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News Updates: गगनयान मिशन के लिए इसरो का दूसरा एयर ड्रॉप परीक्षण भी सफल; ओडिशा में डायरिया से एक की मौत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: Nitin Gautam
Updated Sat, 11 Apr 2026 05:13 AM IST
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न्यूज अपडेट
- फोटो : Amar Ujala
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ओडिशा के जाजपुर जिले में डायरिया का प्रकोप फैल गया है, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य लोग बीमार पड़ गए हैं। डायरिया धर्मशाला ब्लॉक के अंजीरा पंचायत के बौंसाडोला गांव में फैला। मृतक की पहचान 36 वर्षीय बादल मोहंती के रूप में हुई है। बताया गया कि बुधवार रात सबसे पहले बादल मोहंती को डायरिया के लक्षण दिखने पर धर्मशाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती कराया गया। उसी रात गांव के दो अन्य लोगों को भी इसी बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती किया गया।
इसके बाद गुरुवार को उसी गांव के आठ और लोग बीमार होने पर सीएचसी में भर्ती हुए। हालांकि इलाज के दौरान बादल मोहंती की मौत हो गई। अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित 10 लोगों में से चार को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि छह अन्य मरीजों का इलाज धर्मशाला सीएचसी में जारी है और उनकी हालत में सुधार हो रहा है। स्थिति का जायजा लेने के लिए जाजपुर के मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय कुमार मिश्रा शुक्रवार को गांव पहुंचे। जिला स्वास्थ्य विभाग का प्राथमिक अनुमान है कि यह प्रकोप दूषित पानी के सेवन के कारण फैला है।
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इसके बाद गुरुवार को उसी गांव के आठ और लोग बीमार होने पर सीएचसी में भर्ती हुए। हालांकि इलाज के दौरान बादल मोहंती की मौत हो गई। अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित 10 लोगों में से चार को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि छह अन्य मरीजों का इलाज धर्मशाला सीएचसी में जारी है और उनकी हालत में सुधार हो रहा है। स्थिति का जायजा लेने के लिए जाजपुर के मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय कुमार मिश्रा शुक्रवार को गांव पहुंचे। जिला स्वास्थ्य विभाग का प्राथमिक अनुमान है कि यह प्रकोप दूषित पानी के सेवन के कारण फैला है।
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वित्त वर्ष 2026 में वंदे भारत एक्सप्रेस से 4 करोड़ यात्रियों ने किया सफर, 34 प्रतिशत की वृद्धि
वंदे भारत एक्सप्रेस नेटवर्क में वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान यात्रियों की संख्या में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रेल मंत्रालय के अनुसार, लगभग 4 करोड़ यात्रियों ने इन सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों में सफर किया, जो साल-दर-साल 34 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। फरवरी 2019 में नई दिल्ली–वाराणसी मार्ग पर शुरुआत के बाद, वंदे भारत एक्सप्रेस अब पूरे देश में फैल चुका नेटवर्क बन गया है और अब तक एक लाख से अधिक यात्राओं के जरिए 9.1 करोड़ से ज्यादा यात्रियों को सेवा दे चुका है।
रेल मंत्रालय ने बताया, 'भारतीय रेल ने वंदे भारत एक्सप्रेस नेटवर्क पर यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है। केवल वित्त वर्ष 2025–26 में ही लगभग 3.98 करोड़ यात्रियों ने यात्रा की, जो पिछले वित्त वर्ष 2024–25 के 2.97 करोड़ यात्रियों के मुकाबले करीब 34 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी है।' मंत्रालय ने कहा कि ये ट्रेनें ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत देश में ही डिजाइन और निर्मित की गई हैं और भारत के रेलवे क्षेत्र में गति, दक्षता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनकर उभरी हैं।
विभिन्न मार्गों में नई दिल्ली–वाराणसी रूट सबसे व्यस्त बना हुआ है, जहां अब तक 73 लाख से अधिक यात्रियों ने यात्रा की है। नई दिल्ली–श्री माता वैष्णो देवी कटरा रूट पर लगभग 56 लाख यात्रियों ने सफर किया है, जो धार्मिक पर्यटन के लिए इसकी अहमियत को दिखाता है। दक्षिण भारत में सिकंदराबाद–विशाखापत्तनम रूट पर 48 लाख से ज्यादा यात्री यात्रा कर चुके हैं, जबकि चेन्नई–मैसूर मार्ग पर 36 लाख से अधिक यात्रियों ने सफर किया है। इन ट्रेनों ने पर्यटन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, क्योंकि इन्होंने धार्मिक, सांस्कृतिक और तटीय क्षेत्रों से कनेक्टिविटी बेहतर की है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा मिला है और पर्यटकों की संख्या बढ़ी है।
