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'ई20 पेट्रोल के खिलाफ पैसे देकर चलाया गया अभियान': नितिन गडकरी ने किया बड़ा दावा, कहा- अब खत्म हो गया शोर
Tue, 27 Oct 2026 02:33 PM IST
अमन मौर्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन मौर्या
Updated Tue, 27 Oct 2026 02:33 PM IST
सार
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का विरोध एक 'पेड कैंपेन' था। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि अगले दो वर्षों में राजमार्गों की स्थिति बेहतर हो जाएगी और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा।
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नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने को लेकर बड़ा बयान दिया है। केंद्रीय मंत्री ने मंगलवार को बताया कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने को लेकर हुआ विरोध एक पेड कैंपेन (पैसे देकर चलाया गया अभियान) था। यह बयान सरकार द्वारा 'केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989' में बदलाव की अधिसूचना जारी करने के एक दिन बाद आया है। इन बदलावों के तहत अब ऐसे 'फ्लेक्स-फ्यूल' वाहनों को अनुमति दी गई है, जो ई100 (लगभग शुद्ध इथेनॉल) तक पर चल सकते हैं।
ये भी पढ़ें: केरलम: 33 हफ्ते के गर्भ में पल रहा बच्चा, जन्म के बाद नहीं रखेंगे मां-पिता; कोर्ट ने किसे सौंपने की दी अनुमति?
उद्योग संगठन सीआआइ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, गडकरी ने कहा कि भारत जीवाश्म ईंधन के आयात को कम करके अपनी कीमती विदेशी मुद्रा बचा सकता है। उन्होंने कहा, 'तीन महीने पहले, ई20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल) ईंधन के खिलाफ काफी हंगामा किया गया था; अब ई20 ईंधन के खिलाफ सारा विरोध खत्म हो गया है। यह एक 'पेड कैंपेन' था।' मंत्री ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर कुछ राजमार्गों की खराब हालत को लेकर आई शिकायतों पर ध्यान देते हुए, उन्होंने हाल ही में 700-800 परियोजनाओं की समीक्षा की है। उन्होंने कहा, 'मैं राजमार्गों की गुणवत्ता के मामले में कोई समझौता नहीं करने वाला हूं।' गडकरी ने भरोसा दिलाया कि अगले दो वर्षों में, राजमार्गों का इस्तेमाल करने वालों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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हरदीप सिंह पुरी ने क्या कहा?
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार की पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की मौजूदा 20 प्रतिशत की सीमा को बढ़ाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। दक्षिण गोवा में '29वें एनर्जी टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन मीट' के उद्घाटन के दौरान, पुरी ने यह भी कहा कि बायोफ्यूल (जैव ईंधन) के बारे में गलत जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि ई20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल) के बारे में फैलाई जा रही गलत जानकारी एक सोची-समझी कहानी (नैरेटिव) है। ई20 ईंधन से जुड़ी चर्चाओं पर एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, 'जहां तक बायोफ्यूल की बात है, तो हमारा लक्ष्य 20 प्रतिशत (इथेनॉल मिलाना) ही था और अभी इसे 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की कोई इच्छा नहीं है।' उन्होंने आगे कहा कि इस मुद्दे पर गलत जानकारी फैलाई जा रही है।
उन्होंन कहा कि सरकार आयातित कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है। कच्चा तेल आयात करना देश के 'करंट अकाउंट डेफिसिट' (चालू खाता घाटा) के सबसे बड़े कारणों में से एक है। देश में पहले ही ई20 ईंधन पेश किया जा चुका है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है।
ई20 पेट्रोल को लेकर विवाद क्यों हुआ?
ई20 पेट्रोल को लेकर विवाद तब बढ़ा, जब वाहन चालकों ने शिकायत की कि इस ईंधन के इस्तेमाल से गाड़ियों का माइलेज घट रहा है और पुराने वाहनों के इंजन तथा अन्य पुर्जों पर असर पड़ सकता है। ई20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति को प्रदूषण कम करने, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और किसानों की आय बढ़ाने की पहल बताया है।
विवाद की एक बड़ी वजह यह रही कि कई उपभोक्ताओं को पेट्रोल के कम एथेनॉल वाले विकल्प उपलब्ध न होने की शिकायत थी। कुछ वाहन मालिकों ने माइलेज में उल्लेखनीय गिरावट का दावा भी किया। हालांकि, सरकार के मुताबिक, पुराने वाहनों में ईंधन दक्षता लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक प्रभावित हो सकती है। सरकार ने यह भी कहा कि निर्धारित मानकों के अनुरूप ई20 के इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने के प्रमाण नहीं मिले हैं।
ये भी पढ़ें: 'खरगे 83-84 साल के, ऐसी बातें कह सकते हैं': पीएम पर टिप्पणी को लेकर सौगत रॉय ने किया बचाव, क्या है विवाद?
