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Maharashtra: 'बालासाहेब से न मिल पाना ज्यादा तकलीफदेह था', चाचा के साथ गहरे रिश्तों को याद कर बोले राज ठाकरे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 23 Jan 2026 01:05 PM IST
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सार
Maharashtra: मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने अपने दिवंगत चाचा बाल ठाकरे को याद करते हुए कहा कि शिवसेना छोड़ने से ज्यादा दर्द उन्हें चाचा से दूर होना और मातोश्री छोड़ना था। बाल ठाकरे को श्रद्धांजलि देते हुए एक लेख में उन्होंने बताया कि उनके चाचा उनके पीछे चट्टान की तरह खड़े रहे। पढ़िए रिपोर्ट-
राज ठाकरे
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि शिवसेना छोड़ने के बाद पार्टी संस्थापक बाल ठाकरे से अक्सर न मिल पाना, पार्टी छोड़ने से भी ज्यादा दर्दनाक था। उन्होंने कहा कि उनके दिवंगत चाचा बाल ठाकरे उनके पीछे चट्टान की तरह खड़े रहे।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के मुखपत्र 'सामना' में बाल ठाकरे को उनकी जन्मशती पर श्रद्धांजलि दी गई। इसमें राज ने चाचा के साथ अपने गहरे रिश्तों को याद किया। उन्होंने कहा कि 2005 में पार्टी छोड़ने के बाद मातोश्री से दूर रहना उनके राजनीतिक फैसलों से कहीं ज्यादा तकलीफदेह था।
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जब बाल ठाकरे ने लैंडलाइन फोन पर सुना राज का भाषण
राज ने लिखा, 10991 में जब वह शिवसेना (अविभाजित) की छात्रा शाखा के प्रमुख थे और काला घोड़ा में रैली निकाली गई थी, तब बाल ठाकरे ने एक सार्वजनिक लैंडलाइन फोन के जरिये उनका भाषण सुना था। मनसे प्रमुख ने यह भी याद किया कि बचपन में जब उन्हें जलने से चोट लगी थी, तब उनके चाचा ने दो महीने तक एंटी सेप्टिक से उनके घावों की खुद देखभाल की थी।
लेख में राज ने कहा, जब मैंने अलग होने का फैसला किया, तो एक बात मुझे लगातार परेशान कर रही थी कि मैं पहले की तरह अपने लोगों से अक्सर नहीं मिल पाऊंगा। मैं अपने पिता को पहले ही खो चुका था और अब अपने चाचा से भी दूर जा रहा था। यह ख्याल मुझे अंदर से खाए जा रहा था। पार्टी छोड़ने से ज्यादा तकलीफदेह मातोश्री छोड़ना था।
राज ठाकरे ने बताया कैसे चट्टान की तरह पीछे खड़े रहे बाल ठाकरे?
राज ठाकरे ने 2005 में अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे पर आरोप लगाते हुए शिवसेना (अविभाजित) छोड़ दी थी और एक साल बाद मनसे का गठन किया था। उन्होंने लिखा, मेरे चाचा बालासाहेब केशव ठाकरे का मेरे बचपन और युवा अवस्था पर गहरा असर था। वह मेरे पीछे एक चट्टान की तरह खड़े रहे। मनसे प्रमुख ने यह भी याद करते हुए लिखा कि एक बार जब वह वाहन में सफर कर रहे थे, तो उसे एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी, तब बाल ठाकरे ने खुद फोन कर उनकी कुशलक्षेम पूछी थी।
ये भी पढ़ें: 'विकसित भारत बनाने के लिए देश एकजुट', तिरुवनंतपुरम रैली में PM मोदी ने जारी किया स्वनिधि क्रेडिट कार्ड
चाचा की आदतों को याद कर क्या बोले राज ठाकरे?
