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30 दिन में परीक्षा कराना चुनौती: पेपर लीक रोकने के लिए NTA की जीरो ट्रस्ट नीति, सोशल मीडिया पर भी पैनी नजर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Fri, 22 May 2026 01:02 PM IST
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सार

नीट परीक्षा दोबारा कराने के लिए एनटीए जीरो ट्रस्ट नीति अपना रहा है। कम समय में परीक्षा कराना बड़ी चुनौती है, इसलिए सुरक्षा और ऑडिट सख्त कर दिए गए हैं। सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है ताकि पेपर लीक जैसी गड़बड़ी दोबारा न हो।

NEET re-exam zero trust policy paper leak controversy CBI investigation social media monitoring
NEET री-एग्जाम के लिए NTA अलर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

आगामी 21 जून को दोबारा होने वाली नीट (NEET) परीक्षा के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पूरी तरह सतर्क है। परीक्षा में अब एक महीने से भी कम समय बचा है, ऐसे में एजेंसी जीरो ट्रस्ट नीति के तहत काम कर रही है। इसका सीधा मतलब है कि एजेंसी अब किसी भी स्तर पर सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। पेपर लीक विवाद के बाद एनटीए अब कड़ी निगरानी, नियमित ऑडिट और सोशल मीडिया की मॉनिटरिंग कर रहा है।


कम समय में दोबारा परीक्षा करना चुनौती
सूत्रों ने बताया कि 30 दिनों के भीतर दोबारा परीक्षा आयोजित करना एक बड़ी चुनौती है। आमतौर पर इतने बड़े स्तर की परीक्षा की तैयारी के लिए लगभग छह महीने का समय चाहिए होता है। एक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि समय बहुत तेजी से निकल रहा है। अगर समय की कमी की वजह से कोई भी छोटी सी चूक हुई, तो यह एक बड़ी मुसीबत बन सकती है।
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पिछली नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी गुस्सा देखा गया था। इसके बाद ही दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया। फिलहाल इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। सूत्रों का कहना है कि एजेंसी की जिम्मेदारी सिर्फ परीक्षा कराना ही नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया की ईमानदारी बनाए रखना भी है। एनटीए का मानना है कि वे छात्रों को बार-बार निराश नहीं कर सकते, क्योंकि यह उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।
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एनटीए ने अंदरूनी सिस्टम में किए बदलाव
विवाद के बाद एनटीए ने अपने अंदरूनी सिस्टम में बड़े बदलाव किए हैं। सभी प्रोटोकॉल को पहले से ज्यादा मजबूत बनाया गया है। क्रॉस-चेकिंग का सिस्टम बढ़ा दिया गया है ताकि कोई भी कमी न रह जाए। एजेंसी टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी पैनी नजर रख रही है। जांच करने वालों को शक है कि पेपर लीक करने के लिए इन्हीं चैनलों का इस्तेमाल किया गया था।

ये भी पढ़ें: NEET Row: पेपर लीक नहीं हुआ तो क्यों रद्द हुई परीक्षा? संसदीय समिति ने NTA प्रमुख से पूछे सवाल; मिले ये जवाब

निष्पक्ष परीक्षा कराने के लिए उठाए जा रहे कई कदम
एनटीए निष्पक्ष परीक्षा के लिए कई गुप्त कदम भी उठा रहा है। एजेंसी इन सभी कदमों को सार्वजनिक नहीं करना चाहती, क्योंकि इससे नकल माफिया को सिस्टम की कमियां ढूंढने में मदद मिल सकती है। अंदरूनी गड़बड़ी की आशंका पर सूत्रों ने माना कि जो लोग वर्षों से एजेंसी के साथ काम कर रहे हैं, वे भी गलत हो सकते हैं। अगर अंदर के लोग ही गड़बड़ी करें, तो उसे रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है। अब यह पक्का किया जा रहा है कि ऐसी घटना दोबारा न हो।

लीक के बारे में सूत्रों ने दावा किया कि पिछली बार पेपर का सिर्फ एक हिस्सा ही प्रभावित हुआ था। अगर लीक प्रिंटिंग प्रेस, बैंक या परीक्षा केंद्र से हुआ होता, तो पूरा पेपर बाहर आ जाता। फिलहाल, असली सच सीबीआई की जांच से ही सामने आएगा और एनटीए इस जांच को प्रभावित नहीं करेगा। 21 जून को होने वाली परीक्षा ही एनटीए की नई तैयारियों को साबित करेगी।
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