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महाराष्ट्र में पानी की किल्लत: शहरी और ग्रामीण निकायों में 10% कटौती का फैसला, जानें कब लागू होगा फैसला
Mon, 05 Oct 2026 04:40 PM IST
राहुल कुमार
पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई।
Published by: राहुल कुमार
Updated Mon, 05 Oct 2026 04:40 PM IST
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जल संकट, Water crisis
- फोटो : AI Generated
महाराष्ट्र सरकार ने कम बारिश के चलते राज्य के सभी शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों में 16 अक्तूबर से कम से कम 10 फीसदी पानी की कटौती लागू करने का फैसला किया है। राज्य के जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि उनके विभाग ने 31 अगस्त 2027 तक उपलब्ध पानी के भंडार को लेकर बांधवार और उपयोग के हिसाब से विस्तृत योजना तैयार की है। इसमें अल नीनो के प्रभाव और सूखे जैसी स्थिति की आशंका को ध्यान में रखा गया है।
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महाजन ने एक बयान में कहा, पीने के पानी को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और ग्राम पंचायतों को 16 अक्तूबर से 10 फीसदी पानी की कटौती लागू करने का निर्देश दिया गया है।
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पानी की बर्बादी रोकने के निर्देश
सरकार ने स्थानीय निकायों को पानी के रिसाव को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को पूरी क्षमता से चलाने का निर्देश दिया है। ट्रीट किए गए पानी का इस्तेमाल बागवानी, निर्माण और धुलाई जैसे कामों में किया जाएगा। उद्योगों को इस्तेमाल किए जाने वाले पानी में से कम से कम 30 फीसदी पानी को दोबारा इस्तेमाल या रिसाइकिल करने का निर्देश दिया गया है।
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महाजन ने कहा, हर बांध में 10 फीसदी अतिरिक्त आपातकालीन पानी का भंडार रखा जाएगा। वाष्पीकरण, गाद और अनधिकृत पानी निकासी को ध्यान में रखने के बाद 31 अगस्त 2027 तक पीने के पानी के लिए पानी सुरक्षित रखा जाएगा। पीने के पानी, पशुधन और चारे की जरूरत पूरी होने के बाद ही सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा।
रबी फसलों और चारे को प्राथमिकता
सरकार के बयान के मुताबिक, रबी खाद्यान्न और चारे को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद अन्य रबी फसलों के लिए पानी दिया जाएगा। बारहमासी फसलों को तभी पानी दिया जाएगा, जब पानी उपलब्ध रहेगा। महाजन ने लोगों और सरकारी एजेंसियों से पानी का इस्तेमाल सोच-समझकर करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जल संसाधन, राजस्व, कृषि, उद्योग और शहरी विकास विभाग स्थिति से निपटने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
अवैध पानी निकासी पर कार्रवाई
जल संसाधन विभाग राजस्व और पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर बांधों, नदियों और नहरों से पानी की अनधिकृत निकासी रोकने के लिए काम करेगा। सरकार के अनुसार, ऐसे इलाकों में संयुक्त टीमें गश्त करेंगी और अवैध पंप व अन्य उपकरण जब्त किए जाएंगे।