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एनएसजी में नारी शक्ति की नई छलांग: पहली बार शुरू हुआ महिला कमांडो प्रशिक्षण, क्या है पूरी तैयारी?
Tue, 25 Aug 2026 02:04 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 25 Aug 2026 02:04 PM IST
सार
एनएसजी ने महिला कर्मियों के लिए पहली बार विशेष कमांडो प्रशिक्षण शुरू किया है। 12 हफ्तों की कड़ी तैयारी में वे हथियार चलाने से लेकर बंधक बचाव तक की ट्रेनिंग लेंगी। यह पहल देश की आतंकवाद-रोधी व्यवस्था में महिलाओं की ऑपरेशनल भूमिका को नई मजबूती दे सकती है।
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एनएसजी
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
देश में आतंकवाद से लड़ने की तैयारी में अब महिलाओं की भूमिका और बढ़ेगी। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड यानी एनएसजी ने महिला कर्मियों के लिए एक खास प्रशिक्षण शुरू किया है। मानेसर स्थित एनएसजी प्रशिक्षण अकादमी में पहला महिला कमांडो प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू हुआ है। इसमें राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की महिला कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
12 हफ्तों तक चलेगी कड़ी तैयारी
यह प्रशिक्षण 12 हफ्तों तक चलेगा। इसका मकसद महिला कर्मियों को कठिन अभियानों के लिए तैयार करना है। उन्हें शारीरिक रूप से मजबूत बनाया जाएगा। साथ ही जरूरी तकनीकी और ऑपरेशनल कौशल भी सिखाए जाएंगे। प्रशिक्षण के दौरान हथियार चलाना और निशानेबाजी सिखाई जाएगी। सामरिक कार्रवाई की भी ट्रेनिंग होगी। महिला कर्मी बंधकों को बचाने और आतंकवाद-रोधी अभियानों से जुड़ी दूसरी विशेष जिम्मेदारियों की तैयारी भी करेंगी।
कमांडो प्रशिक्षण पाठ्यक्रम से जुड़ी जरूरी बातें
अलग-अलग बलों को मिलेगा फायदा
एनएसजी का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल महिला कर्मियों की व्यक्तिगत क्षमता बढ़ाना नहीं है। इसके जरिए अलग-अलग सुरक्षा बलों तक एनएसजी की विशेष आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञता भी पहुंचाई जाएगी। प्रशिक्षण से अलग-अलग बलों में काम करने वाली प्रशिक्षित महिला कर्मियों का दायरा बढ़ेगा। इससे पेशेवर कामकाज के समान मानकों को बढ़ावा मिलेगा। सुरक्षा बलों के बीच आपसी तालमेल भी मजबूत होगा।
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यह भी पढ़ें: पीएम मोदी की सप्तधारा का संदेश घर-घर पहुंचाएगी भाजपा: संबित पात्रा बोले- सही लक्ष्य से उज्ज्वल होगा भविष्य
अपने बलों में ले जाएंगी अनुभव
पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद महिला कर्मी अपने-अपने बलों में लौटेंगी। वहां वे प्रशिक्षण के दौरान सीखे कौशल और ऑपरेशनल जानकारी का इस्तेमाल कर सकेंगी। एनएसजी को उम्मीद है कि इससे अलग-अलग संस्थानों की तैयारी मजबूत होगी। आतंकवाद से निपटने की क्षमता भी व्यापक स्तर पर बढ़ेगी। देश के अलग-अलग सुरक्षा बलों में विशेष प्रशिक्षण का लाभ पहुंच सकेगा।
महिलाओं की ऑपरेशनल भूमिका होगी मजबूत
एनएसजी ने कहा कि यह पहल केवल सुरक्षा जिम्मेदारियों में महिलाओं की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसका बड़ा उद्देश्य उन्हें ऑपरेशनल क्षमता के जरिए सशक्त बनाना है। प्रशिक्षण के बाद महिला कर्मियों को कठिन और विशेष जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया जाएगा। वे आंतरिक सुरक्षा की बदलती चुनौतियों से निपटने में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगी। एनएसजी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी इसे नारी शक्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया है।
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12 हफ्तों तक चलेगी कड़ी तैयारी
यह प्रशिक्षण 12 हफ्तों तक चलेगा। इसका मकसद महिला कर्मियों को कठिन अभियानों के लिए तैयार करना है। उन्हें शारीरिक रूप से मजबूत बनाया जाएगा। साथ ही जरूरी तकनीकी और ऑपरेशनल कौशल भी सिखाए जाएंगे। प्रशिक्षण के दौरान हथियार चलाना और निशानेबाजी सिखाई जाएगी। सामरिक कार्रवाई की भी ट्रेनिंग होगी। महिला कर्मी बंधकों को बचाने और आतंकवाद-रोधी अभियानों से जुड़ी दूसरी विशेष जिम्मेदारियों की तैयारी भी करेंगी।
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कमांडो प्रशिक्षण पाठ्यक्रम से जुड़ी जरूरी बातें
- पहली बार महिला कर्मियों के लिए शुरू हुआ यह विशेष पाठ्यक्रम।
- राज्य पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की महिलाएं होंगी शामिल।
- प्रशिक्षण की अवधि 12 हफ्ते रखी गई है।
- हथियार, निशानेबाजी और सामरिक कार्रवाई की ट्रेनिंग मिलेगी।
- बंधक बचाव जैसे विशेष अभियानों के लिए भी तैयार किया जाएगा।
अलग-अलग बलों को मिलेगा फायदा
एनएसजी का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल महिला कर्मियों की व्यक्तिगत क्षमता बढ़ाना नहीं है। इसके जरिए अलग-अलग सुरक्षा बलों तक एनएसजी की विशेष आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञता भी पहुंचाई जाएगी। प्रशिक्षण से अलग-अलग बलों में काम करने वाली प्रशिक्षित महिला कर्मियों का दायरा बढ़ेगा। इससे पेशेवर कामकाज के समान मानकों को बढ़ावा मिलेगा। सुरक्षा बलों के बीच आपसी तालमेल भी मजबूत होगा।
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अपने बलों में ले जाएंगी अनुभव
पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद महिला कर्मी अपने-अपने बलों में लौटेंगी। वहां वे प्रशिक्षण के दौरान सीखे कौशल और ऑपरेशनल जानकारी का इस्तेमाल कर सकेंगी। एनएसजी को उम्मीद है कि इससे अलग-अलग संस्थानों की तैयारी मजबूत होगी। आतंकवाद से निपटने की क्षमता भी व्यापक स्तर पर बढ़ेगी। देश के अलग-अलग सुरक्षा बलों में विशेष प्रशिक्षण का लाभ पहुंच सकेगा।
महिलाओं की ऑपरेशनल भूमिका होगी मजबूत
एनएसजी ने कहा कि यह पहल केवल सुरक्षा जिम्मेदारियों में महिलाओं की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसका बड़ा उद्देश्य उन्हें ऑपरेशनल क्षमता के जरिए सशक्त बनाना है। प्रशिक्षण के बाद महिला कर्मियों को कठिन और विशेष जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया जाएगा। वे आंतरिक सुरक्षा की बदलती चुनौतियों से निपटने में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगी। एनएसजी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी इसे नारी शक्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया है।