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NEET पेपर लीक: प्रधान के इस्तीफे की शर्त पर संसद में रार, चर्चा के लिए विपक्ष से संपर्क क्यों कर रही सरकार?
Thu, 23 Jul 2026 04:18 PM IST
राकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 23 Jul 2026 04:18 PM IST
सार
नीट पेपर लीक का मुद्दा सिर्फ एक परीक्षा घोटाला नहीं बल्कि लाखों छात्रों के भरोसे और शिक्षा व्यवस्था की साख का सवाल बन गया है। सरकार और विपक्ष के बीच यह बातचीत तय करेगी कि संसद इस मुद्दे को हल की तरफ ले जाती है या राजनीतिक जंग और लंबी खिंचती है।
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पेपर लीक पर चर्चा के लिए तैयार सरकार
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सरकार ने विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स से नीट पेपर लीक मामले पर चर्चा के लिए संपर्क किया है। सरकार स्पष्ट कह चुकी है कि विपक्ष बिना किसी शर्त के इस मुद्दे पर चर्चा करे। इस्तीफे जैसी कोई शर्त न रखी जाए। साथ ही फ्लोर लीडर्स की बैठक जल्द बुलाने की भी संभावना है। यह कदम संसद के मानसून सत्र में उठाया जा रहा है जहां NEET पेपर लीक का मुद्दा गरमाया हुआ है। सरकार चर्चा के लिए तैयार है लेकिन विपक्ष की मांगों के बीच गतिरोध बना हुआ है।
सरकार की पेशकश पर विपक्ष क्या करेगा?
सरकारी सूत्रों के अनुसार सरकार विपक्षी फ्लोर लीडर्स से लगातार बात कर रही है। उद्देश्य नीट पेपर लीक मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करना है। सरकार किसी भी तारीख और किसी भी अवधि में चर्चा करने के लिए तैयार है। बस शर्त एक है – चर्चा बिना किसी पूर्व शर्त के हो। विपक्ष की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की रही है। सरकार इसे साफ तौर पर खारिज कर रही है। सूत्र कहते हैं कि फ्लोर लीडर्स की बैठक जल्द हो सकती है जिसमें इस पूरे मामले का रास्ता निकाला जा सके।
क्या बिना शर्त चर्चा संभव है?
संसदीय कार्यमंत्री और अन्य मंत्रियों ने संसद के दोनों सदनों में चर्चा के लिए तैयार रहने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि चर्चा का प्रारूप फ्लोर लीडर्स के साथ विचार-विमर्श से तय किया जाएगा। सरकार का जोर है कि मुद्दे पर गंभीर चर्चा हो लेकिन विपक्ष की शर्तें इसे रोक न दें। इस बीच विपक्ष भी अपने रुख पर अड़ा दिख रहा है। दोनों पक्षों के बीच यह खींचतान जारी है।
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मामले से जुड़ी पांच बड़ी बातें
सत्र कैसे चलेगा?
यह पूरा मामला संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर रहा है। अगर दोनों पक्ष सहमत हो जाते हैं तो नीट पेपर लीक पर विस्तृत बहस हो सकती है। लेकिन शर्तों पर अड़ंगा बरकरार रहा तो गतिरोध बढ़ सकता है। सरकार की कोशिश है कि संसद सुचारू रूप से चले और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सभी पक्ष अपनी बात रख सकें।
यह भी पढ़ें: CJP Protest: 'चार बार भेजा बातचीत का प्रस्ताव', मंत्री जितेंद्र सिंह बोले- किसी भी समय चर्चा को तैयार है सरकार
नीट पेपर लीक मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?
नीट-यूजी 2026 परीक्षा मई की शुरुआत में हुई थी। कुछ दिनों बाद पेपर लीक होने के आरोप लगे, जिसके बाद एनटीए ने परीक्षा रद्द कर दी और दोबारा परीक्षा कराई गई। सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है और अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस घटना से पूरे देश में छात्रों में भारी आक्रोश फैल गया, क्योंकि लाखों छात्रों ने वर्षों की मेहनत इस परीक्षा पर लगाई थी। लीक की खबर सामने आने के बाद दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ। इसमें शिक्षक-समाजसेवी सोनम वांगचुक भी शामिल हो गए और उन्होंने भूख हड़ताल भी की।
प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की ओर से लाठीचार्ज किया गया, जिसमें कई छात्र घायल हुए। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने भी अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन किए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। मानसून सत्र के दौरान संसद में यह मुद्दा गरमा गया। विपक्ष ने सदन की कार्यवाही रोक दी और मंत्री के इस्तीफे के बिना चर्चा करने से इनकार कर दिया। सरकार ने कहा कि वह बिना किसी शर्त के विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है और फ्लोर लीडर्स की बैठक बुलाने जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद पेपर लीक को गंभीर पाप बताया और दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट से सजा दिलाने की बात कही।
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सरकार की पेशकश पर विपक्ष क्या करेगा?
