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पीएम मोदी के सहपाठी को मिली राहत: भाजपा विधायक से जुड़ी कंपनी ने छोड़ा जमीन पर दावा, क्या है पूरा मामला?
Wed, 16 Sep 2026 11:00 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, ठाणे
पीटीआई, ठाणे
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Wed, 16 Sep 2026 11:00 AM IST
सार
81 वर्षीय असगरअली वोहरा, जो पीएम मोदी के सहपाठी हैं। उन्होंने पिछले दिनों पीएम मोदी से मुलाकात की थी। अब उनको जमीन विवाद में बड़ी राहत मिली है। भाजपा विधायक से जुड़ी कंपनी ने जमीन पर अपना दावा छोड़ दिया है। आईए जानते हैं 1989 में खरीदी जमीन को लेकर क्या है पूरा विवाद?
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PM से मुलाकात के बाद कंपनी का बड़ा फैसला
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मीरा रोड में रहने वाले 81 साल के असगरअली वोहरा, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहपाठी होने का दावा करते हैं। उनको बड़ी राहत मिली है। प्रधानमंत्री से मिलने के कुछ ही दिनों बाद भाजपा विधायक से जुड़ी एक कंपनी ने जमीन के विवाद में उनके खिलाफ अपना दावा छोड़ दिया है।
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पीएम से क्या अपील की थी?
वोहरा के अनुसार, उन्होंने गुजरात के वडनगर में बीएन स्कूल में पीएम मोदी के साथ पढ़ाई की थी। उन्होंने 8 सितंबर को मोदी से मुलाकात की थी। इसके साथ ही पालघर जिले में जमीन के एक टुकड़े को लेकर चल रहे विवाद की सीबीआई से जांच कराने की अपील की थी।
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क्या है पूरा मामला?
इससे पहले, वोहरा ने कहा था कि यह मामला भयंदर ईस्ट के नवघर में 2,810 वर्ग मीटर के एक अहम प्लॉट से जुड़ा है, जिसे उन्होंने 1989 में खरीदा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि 2011 में दो कंपनियों स्वयं बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स ने इस पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने दावा किया था कि ये दोनों कंपनियां भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता से जुड़ी हैं। घटनाक्रम में एक बड़ा मोड़ तब आया जब सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने अब इस मामले में पूरी तरह से अपना दावा छोड़ दिया है।
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सरकारी दस्तावेजों से पता चलता है कि कंपनी ने मीरा भयंदर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में टाउन प्लानिंग के असिस्टेंट डायरेक्टर को एक पत्र सौंपा, जिसमें उसने औपचारिक रूप से प्लॉट के लिए अपना 'कमेंसमेंट सर्टिफिकेट' (निर्माण शुरू करने का प्रमाण-पत्र) सरेंडर कर दिया।
कंपनी ने क्या कहा?
कंपनी ने कहा कि उसने 13 जून, 2019 को एक रजिस्टर्ड डीड के जरिए प्लॉट खरीदा था।17 अप्रैल, 2026 को निर्माण की अनुमति हासिल की थी, लेकिन मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद के कारण वह परमिट वापस कर रही है। अपने पत्र में, डेवलपर ने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन से अनुरोध किया कि वह अनुमति रद्द कर दे और उस जगह पर अपने प्रोजेक्ट के लिए पहले जमा की गई सभी फीस वापस कर दे।
पुलिस शिकायत को वापस लने की तैयारी?
कंपनी ने जमीन के मालिक के खिलाफ खड़ी की गई कानूनी अड़चनों को भी हटाने की दिशा में कदम उठाए हैं। सूत्रों के अनुसार, नरेंद्र मेहता ने वोहरा के सहयोगी अजय ढोखा के जरिए संपर्क किया ताकि 2015 की उस पुलिस शिकायत को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जा सके, जिसमें वोहरा और ढोखा दोनों पर आपराधिक रूप से जमीन पर घुसने और डराने-धमकाने का आरोप लगाया गया था। 16 सितंबर को होने वाली अहम म्युनिसिपल सुनवाई से ठीक पहले, पुलिस शिकायत वापस लेने और कंस्ट्रक्शन परमिट सरेंडर करने की पुष्टि करने वाले आधिकारिक पत्र संबंधित अधिकारियों को सौंपे गए।
'जाली दस्तावेज बनाकर किया धोखाधड़ी'
वोहरा ने कहा था कि उनकी जानकारी के बिना जाली दस्तावेज बनाकर धोखाधड़ी से प्लॉट को दो संस्थाओं के बीच बांट दिया गया था। 2015 में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला। 80 से ज्यादा उम्र के वोहरा ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि प्रधानमंत्री के साथ बैठक के बाद यह मामला सुलझ जाएगा।
इस बैठक में उन्होंने सीबीआई से जांच की मांग की थी। उन्होंने कहा कि मामले में अब कार्रवाई शुरू हो गई है और म्युनिसिपल अधिकारियों ने 16 सितंबर को दोनों कंपनियों के मैनेजमेंट को स्पष्टीकरण के लिए बुलाया है। महाराष्ट्र के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर और शिवसेना के सीनियर नेता प्रताप सरनाईक ने तस्वीरें शेयर करते हुए भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री अपने स्कूल के साथी को न्याय दिलाएंगे।