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'किसी खास घटना से संबंध नहीं': आईटीबीपी डीजी शत्रुजीत कपूर का बयान नियमित तैयारियों से जुड़ा; सूत्रों का दावा

Fri, 23 Oct 2026 04:59 PM IST
निर्मल कांत आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 23 Oct 2026 04:59 PM IST
सार

आईटीबीपी प्रमुख के चीन सीमा पर चीनी सैनिकों से आमना-सामना होने के बयान के बाद चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि यह बयान नियमित तैयारियों और जवानों की तैनाती से जुड़ा था, किसी खास घटना से नहीं। 

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'No specific incident': ITBP chief's remarks on China reflect routine preparedness, deployments, say sources
आईटीबीपी डीजी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक (डीजी) शत्रुजीत कपूर के चीन के साथ सीमा पर स्थिति को लेकर दिए गए बयान को लेकर बहस जारी है। इस बीच सूत्रों ने कहा कि यह बयान सीमा पर नियमित परिचालन तैयारियों और जवानों की तैनाती के संदर्भ में दिया गया था। इसका किसी खास घटना से संबंध नहीं था।
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सूत्रों के मुताबिक, आईटीबीपी भारत और चीन के बीच सीमा की सुरक्षा करती है। यह बल सरकार की नीतियों के अनुसार काम करता है। अलग-अलग परिस्थितियों में जारी निर्देशों और तय मानक संचालन प्रक्रियाओं का भी पालन करता है। इस मामले पर आईटीबीपी जल्द ही आधिकारिक बयान जारी कर सकती है।
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चीनी सैनिकों से कहां हुआ आमना-सामना?
आईटीबीपी प्रमुख शत्रुजीत कपूर ने गुरुवार को कहा था कि पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर कई जगहों पर चीनी सैनिकों के साथ आमना-सामना हुआ है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति अब भी बनी हुई है। कपूर ने राजस्थान के अलवर में आईटीबीपी के एक ठिकाने पर जवानों को संबोधित करते हुए कहा, पिछले कुछ दिनों में ऐसी स्थिति बनी, जब अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर आमना-सामना हुआ। यह स्थिति अब भी जारी है। 

इस महीने के आखिर में सेवानिवृत्त होने वाले आईटीबीपी प्रमुख ने एक नई लड़ाकू इकाई के गठन का भी जिक्र किया। इसका नाम शौर्य कमांडो है। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों के साथ जारी आमने-सामने की स्थितियों के दौरान इन जवानों ने अपनी क्षमता दिखाई है। उन्होंने कहा कि शौर्य कमांडो को सीमा पर तैनात हर बटालियन में शामिल किया जाएगा। इससे बल की परिचालन क्षमता बढ़ेगी। साथ ही, उसे एक अलग पहचान भी मिलेगी।

कब बनी थी आईटीबीपी और क्या है इसकी जिम्मेदारी?
आईटीबीपी की स्थापना 1962 में हुई थी। यह बल भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। हिमालयी सीमा पर सुरक्षा बनाए रखने में इस बल की अहम भूमिका है। यहां दुर्गम इलाका और बेहद खराब मौसम सुरक्षा से जुड़े अभियानों को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।

भारत-चीन संबंधों की स्थिति क्या है?
शत्रुजीत कपूर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और चीन कई वर्षों के सैन्य तनाव के बाद अपने द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। यह तनाव वास्तविक नियंत्रण रेखा के आसपास बना रहा है।

ये भी पढ़ें: आईटीबीपी प्रमुख का बड़ा बयान: 'अरुणाचल में चीनी सेना से अब भी हो रहा आमना-सामना'; कांग्रेस ने सरकार को घेरा

पिछले महीने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने एक समाचार चैनल के समिट में कहा था कि सीमा पर स्थिति स्थिर है। उन्होंने कहा था कि चिंता की कोई वजह नहीं है।




विदेश मंत्री जयशंकर ने क्या कहा था?
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी पिछले सप्ताह जोर दिया था कि दोनों देशों के संबंध सामान्य करने के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि सीमा पर शांति भंग होने का असर दोनों देशों के संबंधों पर पड़ेगा।

क्यों बना रहा सैन्य गतिरोध?
भारत और चीन अक्तूबर 2024 में पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध खत्म करने के लिए बनी सहमति के बाद अपने संबंधों को फिर से बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह गतिरोध चार साल से ज्यादा समय तक चला था। इससे दोनों देशों के संबंधों पर गंभीर असर पड़ा था।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आए थे। सात साल में यह उनकी भारत की पहली यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी की। दोनों नेताओं ने संबंधों की समीक्षा की और आपसी सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
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