अपने चाचा की आदतों को याद करते हुए राज ने कहा, पाकिस्तान का विरोध करने के बावजूद बाल ठाकरे मेहदी हसन और गुलाम अली की गजलें सुनना कभी नहीं छोड़ते थे। उन्होंने यह भी बताया कि अभिनेता-फिल्मकार राज कपूर ने 1970 की फिल्म 'मेरा नाम जोकर' में किन हिस्सों को संपादित किया जाना चाहिए, इस पर सलाह के लिए शिवसेना प्रमुख से बात की थी। उस समय बाल ठाकरे फिल्म को कम्युनिस्ट समर्थक मानते थे और तब शिवसेना (अविभाजित) और कम्युनिस्ट मुंबई में प्रतिद्वंद्वी थे।
राज ठाकरे ने कहा कि बाल ठाकरे ने अभिनेता अमिताभ बच्चन और उनके भाई अजिताभ बच्चन की नकारात्मक छवि की समस्या भी सुलझाई थी, जब बोफोर्स घोटाले के दौरान दोनों आलोचनाओं से घिरे हुए थे। उनके मुताबिक, शिवसेना संस्थापक ने अमिताभ बच्च को तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह को पत्र लिखने की सलाह दी थी और उस पत्र से उनके खिलाफ चल रही नकारात्मक बहस कम हो गई थी।
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शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के मुखपत्र 'सामना' में बाल ठाकरे को उनकी जन्मशती पर श्रद्धांजलि दी गई। इसमें राज ने चाचा के साथ अपने गहरे रिश्तों को याद किया। उन्होंने कहा कि 2005 में पार्टी छोड़ने के बाद मातोश्री से दूर रहना उनके राजनीतिक फैसलों से कहीं ज्यादा तकलीफदेह था।
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जब बाल ठाकरे ने लैंडलाइन फोन पर सुना राज का भाषण
राज ने लिखा, 10991 में जब वह शिवसेना (अविभाजित) की छात्रा शाखा के प्रमुख थे और काला घोड़ा में रैली निकाली गई थी, तब बाल ठाकरे ने एक सार्वजनिक लैंडलाइन फोन के जरिये उनका भाषण सुना था। मनसे प्रमुख ने यह भी याद किया कि बचपन में जब उन्हें जलने से चोट लगी थी, तब उनके चाचा ने दो महीने तक एंटी सेप्टिक से उनके घावों की खुद देखभाल की थी।
लेख में राज ने कहा, जब मैंने अलग होने का फैसला किया, तो एक बात मुझे लगातार परेशान कर रही थी कि मैं पहले की तरह अपने लोगों से अक्सर नहीं मिल पाऊंगा। मैं अपने पिता को पहले ही खो चुका था और अब अपने चाचा से भी दूर जा रहा था। यह ख्याल मुझे अंदर से खाए जा रहा था। पार्टी छोड़ने से ज्यादा तकलीफदेह मातोश्री छोड़ना था।
राज ठाकरे ने बताया कैसे चट्टान की तरह पीछे खड़े रहे बाल ठाकरे?
राज ठाकरे ने 2005 में अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे पर आरोप लगाते हुए शिवसेना (अविभाजित) छोड़ दी थी और एक साल बाद मनसे का गठन किया था। उन्होंने लिखा, मेरे चाचा बालासाहेब केशव ठाकरे का मेरे बचपन और युवा अवस्था पर गहरा असर था। वह मेरे पीछे एक चट्टान की तरह खड़े रहे। मनसे प्रमुख ने यह भी याद करते हुए लिखा कि एक बार जब वह वाहन में सफर कर रहे थे, तो उसे एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी, तब बाल ठाकरे ने खुद फोन कर उनकी कुशलक्षेम पूछी थी।
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चाचा की आदतों को याद कर क्या बोले राज ठाकरे?
अपने चाचा की आदतों को याद करते हुए राज ने कहा, पाकिस्तान का विरोध करने के बावजूद बाल ठाकरे मेहदी हसन और गुलाम अली की गजलें सुनना कभी नहीं छोड़ते थे। उन्होंने यह भी बताया कि अभिनेता-फिल्मकार राज कपूर ने 1970 की फिल्म 'मेरा नाम जोकर' में किन हिस्सों को संपादित किया जाना चाहिए, इस पर सलाह के लिए शिवसेना प्रमुख से बात की थी। उस समय बाल ठाकरे फिल्म को कम्युनिस्ट समर्थक मानते थे और तब शिवसेना (अविभाजित) और कम्युनिस्ट मुंबई में प्रतिद्वंद्वी थे।
राज ठाकरे ने कहा कि बाल ठाकरे ने अभिनेता अमिताभ बच्चन और उनके भाई अजिताभ बच्चन की नकारात्मक छवि की समस्या भी सुलझाई थी, जब बोफोर्स घोटाले के दौरान दोनों आलोचनाओं से घिरे हुए थे। उनके मुताबिक, शिवसेना संस्थापक ने अमिताभ बच्च को तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह को पत्र लिखने की सलाह दी थी और उस पत्र से उनके खिलाफ चल रही नकारात्मक बहस कम हो गई थी।