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यशवंत सिन्हा ने पीएम मोदी पर लगाए आरोप, सुषमा-शाह की मुलाकात रद्द होने की बताई वजह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 23 Oct 2018 09:13 AM IST
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यशवंत सिन्हा
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पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने दावा किया कि पाकिस्तान और भारत के विदेश मंत्रियों के बीच होने वाली वार्ता इसलिए रद्द हो गई क्योंकि सुषमा स्वराज ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को विश्वास में नहीं लिया था। पिछले महीने सरकार ने न्यूयॉर्क में प्रस्तावित बैठक को रद्द कर दिया था। जबकि 24 घंटे पहले ही उन्होंने इसके लिए हामी भरी थी। बैठक तीन पुलिसवालों की आतंकियों द्वारा हत्या किए जाने के बाद रद्द हुई थी। इसके अलावा पाकिस्तान ने आतंकी बुरहान वानी पर डाक टिकट जारी किया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निर्णय लेने को केंद्रीकृत करने का आरोप लगाते हुए सिन्हा ने एक अखबार की रिपोर्ट का जिक्र किया। जिसमें यह दावा किया गया था कि बैठक इसलिए रद्द हुई क्योंकि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष शाह महमूद कुरैशी से बातचीत करने से पहले पीएमओ को विश्वास में नहीं लिया। उन्होंने कहा, 'इससे पता चलता है कि स्वराज की आवाज को सुना नहीं गया। यही वजह है कि उन्हें कई बार ट्विटर मंत्री कहा जाता है।'
सिन्हा ने आरोप लगाया कि कुछ वरिष्ठ मंत्री जो केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी समिति (सीसीएस) का हिस्सा थे उन्हें महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय अंधेरे में रखा गया। उन्होंने कहा, 'गृहमंत्री को यह नहीं पता कि भाजपा कब पीडीपी से समर्थन वापस ले रही है और वहां राज्यपाल शासन लागू कर रही है। इसी तरह वित्त मंत्री को नोटबंदी के बारे में कुछ नहीं पता था। साल 2016 में पीएम नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा की थी।'
यशवंत सिन्हा ने दावा करते हुए कहा कि मुझे लगता है कि वित्तमंत्री को इसके बारे में कैबिनेट समिति में ही पता चला होगा। इसी तरह तत्कालीन रक्षा मंत्री को यह नहीं पता था कि राफेल डील कब होने वाली है और क्या यह पहले हो चुकी है। पूर्व भाजपा नेता ने कहा कि उन्होंने चारों मंत्रियों को कुछ नहीं बताया जोकि सीसीएस के महत्वपूर्ण हिस्सा थे। यदि इन मंत्रियों की आवाज नहीं सुनी जाएगी तो समिति में कौन रह जाता है।
पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि अब केवल प्रधानमंत्री निर्णय लेते हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, 'सभी महत्वपूर्ण फैसले पीएमओ द्वारा लिए जाते हैं और दूसरों को आदेश का पालन करना पड़ता है। कैबिनेट के काम करने का तरीका जो संविधान में परिभाषित है वह अब खत्म हो चुका है।'
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निर्णय लेने को केंद्रीकृत करने का आरोप लगाते हुए सिन्हा ने एक अखबार की रिपोर्ट का जिक्र किया। जिसमें यह दावा किया गया था कि बैठक इसलिए रद्द हुई क्योंकि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष शाह महमूद कुरैशी से बातचीत करने से पहले पीएमओ को विश्वास में नहीं लिया। उन्होंने कहा, 'इससे पता चलता है कि स्वराज की आवाज को सुना नहीं गया। यही वजह है कि उन्हें कई बार ट्विटर मंत्री कहा जाता है।'
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सिन्हा ने आरोप लगाया कि कुछ वरिष्ठ मंत्री जो केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी समिति (सीसीएस) का हिस्सा थे उन्हें महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय अंधेरे में रखा गया। उन्होंने कहा, 'गृहमंत्री को यह नहीं पता कि भाजपा कब पीडीपी से समर्थन वापस ले रही है और वहां राज्यपाल शासन लागू कर रही है। इसी तरह वित्त मंत्री को नोटबंदी के बारे में कुछ नहीं पता था। साल 2016 में पीएम नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा की थी।'
यशवंत सिन्हा ने दावा करते हुए कहा कि मुझे लगता है कि वित्तमंत्री को इसके बारे में कैबिनेट समिति में ही पता चला होगा। इसी तरह तत्कालीन रक्षा मंत्री को यह नहीं पता था कि राफेल डील कब होने वाली है और क्या यह पहले हो चुकी है। पूर्व भाजपा नेता ने कहा कि उन्होंने चारों मंत्रियों को कुछ नहीं बताया जोकि सीसीएस के महत्वपूर्ण हिस्सा थे। यदि इन मंत्रियों की आवाज नहीं सुनी जाएगी तो समिति में कौन रह जाता है।
पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि अब केवल प्रधानमंत्री निर्णय लेते हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, 'सभी महत्वपूर्ण फैसले पीएमओ द्वारा लिए जाते हैं और दूसरों को आदेश का पालन करना पड़ता है। कैबिनेट के काम करने का तरीका जो संविधान में परिभाषित है वह अब खत्म हो चुका है।'