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Tripura: अगरतला में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत- 2000 साल के प्रयोगों के बाद दुनिया थकी, अब भारत की राह देख रही

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला Published by: Pavan Updated Tue, 21 Apr 2026 02:41 PM IST
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सार

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया 2000 साल के प्रयोग के बाद थक गई है और अब भारत की राह देख रही है। आरएसएस प्रमुख त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में मां सौंदर्य चिन्मयी मंदिर के प्रतिष्ठा और कुंभाभिषेक कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

Mohan Bhagwat addresses in Pratishtha and Kumbabishekam Program of the Temple of Maa Soundarya Chinmayi Temple
मोहन भागवत, आरएसएस प्रमुख - फोटो : ANI
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विस्तार

त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने दुनिया की मौजूदा स्थिति और भारत की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया। वे मां सौंदर्य चिन्मयी मंदिर के प्रतिष्ठा और कुंभाभिषेक कार्यक्रम में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने अपने संबोधन में पिछले करीब 2000 वर्षों के वैश्विक इतिहास और उसके अनुभवों का जिक्र किया।
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'2000 साल के प्रयोगों के बाद दुनिया थकी'
अपने भाषण में उन्होंने कहा कि दुनिया ने अलग-अलग व्यवस्थाओं को अपनाकर प्रयोग किए। पहले राजाओं को सारी शक्ति दी गई, लेकिन समय के साथ कई शासक अपनी ही जनता का शोषण करने लगे। इसके बाद लोगों ने ईश्वर को सर्वोच्च मानकर भक्ति आधारित धर्मों को अपनाया, लेकिन शांति की तलाश में शुरू हुए ये रास्ते भी कई बार हिंसा और खून-खराबे में बदल गए।

'विज्ञान ने इंसानों को कई सुख-सुविधाएं दीं'
आरएसएस प्रमुख ने आगे कहा कि इसके बाद विज्ञान का दौर आया, जहां लोगों ने यह मानना शुरू किया कि केवल वही सच है जिसे प्रयोगशाला में साबित किया जा सके। इस दौरान विज्ञान ने इंसानों को कई सुख-सुविधाएं दीं, लेकिन असली संतोष आज भी नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि आज भी समाज में दुख, परिवारों का टूटना, अपराध और युद्ध जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जितना विकास हो रहा है, उतना ही पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है।

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'अब भारत की राह देख रही दुनिया'
अपने संबोधन के आखिरी में उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक कई प्रयोगों के बाद अब दुनिया भारत की परंपराओं और ज्ञान की ओर उम्मीद से देख रही है। उनके अनुसार, मानवता को सही दिशा दिखाना भारत की जिम्मेदारी है और यही भारत के अस्तित्व का उद्देश्य भी है।

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