CAPF कानून का विरोध पड़ा भारी: सरकार विरोधी मैसेज शेयर करने के आरोप में सीआरपीएफ के डीआईजी निलंबित
CAPF बिल 2026 के विरोध से जुड़े कथित सरकार-विरोधी कंटेंट को सोशल मीडिया पर शेयर करने के आरोप में CRPF ने DIG बी.सी. पात्रा को सस्पेंड कर दिया है। वहीं, कई अधिकारी इस कार्रवाई को अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले कैडर अधिकारियों को निशाना बनाने की कोशिश बता रहे हैं।
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विस्तार
सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स ने अपने एक वरिष्ठ अधिकारी, डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) बी.सी. पात्रा को निलंबित कर दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने CAPF बिल 2026 को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसा कंटेंट शेयर किया, जिसमें कथित तौर पर देश की लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को बदलने की बात कही गई थी। इस मामले ने CAPF कैडर अधिकारियों और IPS अधिकारियों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, बी.सी. पात्रा फिलहाल अगरतला स्थित CRPF के त्रिपुरा सेक्टर मुख्यालय में तैनात थे। 1994 बैच के CRPF कैडर अधिकारी पात्रा हाल ही में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) में डेप्युटेशन पूरा कर अप्रैल में वापस CRPF में लौटे थे।
जांच पूरी होने तक रहेंगे निलंबित
सूत्रों के अनुसार, उनके खिलाफ CCS (CCA) नियम, 1965 के तहत प्रारंभिक जांच शुरू की गई है। जांच पूरी होने तक उन्हें नियम 10(1) के तहत निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर ऑडियो, वीडियो और तस्वीरों वाला ऐसा कंटेंट साझा किया, जो CAPF (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) बिल 2026 के विरोध से जुड़ा था और जिसमें सरकार के खिलाफ आपत्तिजनक संदेश मौजूद थे।
कानून बन चुका है बिल
यह बिल अप्रैल में राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद कानून का रूप ले चुका है। हालांकि, CAPF के कई कैडर अधिकारी शुरू से ही इस बिल का विरोध करते रहे हैं। उनका कहना है कि नए कानून के कुछ प्रावधान उनके हितों के खिलाफ हैं और इससे उन्हें प्रमोशन तथा सेवा में आगे बढ़ने के अवसरों पर असर पड़ सकता है। CRPF के महानिदेशक (DG) जी.पी. सिंह ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि फोर्स के सभी अधिकारी नियमों, कानूनों और अपनी शपथ से बंधे होते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी अधिकारी यदि अपने कर्तव्यों और सेवा नियमों के खिलाफ जाता है, तो उसके मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
पात्रा को किया जा रहा परेशान
हालांकि, पात्रा के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर फोर्स के भीतर अलग राय भी सामने आ रही है। मामले से जुड़े कुछ अधिकारियों का दावा है कि यह कार्रवाई केवल सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से नहीं, बल्कि पात्रा की उस भूमिका से भी जुड़ी हो सकती है जो उन्होंने CAPF कैडर अधिकारियों के अधिकारों की लड़ाई में निभाई थी। दरअसल, बी.सी. पात्रा उन प्रमुख अधिकारियों में शामिल रहे हैं जिन्होंने CAPF कैडर अधिकारियों को प्रमोशन और IPS अधिकारियों के बराबर सेवा दर्जा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी थी। कुछ अधिकारियों का आरोप है कि इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पात्रा ने हमेशा कैडर अधिकारियों के हितों के लिए आवाज उठाई और अदालत में उनकी पैरवी की। उनके मुताबिक, CRPF मुख्यालय द्वारा की गई कार्रवाई को कई अधिकारी प्रतिशोध के तौर पर देख रहे हैं। अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट में चले इस मामले से जुड़े करीब दो दर्जन अन्य अधिकारियों के भी हाल ही में जल्दबाजी में तबादले या नई पोस्टिंग के आदेश जारी किए गए हैं।
AAPWA ने 2 जुलाई को बुलाई प्रेस कॉन्फ्रेंस
इस बीच, पूर्व CAPF अधिकारियों के संगठन 'अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन' (AAPWA) ने 2 जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने का एलान किया है। संगठन का कहना है कि पात्रा का निलंबन जल्दबाजी में और गैर-कानूनी तरीके से किया गया है। संगठन उन CAPF कर्मियों और उनके परिवारों को निशाना बनाए जाने का भी विरोध कर रहा है, जिन्होंने अप्रैल में दिल्ली के राजघाट पर CAPF बिल के खिलाफ प्रदर्शन किया था। AAPWA के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा कि बी.सी. पात्रा एक अनुभवी और सम्मानित अधिकारी हैं, जिन्हें अपने लंबे करियर में कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
नए कानून के कुछ प्रावधान दमनकारी और भेदभावपूर्ण
वहीं, गृह मंत्रालय को भेजे गए अपने ज्ञापन में CAPF कैडर अधिकारियों ने नए कानून के कुछ प्रावधानों को 'दमनकारी' और 'भेदभावपूर्ण' बताया है। उनका कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार IPS अधिकारियों की डेप्युटेशन नियुक्तियों में कमी नहीं की गई, तो बड़ी संख्या में CAPF कैडर अधिकारी अपनी मौजूदा रैंक पर ही अटके रह जाएंगे और उन्हें पदोन्नति के अवसर नहीं मिल पाएंगे। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने सरकार की अपील खारिज कर दी थी। दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि CAPF (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) एक्ट का उद्देश्य सभी CAPF बलों के लिए सेवा शर्तों का एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। सरकार के मुताबिक, यह कानून अलग-अलग नियमों की मौजूदा व्यवस्था को खत्म कर एक समान प्रणाली लागू करेगा।
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सबकी नजर जांच के नतीजों पर टिकी
गृह मंत्रालय के अधिकारियों का यह भी कहना है कि CAPF में IPS अधिकारियों की डेप्युटेशन व्यवस्था एक वैध प्रशासनिक जरूरत है, क्योंकि IPS एक अखिल भारतीय सेवा है और उसके अधिकारियों को राज्य पुलिस तथा केंद्रीय सुरक्षा बलों दोनों में नेतृत्व और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। फिलहाल DIG बी.सी. पात्रा के निलंबन ने CAPF के भीतर चल रहे पुराने विवाद को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। अब सबकी नजर जांच के नतीजों और आने वाले दिनों में होने वाली संगठनात्मक तथा कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।