजरबैजान के रास्ते भारतीय छात्रों को निकालने में सहयोग देने के लिए अजरबैजान सरकार का भी आभार जताया।