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सियासी विमर्श के नए समीकरण: एआई से टूटा सत्ता का तिलिस्म और कांग्रेस की रणनीति

Rajkishor राजकिशोर
Updated Thu, 04 Jun 2026 05:22 AM IST
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सार

अमर उजाला के पॉडकास्ट अनम्यूट भारत में कांग्रेस नेता गुरदीप सप्पल ने एआई तकनीक के इस्तेमाल और महंगे आईटी सेल के जरिए गढ़े जा रहे प्रोपेगेंडा पर अपने विचार साझा किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि जेन-जी युवा अब महज चंद रुपयों में एआई टूल्स के जरिए रैप और ग्राफिक्स बनाकर मुख्यधारा के विमर्श को सीधे चुनौती दे रहे हैं। कॉकरोच पार्टी का उभार इसी का प्रमाण है। 

 

New Equations in Political Discourse: How AI Disrupted Power Narrative and Reshaped Congress Strategy
कांग्रेस नेता गुरदीप सप्पल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

राजनीति के अखाड़े में जब हवा का रुख बदलता है तो पर्दे के पीछे की रणनीतियां ही असली कहानी गढ़ती हैं। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने कभी लिखा था कि समय की शिला पर मधुर चित्र कितने किसी ने बनाए, किसी ने मिटाए। आज का भारतीय राजनीतिक परिदृश्य भी इसी बदलाव और नए विमर्श के मुहाने पर खड़ा है। अमर उजाला के विशेष पॉडकास्ट 'अनम्यूट भारत' में कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य और अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के करीबी गुरदीप सप्पल ने इन्हीं बदलते समीकरणों का विश्लेषणात्मक खाका खींचा।





सप्पल का मुख्य तर्क यह है कि भारतीय जनता पार्टी की मजबूत छवि को अब चुनौती मिल रही है। आंकड़ों का संदर्भ देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि हालिया लोकसभा चुनावों में सत्ताधारी दल और विपक्षी गठबंधन के वोट प्रतिशत का अंतर बेहद मामूली रह गया है। उनका आकलन है कि सोशल मीडिया और प्रोपेगेंडा के इर्द-गिर्द बुना गया सत्ता का आभामंडल अब जमीनी हकीकत से टकराकर कमजोर पड़ रहा है और जनता बुनियादी सवालों पर वापस लौट रही है।
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एआई तकनीक और युवाओं का आक्रोश
तकनीक के राजनीतिक प्रभाव का विश्लेषण करते हुए सप्पल ने बताया कि भारी-भरकम बजट के जरिए गढ़े जाने वाले प्रोपेगेंडा का एकाधिकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने ध्वस्त कर दिया है। सत्ता पक्ष के महंगे आईटी सेल के मुकाबले जेन-जी युवा अब महज चंद रुपयों में एआई टूल्स के जरिए रैप और ग्राफिक्स बनाकर मुख्यधारा के विमर्श को सीधे चुनौती दे रहे हैं। कॉकरोच पार्टी का उभार इसी का प्रमाण है। सप्पल ने इस मुद्दे पर कांग्रेस की भूमिका स्पष्ट करते हुए इसका सीधा श्रेय पार्टी को दिया। उन्होंने बताया कि एक डिजिटल हैशटैग और जमीनी राजनीति में बहुत बड़ा फर्क होता है। बेरोजगार युवाओं को कथित तौर पर कॉकरोच कहे जाने से उपजे इस हैशटैग को कांग्रेस ने केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहने दिया। कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई और युवा कांग्रेस ने इस डिजिटल आक्रोश को सड़क पर उतारा। जम्मू, लुधियाना, कोल्हापुर से लेकर जयपुर तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पानी की बौछारें झेलकर युवाओं की इस नाराजगी को एक सशक्त सत्ता विरोधी जमीनी आंदोलन में तब्दील कर दिया है।
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तानाशाही के खिलाफ राहुल गांधी का ऐतिहासिक संघर्ष: 100 साल का इकलौता उदाहरण
विपक्ष की भूमिका और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार से सीधे टकराव पर सप्पल ने राहुल गांधी के संघर्ष को ऐतिहासिक करार दिया। केंद्र सरकार को एक "तानाशाही वाली सरकार" बताते हुए उन्होंने कहा कि आज चुनाव आयोग जैसी संस्थाएं साथ नहीं हैं, अदालतों का पूरा साथ नहीं मिलता और तमाम संस्थाएं सरेंडर कर चुकी हैं। सप्पल का दावा है कि पिछले 100 साल के वैश्विक लोकतांत्रिक इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता जहां सारी संस्थाओं पर कब्जा कर चुकी किसी तानाशाही सरकार के सामने कोई लोकतांत्रिक ताकत इतने लंबे समय तक टिक पाई हो।

उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में राहुल गांधी पर पेगासस लगाया गया, उन्हें कोर्ट केसों में फंसाया गया और उनकी छवि बिगाड़ने के लिए प्रोपेगेंडा की पूरी मशीनरी झोंक दी गई। इसके बावजूद सरकार उन पर एक भी आरोप सिद्ध नहीं कर पाई। सप्पल के मुताबिक, लांछन और हार झेलने के बावजूद राहुल गांधी का बिना डरे लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में खड़े रहना देश की जनता और युवाओं के लिए एक बड़ी नैतिक ताकत बन गया है।

नीट विवाद और संस्थागत संकट
देशव्यापी प्रतियोगी परीक्षाओं विशेषकर नीट  और एसएससी जैसी परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं को उन्होंने एक गंभीर संस्थागत संकट माना। सप्पल के अनुसार, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी जैसी संस्था को बिना किसी ठोस जवाबदेही और बिना यूपीएससी जैसी पारदर्शी ऑडिट व्यवस्था के स्थापित करना एक बड़ी नीतिगत भूल थी। परीक्षा प्रणाली में 'ठेका प्रथा' लागू करने से यह स्थिति बनी है। यह केवल प्रशासनिक नाकामी नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्थागत ढांचे की विफलता है जिसने लाखों युवाओं के भविष्य और सिस्टम पर उनके भरोसे को गहरी चोट पहुंचाई है।

संगठन में फैसले और रणनीतिक समन्वय
पार्टी के भीतर दो सत्ता केंद्रों की अटकलों को खारिज करते हुए सप्पल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के दफ्तरों के बीच पूर्ण रणनीतिक समन्वय है। कर्नाटक और पंजाब जैसे राज्यों के अहम फैसले बिना किसी बाहरी लीक के, राजनीतिक सलाहकारों की जमीनी रिपोर्ट और व्यापक आंतरिक चर्चा के बाद ही लिए जाते हैं।

नेताओं का मूल्यांकन और आंतरिक लोकतंत्र
सप्पल के मुताबिक, कांग्रेस के भीतर विभिन्न विचारों और असहमतियों के लिए हमेशा जगह रही है, जो उसकी लोकतांत्रिक जड़ों को जीवंत रखती है। नेताओं के मूल्यांकन के दौरान उन्होंने प्रियंका गांधी को प्रखर वक्ता, मल्लिकार्जुन खरगे को अनुभव का आधार और सोनिया गांधी को पार्टी के लिए त्याग का बड़ा उदाहरण बताया। जबकि इसके उलट उनका मानना है कि मौजूदा सत्ता पक्ष एक एकाधिकारवादी ढांचे पर काम कर रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को सप्पल ने लोकतांत्रिक करार दिया, लेकिन जोड़ा कि मौजूदा सत्ता पक्ष को अब उस आवरण की जरूरत नहीं रह गई है।

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