मेघालय कोयला खदान हादसा: सीएम संगमा ने न्यायिक जांच आयोग गठन की घोषणा की, 27 लोगों की गई थी जान
मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स में अवैध कोयला खदान विस्फोट में 27 लोगों की मौत मामले में राज्य सरकार हरकत में है। मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने न्यायिक जांच आयोग गठित करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि आयोग हादसे की वजह, सुरक्षा उल्लंघन और जिम्मेदारों की पहचान करेगा।
विस्तार
मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में अवैध कोयला खदान में गुरुवार को हुए विस्फोट मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस विस्फोट में 27 लोगों की जान चली गई। ऐसे में अब मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने एक बड़ा एलान किया है। उन्होंने सोमवार को पूर्व जैंतिया हिल्स जिले में अवैध कोयला खदान में हुए विस्फोट की जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग बनाने की घोषणा की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में मुख्यमंत्री संगमा ने लिखा कि सरकार ने कमीशन ऑफ इनक्वायरी एक्ट के तहत यह आयोग गठित करने का फैसला किया है, ताकि इस दुखद खनन हादसे की पूरी जांच की जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच में यह पता लगाया जाएगा कि विस्फोट कैसे हुआ, किन सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किया गया और कौन जिम्मेदार हैं। साथ ही मृतकों के परिजनों के लिए उचित मुआवजा और राहत उपाय सुनिश्चित किए जाएंगे।
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प्रधानमंत्री मोदी ने की थी अनुग्रह राशि की घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिवारों के लिए दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स में हुई दुर्घटना से व्यथित हूं। अपनो को खोने वालों के प्रति गहरी संवेदना। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। पीएम मोदी ने घोषणा की थी कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से प्रत्येक मृतक के परिजनों को दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी, जबकि घायलों को 50 हजार रुपये दिए जाएंगे।
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दिसंबर 2025 में भी हुआ था ऐसा ही विस्फोट
गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब जिले में अवैध कोयला खनन को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। इसी थांग्स्को इलाके में पिछले साल 23 दिसंबर को भी ऐसा ही डायनामाइट विस्फोट हुआ था। उस विस्फोट में दो खनिकों की मौत हो गई थी। तब पुलिस शुरू में विस्फोट की खबरों को बेबुनियाद बताया था। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद मेघालय हाईकोर्ट ने राज्य में अवध कोयला खनन और उसके परिवहन की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय समिति (सेवानिवृत्त जज बीपी काटेकी समिति) ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी। मेघायल के मानवाधिकार आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया था और राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी।
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