अपनी सेवाओं को और बढ़ाते हुए, भारतीय रेलवे ने जनवरी 2026 में वंदे भारत स्लीपर सेवा शुरू की, ताकि लंबी दूरी की यात्रा को और बेहतर बनाया जा सके। शुरुआत के केवल तीन महीनों में ही इस सेवा ने 119 यात्राओं के जरिए 1.21 लाख यात्रियों को सेवा दी और 100 प्रतिशत से अधिक ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई। --आईएएनएस एएमटी/डीकेपी
रेल मंत्रालय ने बताया, 'भारतीय रेल ने वंदे भारत एक्सप्रेस नेटवर्क पर यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है। केवल वित्त वर्ष 2025–26 में ही लगभग 3.98 करोड़ यात्रियों ने यात्रा की, जो पिछले वित्त वर्ष 2024–25 के 2.97 करोड़ यात्रियों के मुकाबले करीब 34 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी है।' मंत्रालय ने कहा कि ये ट्रेनें ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत देश में ही डिजाइन और निर्मित की गई हैं और भारत के रेलवे क्षेत्र में गति, दक्षता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनकर उभरी हैं।
विभिन्न मार्गों में नई दिल्ली–वाराणसी रूट सबसे व्यस्त बना हुआ है, जहां अब तक 73 लाख से अधिक यात्रियों ने यात्रा की है। नई दिल्ली–श्री माता वैष्णो देवी कटरा रूट पर लगभग 56 लाख यात्रियों ने सफर किया है, जो धार्मिक पर्यटन के लिए इसकी अहमियत को दिखाता है। दक्षिण भारत में सिकंदराबाद–विशाखापत्तनम रूट पर 48 लाख से ज्यादा यात्री यात्रा कर चुके हैं, जबकि चेन्नई–मैसूर मार्ग पर 36 लाख से अधिक यात्रियों ने सफर किया है। इन ट्रेनों ने पर्यटन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, क्योंकि इन्होंने धार्मिक, सांस्कृतिक और तटीय क्षेत्रों से कनेक्टिविटी बेहतर की है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा मिला है और पर्यटकों की संख्या बढ़ी है।
अपनी सेवाओं को और बढ़ाते हुए, भारतीय रेलवे ने जनवरी 2026 में वंदे भारत स्लीपर सेवा शुरू की, ताकि लंबी दूरी की यात्रा को और बेहतर बनाया जा सके। शुरुआत के केवल तीन महीनों में ही इस सेवा ने 119 यात्राओं के जरिए 1.21 लाख यात्रियों को सेवा दी और 100 प्रतिशत से अधिक ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई। --आईएएनएस एएमटी/डीकेपी
गगनयान मिशन के लिए इसरो का दूसरा एयर ड्रॉप परीक्षण भी सफल
भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की तैयारी में बड़ी कामयाबी मिली है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया। यह टेस्ट गगनयान मिशन के लिए तैयार किए गए पैराशूट सिस्टम की असली परिस्थितियों की जांच करने के लिए किया गया। इसका मकसद गगनयान मिशन से पहले पैराशूट खुलने के प्रोसेस को चेक करना था। ये प्रोसेस मिशन के समय अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी तय करेगी।
परीक्षण के दौरान लगभग 5.7 टन वजनी डमी क्रू कैप्सूल को वायुसेना के चिनूक हेलिकॉप्टर से 3 किमी की ऊंचाई से छोड़ा गया। कैप्सूल ने समुद्र में सुक्षित लैंडिंग की। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसरो को बधाई दी और बताया कि गगनयान के अगले साल अंतरिक्ष में प्रक्षेपित होने की संभावना है। पहला परीक्षण 24 अगस्त, 2025 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में हुआ था। एयर ड्रॉप परीक्षण में अंतरिक्ष यान की पृथ्वी पर वापसी के अंतिम चरण की प्रक्रिया का अभ्यास किया जाता है। विभिन्न परिस्थितियों में विभिन्न प्रणालियों का परीक्षण करने के लिए एक विमान या हेलिकॉप्टर अंतरिक्ष यान को एक निश्चित ऊंचाई से गिराता है।
परीक्षण के दौरान लगभग 5.7 टन वजनी डमी क्रू कैप्सूल को वायुसेना के चिनूक हेलिकॉप्टर से 3 किमी की ऊंचाई से छोड़ा गया। कैप्सूल ने समुद्र में सुक्षित लैंडिंग की। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसरो को बधाई दी और बताया कि गगनयान के अगले साल अंतरिक्ष में प्रक्षेपित होने की संभावना है। पहला परीक्षण 24 अगस्त, 2025 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में हुआ था। एयर ड्रॉप परीक्षण में अंतरिक्ष यान की पृथ्वी पर वापसी के अंतिम चरण की प्रक्रिया का अभ्यास किया जाता है। विभिन्न परिस्थितियों में विभिन्न प्रणालियों का परीक्षण करने के लिए एक विमान या हेलिकॉप्टर अंतरिक्ष यान को एक निश्चित ऊंचाई से गिराता है।