सरकारी सूत्रों के अनुसार सरकार विपक्षी फ्लोर लीडर्स से लगातार बात कर रही है। उद्देश्य नीट पेपर लीक मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करना है। सरकार किसी भी तारीख और किसी भी अवधि में चर्चा करने के लिए तैयार है। बस शर्त एक है – चर्चा बिना किसी पूर्व शर्त के हो। विपक्ष की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की रही है। सरकार इसे साफ तौर पर खारिज कर रही है। सूत्र कहते हैं कि फ्लोर लीडर्स की बैठक जल्द हो सकती है जिसमें इस पूरे मामले का रास्ता निकाला जा सके।
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क्या बिना शर्त चर्चा संभव है?
संसदीय कार्यमंत्री और अन्य मंत्रियों ने संसद के दोनों सदनों में चर्चा के लिए तैयार रहने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि चर्चा का प्रारूप फ्लोर लीडर्स के साथ विचार-विमर्श से तय किया जाएगा। सरकार का जोर है कि मुद्दे पर गंभीर चर्चा हो लेकिन विपक्ष की शर्तें इसे रोक न दें। इस बीच विपक्ष भी अपने रुख पर अड़ा दिख रहा है। दोनों पक्षों के बीच यह खींचतान जारी है।
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मामले से जुड़ी पांच बड़ी बातें
- सरकार ने विपक्षी फ्लोर लीडर्स से NEET पेपर लीक पर चर्चा के लिए संपर्क किया है।
- सरकार का साफ कहना है कि चर्चा बिना किसी शर्त के हो।
- इस्तीफे जैसी शर्तों को सरकार ने सिरे से खारिज किया है।
- फ्लोर लीडर्स की बैठक जल्द बुलाए जाने की संभावना है।
- चर्चा का समय और प्रारूप दोनों पक्ष मिलकर तय कर सकते हैं।
सत्र कैसे चलेगा?
यह पूरा मामला संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर रहा है। अगर दोनों पक्ष सहमत हो जाते हैं तो नीट पेपर लीक पर विस्तृत बहस हो सकती है। लेकिन शर्तों पर अड़ंगा बरकरार रहा तो गतिरोध बढ़ सकता है। सरकार की कोशिश है कि संसद सुचारू रूप से चले और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सभी पक्ष अपनी बात रख सकें।
यह भी पढ़ें: CJP Protest: 'चार बार भेजा बातचीत का प्रस्ताव', मंत्री जितेंद्र सिंह बोले- किसी भी समय चर्चा को तैयार है सरकार
नीट पेपर लीक मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?
नीट-यूजी 2026 परीक्षा मई की शुरुआत में हुई थी। कुछ दिनों बाद पेपर लीक होने के आरोप लगे, जिसके बाद एनटीए ने परीक्षा रद्द कर दी और दोबारा परीक्षा कराई गई। सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है और अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस घटना से पूरे देश में छात्रों में भारी आक्रोश फैल गया, क्योंकि लाखों छात्रों ने वर्षों की मेहनत इस परीक्षा पर लगाई थी। लीक की खबर सामने आने के बाद दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ। इसमें शिक्षक-समाजसेवी सोनम वांगचुक भी शामिल हो गए और उन्होंने भूख हड़ताल भी की।
प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की ओर से लाठीचार्ज किया गया, जिसमें कई छात्र घायल हुए। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने भी अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन किए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। मानसून सत्र के दौरान संसद में यह मुद्दा गरमा गया। विपक्ष ने सदन की कार्यवाही रोक दी और मंत्री के इस्तीफे के बिना चर्चा करने से इनकार कर दिया। सरकार ने कहा कि वह बिना किसी शर्त के विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है और फ्लोर लीडर्स की बैठक बुलाने जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद पेपर लीक को गंभीर पाप बताया और दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट से सजा दिलाने की बात कही।