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'अमेरिकी दबाव में झुकी मोदी सरकार': यूपीआई मुद्दे पर कांग्रेस का आरोप- प्रधानमंत्री ने नोटा का नया मतलब समझाया

Wed, 16 Sep 2026 12:16 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Wed, 16 Sep 2026 12:16 PM IST
सार

यूपीआई पर 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी भुगतानों के लिए 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू करने के सरकार के फैसले पर कांग्रेस ने अमेरिका के दबाव का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए हैं। सरकार का कहना है कि यह शुल्क ग्राहकों पर नहीं लगाया जाएगा और आम लोगों के लिए यूपीआई भुगतान मुफ्त व असीमित रहेगा।

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Modi government bows to US pressure Congress alleges on UPI issue Prime Minister explains new meaning of NOTA
जयराम रमेश, कांग्रेस सांसद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कांग्रेस ने बुधवार को सरकार पर आरोप लगाया कि उसने अमेरिका की मांग के आगे झुकते हुए यूपीआई पर जीरो एमडीआर की व्यवस्था खत्म कर दी है और अब 2,000 रुपये से अधिक के कारोबारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने नोटा का नया मतलब 'नरेंद्र्स ऑनगोइंग ट्रंप अपीजमेंटच कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एमडीआर में बदलाव अमेरिकी कार्ड कंपनियों को यूपीआई के मुकाबले प्रतिस्पर्धा करने का मौका देने के लिए किया गया है।

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'अमेरिका के दबाव का आरोप'
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि गुरुवार को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ (टैरिफ) लगाने वाले विधेयक पर मतदान करने वाली है। जबकि, अमेरिकी सीनेट पहले ही इस कानून को मंजूरी दे चुकी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन भारतीय प्रवासियों पर कार्रवाई तेज कर रहा है और उनके लिए नियम कड़े किए जा रहे हैं। एच-1बी (एच-वन-बी) वीजा की लागत बढ़ाई गई है और नौकरी जाने की स्थिति में ऐसे वीजाधारकों को तुरंत देश से बाहर भेजने की व्यवस्था भी जल्द लागू हो सकती है। एच-1बी वीजा धारकों में बड़ी संख्या आईटी (आई-टी) पेशेवरों की है। ऐसे में मोदी सरकार ने यूपीआई पर जीरो एमडीआर खत्म करने और शुल्क लगाने का फैसला किया है।
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0.4 प्रतिशत शुल्क पर सवाल
 अपने पोस्ट में रमेश ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की उस पहले की आलोचना का हवाला दिया, जिसमें यूपीआई के मुफ्त होने और उसके कारण वीजा (वीजा) तथा मास्टरकार्ड (मास्टरकार्ड) जैसी कंपनियों के कारोबार पर असर पड़ने की बात कही गई थी। उन्होंने पूछा, '0.4 प्रतिशत एमडीआर क्यों? क्या इसलिए कि डेबिट कार्ड पर भी एमडीआर 0.4 प्रतिशत है? क्या यह फैसला अमेरिकी कार्ड कंपनियों को यूपीआई के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाने के लिए किया गया है?' उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या सरकार का दावा है कि इससे यूपीआई अधिक टिकाऊ बनेगा।
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यूपीआई चलाने की लागत पर तर्क
कांग्रेस नेता ने कहा कि पूरे यूपीआई तंत्र को चलाने की अनुमानित सालाना लागत करीब 20,000 करोड़ रुपये है। उन्होंने दावा किया कि यह रकम पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई की ओर से केंद्र सरकार को हस्तांतरित की गई रकम के 10 प्रतिशत से भी कम है। उनके अनुसार, इन हस्तांतरणों से मोदी सरकार को सरकारी वित्त की बेहतर स्थिति दिखाने में मदद मिली है। रमेश ने एक अन्य पोस्ट में एमडीआर के फैसले को '2017 जीएसटी (जी-एस-टी) रिडक्स' भी बताया और सरकार की नीति पर सवाल उठाए।

सरकार ने उपभोक्ताओं पर शुल्क से किया इनकार
सरकार ने एक दिन पहले 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू करने की घोषणा की थी। हालांकि, इसमें आम लोगों के बीच होने वाले व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी पीटूपी भुगतान और छोटे भुगतानों को शुल्क से बाहर रखा गया है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यूपीआई से भुगतान करने वाले ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, एमडीआर व्यापारी भुगतान व्यवस्था के भीतर लिया जाने वाला शुल्क है, ग्राहकों से यूपीआई भुगतान के बदले वसूला जाने वाला शुल्क नहीं। आम लोगों के लिए यूपीआई का इस्तेमाल पहले की तरह असीमित और मुफ्त रहेगा; न तो मासिक कोटा होगा, न लेन-देन की संख्या पर सीमा और न ही किसी तरह की टियर आधारित पाबंदी।


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विपक्ष की आलोचना, बीजेपी का पलटवार
इस फैसले को दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणालियों में शामिल यूपीआई के लिए एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने सरकार के फैसले की आलोचना की है। कांग्रेस ने इसे “मोदी टैक्स” बताया, जबकि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिका के दबाव के आगे झुकने का आरोप लगाया। इसके जवाब में बीजेपी ने कांग्रेस पर “फेक न्यूज” फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार ने साफ कर दिया है कि एमडीआर का शुल्क उपभोक्ताओं से नहीं लिया जाएगा।

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