MP Election results: क्या भाजपा ने मध्यप्रदेश का चुनाव 'गुजरात पैटर्न' पर लड़ा है? विश्लेषक क्यों कर रहे तुलना
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मध्यप्रदेश में जिस तरह भाजपा के पक्ष में लहर नजर आ रही है वह 'गुजरात पैटर्न' पर लड़े गए चुनाव की तरफ संकेत देते हैं। दरअसल मध्यप्रदेश की इस एतिहासिक जीत वाले चुनाव को गुजरात पैटर्न पर लड़े जाने और कहे जाने के पीछे कई अहम पहलुओं को जोड़कर देखा जा रहा है। इसमें 2017 के गुजरात चुनाव और 2018 के मध्यप्रदेश चुनाव की कड़ी लड़ाई के बाद के चुनाव की बदली तस्वीर से आंका जा रहा है। इन दोनों वर्षों में दोनों राज्यों के चुनावों में भाजपा को सबसे कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। फिलहाल भाजपा के नेताओं का मानना है कि यह जीत मोदी के चेहरे और पार्टी की सधी हुई रणनीति के चलते हुई है।
मध्यप्रदेश की 230 सीटों पर जिस तरीके से भाजपा ने अप्रत्याशित तरीके से जीत हासिल की है, वह अब एक तरह से गुजरात में हुई 2022 की जीत के तर्ज पर देखी जा रही है। सियासी जानकार भी इस बात को मानते हैं कि अगर गुजरात और मध्यप्रदेश में 2017 और 2018 के चुनावी परिणाम के नजरिए से देखें तो पता चलता है कि इन दोनों अलग-अलग वर्षों में गुजरात और मध्यप्रदेश के चुनावों में भाजपा को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा था। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेंद्र शुक्ला कहते हैं कि गुजरात में 2017 के विधानसभा चुनाव में पाटीदार आंदोलन की वजह से भाजपा को गुजरात में कड़ा मुकाबला करना पड़ा था। सियासी गलियारों में तो चर्चा है इस बात की भी होने लगी थी कि संभव है 2017 के चुनाव में भाजपा सरकार न बना सके। ठीक इसी तरह 2018 के चुनावों मध्यप्रदेश में भाजपा न सिर्फ चुनाव हार गई, बल्कि सत्ता से बेदखल भी हो गई थी।
सियासी जानकारों का कहना है कि 2017 और 2018 की उठापटक के बाद जब 2022 और 2023 के विधानसभा चुनाव हुए, तो तस्वीर पूरी तरह बदली हुई नजर आई। देश के विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए एग्जिट पोल करने वाली एक संस्था से जुड़े वरिष्ठ समन्वयक अनुराग चौधरी कहते हैं कि उन्होंने 2017 और 2018 के मध्यप्रदेश और गुजरात के चुनाव में भी जमीन पर इस कड़ी लड़ाई को महसूस किया था। 2022 के गुजरात चुनाव को और फिर 2023 में मध्यप्रदेश के चुनाव को भी जमीन पर जाकर देखा। वह कहते हैं कि 2017 में कड़ी टक्कर के बाद 2022 में जिस तरह से भाजपा ने गुजरात में 'लैंडस्लाइड विक्ट्री' दर्ज की। ठीक उसी तरह 2018 में विपरीत परिणामों के बाद 2023 के विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में जिस तरीके की जबरदस्त सीटें मिली हैं, वह बताती है कि मध्यप्रदेश में गुजरात पैटर्न लागू हुआ।
राजनीतिक विश्लेषक शंभू दयाल शर्मा कहते हैं कि गुजरात चुनाव को अगर देखा जाए, तो निश्चित तौर पर मध्यप्रदेश का चुनाव गुजरात पैटर्न जैसा ही नजर आ रहा है। दोनों राज्य अपने इस विधानसभा चुनाव से पहले के विधानसभा चुनाव में कड़ी मशक्कत कर रहे थे और जातियता के समीकरण और उसके विवादों में उलझ गए थे। शर्मा कहते हैं कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 99 सीटें मिली थीं और कांग्रेस को 80 सीटें मिली थीं। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितना कठिन चुनाव हो गया था भाजपा के लिए। लेकिन 2022 का जब चुनाव हुआ, तो भाजपा ने उन सभी समीकरण, जिनके आधार पर 2017 का चुनाव फंस गया था, उनको सुधरते हुए मजबूती से चुनाव लड़ा और 156 सीटों के साथ एक एतिहासिक जीत दर्ज की। शर्मा कहते हैं कि ठीक उसी पैटर्न पर पिछले चुनाव में फंसने के बाद 2023 में भाजपा ने मध्यप्रदेश में वही रास्ता अपनाया और बड़ी जीत की ओर आगे बढ़ गई।
भाजपा के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी कहते हैं कि आप बात चाहे राजस्थान की करें, मध्यप्रदेश की करें, छत्तीसगढ़ की करें या पिछले साल हुए गुजरात चुनाव की करें। भाजपा की नीतियां और देश के प्रधानमंत्री मोदी की नीति नियति और नेतृत्व के चलते ही पार्टी लगातार विजयी हो रही है। उनका कहना है कि डबल इंजन की सरकारें देश के साथ प्रदेश के प्रत्येक तबके के व्यक्ति के विकास के लिए ही काम कर रही है। यही वजह है कि लोगों का भरोसा भाजपा पर बना हुआ है। राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी भी कहते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व के साथ राज्य की सरकारों और केंद्र सरकार की योजनाएं समाज के हर तबके के लिए काम कर रही हैं। यही वजह है कि जनता का भरोसा और आशीर्वाद लगातार उनकी पार्टी को मिल रहा है।