इस मुद्दे ने राजनीतिक रूप भी ले लिया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ई20 के खिलाफ चल रहे ऑनलाइन विरोध को कथित तौर पर प्रायोजित अभियान बताया। दूसरी ओर, उपभोक्ताओं ने ईंधन के विकल्प, पारदर्शिता और संभावित अतिरिक्त खर्च को लेकर सवाल उठाए। इस तरह विवाद का केंद्र पर्यावरणीय लाभों के साथ वाहन चालकों की लागत और ईंधन की अनुकूलता बना हुआ है।
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उद्योग संगठन सीआआइ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, गडकरी ने कहा कि भारत जीवाश्म ईंधन के आयात को कम करके अपनी कीमती विदेशी मुद्रा बचा सकता है। उन्होंने कहा, 'तीन महीने पहले, ई20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल) ईंधन के खिलाफ काफी हंगामा किया गया था; अब ई20 ईंधन के खिलाफ सारा विरोध खत्म हो गया है। यह एक 'पेड कैंपेन' था।' मंत्री ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर कुछ राजमार्गों की खराब हालत को लेकर आई शिकायतों पर ध्यान देते हुए, उन्होंने हाल ही में 700-800 परियोजनाओं की समीक्षा की है। उन्होंने कहा, 'मैं राजमार्गों की गुणवत्ता के मामले में कोई समझौता नहीं करने वाला हूं।' गडकरी ने भरोसा दिलाया कि अगले दो वर्षों में, राजमार्गों का इस्तेमाल करने वालों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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हरदीप सिंह पुरी ने क्या कहा?
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार की पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की मौजूदा 20 प्रतिशत की सीमा को बढ़ाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। दक्षिण गोवा में '29वें एनर्जी टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन मीट' के उद्घाटन के दौरान, पुरी ने यह भी कहा कि बायोफ्यूल (जैव ईंधन) के बारे में गलत जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि ई20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल) के बारे में फैलाई जा रही गलत जानकारी एक सोची-समझी कहानी (नैरेटिव) है। ई20 ईंधन से जुड़ी चर्चाओं पर एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, 'जहां तक बायोफ्यूल की बात है, तो हमारा लक्ष्य 20 प्रतिशत (इथेनॉल मिलाना) ही था और अभी इसे 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की कोई इच्छा नहीं है।' उन्होंने आगे कहा कि इस मुद्दे पर गलत जानकारी फैलाई जा रही है।
उन्होंन कहा कि सरकार आयातित कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है। कच्चा तेल आयात करना देश के 'करंट अकाउंट डेफिसिट' (चालू खाता घाटा) के सबसे बड़े कारणों में से एक है। देश में पहले ही ई20 ईंधन पेश किया जा चुका है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है।
ई20 पेट्रोल को लेकर विवाद क्यों हुआ?
ई20 पेट्रोल को लेकर विवाद तब बढ़ा, जब वाहन चालकों ने शिकायत की कि इस ईंधन के इस्तेमाल से गाड़ियों का माइलेज घट रहा है और पुराने वाहनों के इंजन तथा अन्य पुर्जों पर असर पड़ सकता है। ई20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति को प्रदूषण कम करने, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और किसानों की आय बढ़ाने की पहल बताया है।
विवाद की एक बड़ी वजह यह रही कि कई उपभोक्ताओं को पेट्रोल के कम एथेनॉल वाले विकल्प उपलब्ध न होने की शिकायत थी। कुछ वाहन मालिकों ने माइलेज में उल्लेखनीय गिरावट का दावा भी किया। हालांकि, सरकार के मुताबिक, पुराने वाहनों में ईंधन दक्षता लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक प्रभावित हो सकती है। सरकार ने यह भी कहा कि निर्धारित मानकों के अनुरूप ई20 के इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने के प्रमाण नहीं मिले हैं।
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इस मुद्दे ने राजनीतिक रूप भी ले लिया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ई20 के खिलाफ चल रहे ऑनलाइन विरोध को कथित तौर पर प्रायोजित अभियान बताया। दूसरी ओर, उपभोक्ताओं ने ईंधन के विकल्प, पारदर्शिता और संभावित अतिरिक्त खर्च को लेकर सवाल उठाए। इस तरह विवाद का केंद्र पर्यावरणीय लाभों के साथ वाहन चालकों की लागत और ईंधन की अनुकूलता बना हुआ है।