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'प्रधान के इस्तीफे के बिना कोई चर्चा नहीं': कांग्रेस की सरकार को दो टूक; क्या फिर दोहरा रहा व्यापमं का इतिहास?
Thu, 23 Jul 2026 05:32 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 23 Jul 2026 05:32 PM IST
सार
नीट पेपर लीक विवाद ने संसद की कार्यवाही को एक बड़े राजनीतिक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। एक तरफ जहां विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग पर अडिग है, वहीं दूसरी तरफ सरकार बिना किसी शर्त के बहस कराने की बात कर रही है। जब तक दोनों पक्षों के बीच इस शर्त को लेकर सहमति नहीं बनती, तब तक संसद में गतिरोध बने रहने की पूरी संभावना है।
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जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
नीट पेपर लीक मामले को लेकर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध गहरा गया है। कांग्रेस ने गुरुवार को साफ कर दिया कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद पर बने रहेंगे, तब तक संसद में नीट मामले पर कोई भी चर्चा पूरी तरह से व्यर्थ होगी। मुख्य विपक्षी दल ने देश भर के जनभावनाओं का हवाला देते हुए शिक्षा मंत्री के तुरंत इस्तीफे की मांग की है।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन के भीतर मांग रखी कि नीट पर चर्चा शुरू होने से पहले शिक्षा मंत्री को अपना पद छोड़ देना चाहिए। इस बीच, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस के अन्य सांसदों ने संसद परिसर में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
क्या व्यापमं और नीट पेपर लीक में कोई समानता है?
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए सरकार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने साल 2015 के मानसून सत्र की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले के कारण पूरा सत्र धो दिया गया था।
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जयराम रमेश का आरोप है कि व्यापमं घोटाले के वक्त जिस मुख्यमंत्री को बचाया गया था, उन्हें बाद में दो महत्वपूर्ण केंद्रीय मंत्रालय दे दिए गए। उन्होंने कहा, 'समय कैसे बीतता है और कुछ भी नहीं बदलता! व्यापमं परीक्षा और भर्ती घोटाले के कारण 2015 का मानसून सत्र लगभग पूरा रद्द हो गया था। अब 2026 का मानसून सत्र नीट पेपर लीक घोटाले की वजह से बाधित हो रहा है। व्यापमं घोटाले की अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति को सुरक्षित रखा गया, और अब एनटीए पेपर लीक के वक्त पद संभालने वाले को 'प्रधानमंत्री' बचा रहे हैं।'
यह भी पढ़ें: CJP Protest: 'चार बार भेजा बातचीत का प्रस्ताव', मंत्री जितेंद्र सिंह बोले- किसी भी समय चर्चा को तैयार है सरकार
मामले से जुड़ी पांच बड़ी बातें
क्या संसद में बिना इस्तीफे के चर्चा संभव है?
एक तरफ जहां कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का मानना है कि मंत्री के पद पर रहते हुए चर्चा का कोई औचित्य नहीं है, वहीं दूसरी तरफ सरकार विपक्ष पर शर्तें थोपने का आरोप लगा रही है। सरकार का कहना है कि विपक्ष गंभीर चर्चा में हिस्सा लेने के बजाय केवल पूर्व शर्तें रखकर गतिरोध पैदा कर रहा है। सरकार के अनुसार, कांग्रेस इस पूरे मामले पर देशहित और छात्रों के हित में बात करने के बजाय सिर्फ राजनीति चमकाने में लगी हुई है।
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राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन के भीतर मांग रखी कि नीट पर चर्चा शुरू होने से पहले शिक्षा मंत्री को अपना पद छोड़ देना चाहिए। इस बीच, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस के अन्य सांसदों ने संसद परिसर में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
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क्या व्यापमं और नीट पेपर लीक में कोई समानता है?
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए सरकार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने साल 2015 के मानसून सत्र की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले के कारण पूरा सत्र धो दिया गया था।
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जयराम रमेश का आरोप है कि व्यापमं घोटाले के वक्त जिस मुख्यमंत्री को बचाया गया था, उन्हें बाद में दो महत्वपूर्ण केंद्रीय मंत्रालय दे दिए गए। उन्होंने कहा, 'समय कैसे बीतता है और कुछ भी नहीं बदलता! व्यापमं परीक्षा और भर्ती घोटाले के कारण 2015 का मानसून सत्र लगभग पूरा रद्द हो गया था। अब 2026 का मानसून सत्र नीट पेपर लीक घोटाले की वजह से बाधित हो रहा है। व्यापमं घोटाले की अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति को सुरक्षित रखा गया, और अब एनटीए पेपर लीक के वक्त पद संभालने वाले को 'प्रधानमंत्री' बचा रहे हैं।'
यह भी पढ़ें: CJP Protest: 'चार बार भेजा बातचीत का प्रस्ताव', मंत्री जितेंद्र सिंह बोले- किसी भी समय चर्चा को तैयार है सरकार
मामले से जुड़ी पांच बड़ी बातें
- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष: कांग्रेस ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को नीट मुद्दे पर संसद में चर्चा शुरू करने की पहली शर्त बनाया है।
- संसद परिसर में जोरदार प्रदर्शन: सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे सहित कई वरिष्ठ सांसदों ने संसद परिसर के अंदर प्रदर्शन किया।
- व्यापमं घोटाले से तुलना: जयराम रमेश ने 2015 के व्यापमं घोटाले और 2026 के एनटीए पेपर लीक के मामलों में मंत्रियों को बचाए जाने के पैटर्न को एक जैसा बताया।
- सरकार के आरोपों का जवाब: सरकार विपक्ष पर चर्चा से भागने और इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है।
- संसदीय बहस पर अनिश्चितता: विपक्ष का कहना है कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान पद पर हैं, तब तक किसी भी चर्चा का कोई ठोस नतीजा नहीं निकलेगा।
क्या संसद में बिना इस्तीफे के चर्चा संभव है?
एक तरफ जहां कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का मानना है कि मंत्री के पद पर रहते हुए चर्चा का कोई औचित्य नहीं है, वहीं दूसरी तरफ सरकार विपक्ष पर शर्तें थोपने का आरोप लगा रही है। सरकार का कहना है कि विपक्ष गंभीर चर्चा में हिस्सा लेने के बजाय केवल पूर्व शर्तें रखकर गतिरोध पैदा कर रहा है। सरकार के अनुसार, कांग्रेस इस पूरे मामले पर देशहित और छात्रों के हित में बात करने के बजाय सिर्फ राजनीति चमकाने में लगी हुई है।