Mumbai: जमानत मिलने के बाद भी आरोपी को नहीं किया रिहा, सत्र कोर्ट ने निचली अदालत को लगाई फटकार; नोटिस जारी
मुंबई सत्र न्यायालय ने कर्ला के जेएमएफसी संतोष गराड़ को आरोपी गणेश त्रिभुवन को जमानत मिलने के बावजूद रिहा न करने पर फटकार लगाई। इसे अवैध हिरासत और स्पष्ट अवज्ञा बताया, तुरंत रिहाई का आदेश दिया और शो-कॉज नोटिस जारी किया।
विस्तार
मुंबई में सत्र न्यायालय ने कर्ला के प्रथम श्रेणी न्यायालय (जेएमएफसी) न्यायाधीश संतोष गराड़ को कड़ी फटकार लगाई है। आरोप है कि उन्होंने उच्च न्यायालय द्वारा जमानत मिलने के बावजूद आरोपी गणेश त्रिभुवन को रिहा नहीं किया। न्यायालय ने इसे अवैध हिरासत और स्पष्ट अवज्ञा करार देते हुए तुरंत रिहाई का आदेश दिया। साथ ही न्यायाधीश को शो-कॉज नोटिस जारी किया।
बता दें कि ये पूरा मामला नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत आरोपी गणेश त्रिभुवन का है। उन्हें 2 जनवरी को सत्र न्यायालय ने जमानत दे दी थी। लेकिन इसके पांच दिन बाद उनके वकील ने न्यायालय से शिकायत की कि त्रिभुवन को अभी तक रिहा नहीं किया गया।
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सत्र न्यायालय के 7 जनवरी के रोजनामा के अनुसार, जेएमएफसी संतोष गराड़ ने 6 जनवरी को रिहाई का मेमो जारी किया था। लेकिन इसके बाद उन्होंने सामूहिक आदेश पारित कर अपने ही आदेश को अवैध घोषित कर दिया और निर्देश दिया कि कोई भी रिहाई मेमो विशेष न्यायिक आदेश के बिना जारी नहीं किया जाएगा। इसके बाद रिहाई आदेश जेल अधिकारियों को सौंपा गया था, बाद में मौखिक रूप से कहा गया कि आरोपी को जमानत पर रिहा न किया जाए।
सत्र न्यायालय ने बताया अवैध
सत्र न्यायालय ने इसे अवैध और गैरकानूनी बताते हुए कड़ी आलोचना की। सत्र न्यायालय ने कहा कि जेएमएफसी का आदेश स्पष्ट रूप से अवैध और गैरकानूनी है। जमानत आदेश की प्रमाणित प्रति दी गई थी, लेकिन उन्होंने उसे लागू नहीं किया और इसके विपरीत अवैध आदेश पारित किया, जो स्पष्ट अवज्ञा दिखाता है।
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आरोपी त्रिभुवन को तुरंत रिहा करने के आदेश
गौरतलब है कि न्यायालय का आदेश है कि आरोपी त्रिभुवन को 15,000 रुपये की व्यक्तिगत जमानत पर तुरंत रिहा किया जाए। जेएमएफसी संतोष गराड़ को शो-कॉज नोटिस जारी कर पूछा गया है कि अवज्ञा और अवैध हिरासत के लिए उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए। इस मामले में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जमानत मिलने के बाद किसी आरोपी को अवैध रूप से हिरासत में रखना कानूनी तौर पर सही नहीं है।
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